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भारत टैक्सी एप से ड्राइवर क्यों नाराज: क्या टूट जाएगा ओला-उबर को टक्कर देने का सपना, वेटिंग चार्ज और कम किराए से दिक्कत

भारत टैक्सी एप से ड्राइवर क्यों नाराज:  क्या टूट जाएगा ओला-उबर को टक्कर देने का सपना, वेटिंग चार्ज और कम किराए से दिक्कत


आपने ओला-उबर या रैपिडो से कैब बुक करके सफर तो किया होगा। 5 फरवरी को दिल्ली में देश की पहली को-ऑपरेटिव कैब सर्विस भारत टैक्सी एप लॉन्च हो गई। इसका पूरा किराया ड्राइवर के पास जाएगा क्योंकि ये किसी कंपनी का एप नहीं, ना ही इसमें किसी एक व्यक्ति या कंपनी

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किराया किफायती है। दावा ये भी है कि बारिश या पीक आवर में भी किराया नहीं बढ़ेगा। इन दावों को परखने और सर्विसेज आजमाने के लिए दिल्ली में दैनिक भास्कर की टीम ने भारत टैक्सी एप डाउनलोड किया। किराया बाकी कैब के मुकाबले कम मिला। एक ही लोकेशन के लिए उबर की तुलना में इसका किराया 14-15 रुपए कम था। वहीं ओला की तुलना में करीब 138 रुपए कम दिखा।

सर्विसेज देखने के लिए 7 फरवरी को हमने कैब बुक की। बुकिंग के बाद वेटिंग टाइम पहले 7 मिनट था, फिर ये बढ़ते-बढ़ते 12-13 मिनट हो गया। दो बार बुकिंग कंफर्म हुई लेकिन कैब नहीं आई। आखिरकार दोनों बार राइड कैंसिल हो गई। इसके बाद कैब न मिल पाने की वजह जानने और भारत टैक्सी एप का एक्पीरिएंस समझने के लिए हम कुछ ड्राइवर्स से मिले।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 5 फरवरी को भारत टैक्सी एप ऑफिशियली लॉन्च किया।

ड्राइवर्स बोले- राइड मिल रहीं लेकिन रेट खराब शिवराज सिंह बुलंदशहर के रहने वाले हैं। पिछले 10 साल से कैब चला रहे हैं। उन्होंने 25 दिन पहले भारत टैक्सी एप इंस्टॉल किया लेकिन सही रेट न मिलने के कारण राइड नहीं ले रहे हैं।

शिवराज कहते हैं, ‘मैंने अब तक सिर्फ एक ही राइड ली है। इसमें टाइमिंग का ख्याल नहीं रखा गया है। सिर्फ किलोमीटर नहीं, किसी जगह जाने में कितना समय लग रहा है, उसके हिसाब से भी पैसे मिलने चाहिए। अगर दूरी कम है लेकिन जाम के कारण ज्यादा समय लग रहा है तो CNG ज्यादा ही जलेगी। मैं भारत टैक्सी एप भी खोलकर रखता हूं लेकिन ये दूसरे एप के मुकाबले कम पैसे दे रहा है।‘

‘इस पर राइड भी ज्यादातर उन इलाकों में मिल रही है, जहां ड्राइवर नहीं जाना चाहते हैं या ऐसे इलाके में जहां ज्यादा जाम या भीड़भाड़ रहती है। अगर ये एप चल गया और दूसरी कंपनियों का मार्केट खराब हुआ तो कहीं हमें बंधुआ मजदूर ना बना लिया जाए। हमसे मनमाने दाम पर न टैक्सी चलवाई जाए। क्योंकि ये तो हमें अभी से रेट नहीं दे रहे हैं।‘

बाकी कैब कंपनियों के बारे में पूछने पर शिवराज कहते हैं, ‘अभी जो कंपनियां सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं, उसका कमीशन भी 20 परसेंट तक बैठता है। भारत टैक्सी जब तक सही रेट नहीं देगी, तब तक ड्राइवर कमीशन देने के बाद भी उन्हीं कंपनियों की कैब चलाएंगे।‘

शिवराज का कहना है कि CNG खर्च और मेनटेनेंस के बाद आज की जरूरत है कि कैब ड्राइवर्स को कम से कम 25 रुपए प्रति किलोमीटर किराया मिले।

