इटावा बरेली हाईवे पर स्थित नवनिर्मित टोल प्लाजा अब जिले में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। टोल प्लाजा को लेकर पहले स्थानीय लोगों ने मानकों का उल्लंघन बताते हुए इसे अवैध करार दिया, फिर मामला राजनीति तक पहुंचा और अब किसान संगठन भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं। इसी क्रम में सोमवार को किसान यूनियन अराजनैतिक के इटावा जिला अध्यक्ष संजेश यादव को पुलिस ने उनके आवास पर नजरबंद कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। टोल प्लाजा बनने के बाद सबसे पहले क्षेत्रवासियों ने इसके निर्माण पर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना है कि यह टोल प्लाजा तय मानकों को पूरा नहीं करता। नियमों के अनुसार 60 किलोमीटर के दायरे में दो टोल प्लाजा नहीं बनाए जा सकते, जबकि एक टोल चौबिया थाना क्षेत्र के बख्तियारपुर में बनाया गया है और दूसरा इसी हाईवे पर मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बरही में पहले से ही संचालित है। इसी आधार पर टोल को हटाने की मांग शुरू हुई। स्थानीय विरोध के बाद यह मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया। समाजवादी पार्टी के इटावा से लोकसभा सांसद जितेंद्र दोहरे ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस टोल प्लाजा को हटाने की मांग की। पत्र में उन्होंने टोल निर्माण को नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रवासियों और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सांसद के पत्र के बाद भी टोल प्लाजा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी और बढ़ गई। किसान संगठनों का आंदोलन और पुलिस कार्रवाई राजनीतिक प्रयासों के बाद किसान संगठन भी टोल प्लाजा के विरोध में उतर आए। किसान अराजनैतिक संगठन ने बख्तियारपुर टोल प्लाजा पर महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की थी। इसी को देखते हुए सोमवार को पुलिस ने जिला अध्यक्ष संजेश यादव को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया। उनके घर पर दो थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी बल तैनात किया गया। इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों और समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह अपने साथियों के साथ टोल प्लाजा पर पहुंच गए, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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