शिवराज का कहना है कि CNG खर्च और मेनटेनेंस के बाद आज की जरूरत है कि कैब ड्राइवर्स को कम से कम 25 रुपए प्रति किलोमीटर किराया मिले।

किराया बहुत कम, ये दूरी और समय के हिसाब से तय हो इसी तरह महेश कुमार भी 20 दिनों से भारत टैक्सी एप इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन वो भी रेट से खुश नहीं हैं। महेश कहते हैं, ‘पीक टाइम में इसका रेट नहीं बढ़ता है। दूरी और समय दोनों हिसाब से रेट तय होना चाहिए। अभी रेट 16-17 रुपए प्रति किलोमीटर है। कभी कम भी हो जाता है। हमें 25 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया मिलना चाहिए।‘

‘कोई नहीं चाहता कि वो टैक्सी चलाए। हम मजबूर होकर टैक्सी चलाते हैं। अब प्राइवेट कंपनी कस्टमर को रिझाने के लिए कम किराया दिखाएगी तो वे उन्हीं के पास जाएंगे। मैं चाहता हूं कि सरकार सबके लिए एक रेट फिक्स करे। हमारा किराया हमें सरकार दिलवाए।‘

महेश को दिन भर में भारत टैक्सी से सिर्फ 4-5 बुकिंग मिलती है। ओला-उबर जैसी कंपनियों की खामियों पर वे कहते हैं, ‘ये कंपनियां अब सब्सक्रिप्शन लेकर काम करा रही हैं। कभी-कभी सही रेट मिल जाता है लेकिन उसके बाद 8 से 10 रुपए प्रति किलोमीटर का किराया ही देती हैं। इन कंपनियों ने ड्राइवरों को बहुत लूटा है। ये अच्छी बात है कि भारत टैक्सी हमारे भविष्य के लिए है लेकिन किराया सही मिलना चाहिए।’

ये हमारा एप लेकिन कम पैसे में कौन काम करेगा अजीत मिश्रा दिल्ली में एप के जरिए ऑटो चलाते हैं। पिछले डेढ़-दो महीने से भारत टैक्सी एप भी चला रहे हैं। वे कहते हैं कि पहले कम पिकअप मिलते थे लेकिन लॉन्च होने के बाद बुकिंग बढ़ रही है। हमने पूछा अब तक कितनी राइड ली? इस पर अजीत कहते हैं, ’अब तक दो ही राइड ली क्योंकि रेट बहुत कम है।’

’हर व्यक्ति को पैसे चाहिए। जो अच्छे पैसे दे रहा है, हम उसी के पास जा रहे हैं। भारत टैक्सी कभी-कभी मीटर से भी कम किराया दे रहा है। पहले दिल्ली सरकार ने भी ऐसा एक मॉडल शुरू किया था लेकिन वो (पूछो ऐप) करप्शन की भेंट चढ़ गया। ड्राइवर को कोई फायदा नहीं हुआ।’

भारत टैक्सी में सुधार को लेकर अजीत कहते हैं, ’हम इसे अपना एप मान रहे हैं। 30 रुपए बेसिक के अलावा प्रति किलोमीटर 11 रुपए मिलने चाहिए। अगर हम जाम में खड़े हैं, तो उस वेटिंग टाइम के भी पैसे मिलने चाहिए। अगर ये मिल जाए तो हमें भारत टैक्सी से कोई दिक्कत नहीं है। बुकिंग मिल रही है लेकिन कम रेट के चलते राइड नहीं ले पा रहे हैं। हम सिर्फ उम्मीद ही कर सकते हैं कि आगे कुछ बढ़िया हो जाए।’

आशु खान अलग-अलग टैक्सी एप के जरिए बाइक सर्विस देते हैं। पिछले दो महीने से भारत टैक्सी भी इस्तेमाल कर रहे हैं। आशु कहते हैं, ‘जो लोग इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हीं से इस एप का पता चला। अंतर यही है कि बाकी एप की तुलना में पूरे पैसे मिल रहे हैं। कोई कमीशन नहीं है। जबकि दूसरी कंपनियां 25 से 30% तक कमीशन लेती हैं। अगर 100 रुपए की राइड मिली तो 75-80 रुपए ही मेरे पास आते हैं।’

हालांकि आशु कहते हैं कि अभी उन्हें भारत टैक्सी के जरिए 3-4 राइड ही मिल रही हैं। जबकि दूसरी कंपनियों की बुकिंग दिन भर मिलती है। इसके बारे में ज्यादा लोगों को पता चलेगा तो हमें भी इसका फायदा होगा। गाड़ियों और ऑटो पर एड प्रिंट करवाकर इसका प्रचार करना चाहिए।

एक्सपर्ट: प्री-पेड टैक्सी की तरह सरकार तय करे किराया इंडियन फेडरेशन ऑफ एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सलाउद्दीन ‘भारत टैक्सी’ को एक अच्छी पहल बताते हैं, हालांकि उनकी कुछ चिंताएं भी हैं। सलाउद्दीन कहते हैं, ‘सबसे बड़ी चुनौती किराया है। सरकार को सबके (प्राइवेट कैब कंपनियों समेत भारत टैक्सी) लिए एक किराया तय करना चाहिए। जो किराया है, वो ना तो बहुत कम हो, ना ही बहुत ज्यादा।‘

‘सरकार को सभी संगठनों के साथ एक मीटिंग करनी चाहिए। इसके बाद अपने-अपने राज्यों के हिसाब से रेट तय करने चाहिए, तब जाकर भारत टैक्सी जैसा मॉडल सफल हो सकेगा। जैसे बड़े शहरों में प्री-पेड टैक्सी का किराया सरकार तय करती है, उसी तरह का सिस्टम बनना चाहिए।‘

भारत टैक्सी की चुनौतियों पर सलाउद्दीन कहते हैं कि प्लेटफॉर्म कंपनियों (प्राइवेट कैब कंपनियां) के पास ज्यादा पैसा है लेकिन जब उन कंपनियों को ड्राइवरों ने ही बड़ा बनाया है, तो वे भारत टैक्सी को बड़ा क्यों नहीं बना सकते हैं।‘

प्रचार की जरूरत ताकि बड़ी कंपनियों के कस्टमर शिफ्ट हों ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर रिसर्च करने वाले बासुदेव बर्मन भी सलाउद्दीन की बातों का समर्थन करते हैं। वे कहते हैं कि अभी बड़ी कंपनियों का जो कस्टमर बेस बना हुआ है, उसे कैसे शिफ्ट कराया जाएगा, ये बड़ी चुनौती होगी।

बर्मन कहते हैं, ‘अभी हमें पता चल रहा है कि भारत टैक्सी का किराया दूसरी कंपनियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा है। इसके कारण भरोसा बनाना और कस्टमर बनाना एक चुनौती है। सरकार को ही पहल करनी होगी कि वो इस पर ड्राइवर और कस्टमर का भरोसा बनाए। इस मार्केट को रेगुलेट करने की जरूरत है। जब तक एक तय किराए पर कैब नहीं चलेगी, प्राइवेट कंपनियां मनमानी करती रहेंगी।‘

कैब मार्केट में आने वाले बदलावों पर बर्मन कहते हैं, ‘प्राइवेट कैब कंपनियों ने तो पहले ही रणनीति बदल ली है। अब वे कमीशन के बदले सब्सक्रिप्शन के मॉडल पर आ गए हैं। ज्यादातर ड्राइवर अब हर राइड पर कमीशन नहीं दे रहे हैं। कंपनियां ड्राइवर को एक तय समय के लिए सब्सक्रिप्शन दे रही हैं।‘

‘इसकी तुलना में भारत टैक्सी के प्रचार के लिए सरकार को आगे आना होगा क्योंकि उसके पास संसाधन है। इसी से भारत टैक्सी का विस्तार हो सकता है। खुद ड्राइवर्स ये काम नहीं कर सकते हैं।‘

बासुदेव बर्मन का मानना है कि विज्ञापन देकर, मैसेज और सोशल मीडिया के जरिए भारत टैक्सी को लेकर लोगों के बीच जागरूकता लानी होगी।

बासुदेव बर्मन का मानना है कि विज्ञापन देकर, मैसेज और सोशल मीडिया के जरिए भारत टैक्सी को लेकर लोगों के बीच जागरूकता लानी होगी।

देश में 2 लाख करोड़ का टैक्सी मार्केट ये सही है कि कैब कंपनियां पहले सिर्फ कमीशन मॉडल पर काम कर रही थीं। हर राइड के किराए पर कंपनियां 15 से 30% तक कमीशन लेती थीं। हालांकि अब सभी कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रही हैं। यानी महीने, हफ्ते या दिन के हिसाब से एक तय सब्सक्रिप्शन राशि देने के बाद ड्राइवर हर राइड का पूरा किराया रख सकते हैंं।

जैसे उबर एक दिन के सब्सक्रिप्शन का 129 रुपए ले रही है। इसके बाद कैब ड्राइवर को पूरे दिन की कमाई में कोई कमीशन नहीं देना पड़ेगा। इसी तरह ओला में एक दिन का सब्सक्रिप्शन 149 रुपए का है। इस रिचार्ज के बाद दिन भर का किराया ड्राइवर के पास जाएगा। दूसरी कंपनियां भी यही मॉडल अपना रही हैं।

मार्केट रिसर्च कंपनी मॉर्डर इंटेलिजेंस (Mordor Intelligence) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में भारत का कुल टैक्सी मार्केट 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का है। इसमें 65% हिस्सा एप बेस्ड कैब कंपनियों का है। यानी लगभग 1.31 लाख करोड़ रुपए। इसमें भी मुख्य रूप से उबर, ओला और रैपिडो का मार्केट शेयर सबसे बड़ा है। आने वाले सालों में एप बेस्ड राइड का मार्केट और ज्यादा बढ़ने वाला है।

भारत टैक्सी के CEO बोले- हमेशा एक जैसा रेट होगा भारत टैक्सी के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) विवेक पांडे बताते हैं कि एप से अभी 4 लाख से ज्यादा ड्राइवर जुड़ गए हैं। वहीं करीब 13 लाख कस्टमर जुड़ चुके हैं। करीब 2-3 लाख लोग रोज भारत टैक्सी एप पर आकर सर्च कर रहे हैं।

ड्राइवर्स को होने वाले फायदों पर विवेक कहते हैं, ‘सभी ड्राइवर्स धीरे-धीरे सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजना के तहत लाए जाएंगे, जैसे- आयुष्मान योजना, मुद्रा योजना। उन्हें जीरो कमीशन के अलावा इन सबका फायदा मिलेगा। कभी किसी की आईडी ब्लॉक नहीं होगी, उनकी सुनवाई होगी क्योंकि बोर्ड मेंबर में ड्राइवर भी हैं।‘

‘दूसरा पक्ष कस्टमर का है। उन्हें सही रेट में कैब मिलेगी। ये नहीं होगा कि ज्यादा कस्टमर को लाने के लिए आज रेट घटा देंगे और फिर बढ़ा देंगे।‘

बैलेंस रेट रखकर कस्टमर लाने की कोशिश मार्केट कॉम्पिटिशन को लेकर विवेक कहते हैं, ‘अभी हम ड्राइवर से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि रेट को लेकर परेशान ना हों क्योंकि अभी हमें कस्टमर लाने हैं। रेट ज्यादा कर देंगे तो कस्टमर नहीं आएंगे। इसलिए हम कहीं दावा नहीं कर रहे हैं कि भारत टैक्सी सबसे सस्ती है।‘

‘हम एक बैलेंस कीमत रखने की कोशिश कर रहे हैं। कस्टमर से भी अपील है कि वे इसका इस्तेमाल करें, इसका पैसा किसी कंपनी के पास या बाहर के देशों में नहीं जा रहा है। बड़ी कंपनियां अनलिमिटेड समय तक तो डिस्काउंट देकर बुकिंग नहीं लेगी, इससे उनका बिजनेस भी नहीं चलेगा।‘

‘एक साल के अंदर बड़े शहरों में भारत टैक्सी उपलब्ध होगी और तीन साल में ये सर्विस पूरे देश में शुरू हो जाएगी।‘ ड्राइवर्स के ‘मालिक’ बनने पर वे कहते हैं, ‘कोई भी ड्राइवर 500 रुपए तक के अधिकतम 5 शेयर खरीद सकते हैं। कल को अगर कंपनी को मुनाफा होता है, तो इसमें ड्राइवर की भी हिस्सेदारी होगी। वहीं इंश्योरेंस के लिए भी बहुत ही कम पैसे देने होंगे।‘

महिला ड्राइवर्स को लेकर विवेक कहते हैं कि अभी उस पर काम किया जा रहा है, जब एक साथ कई सारी महिला ड्राइवर्स हो जाएंगी तो ये विकल्प भी खोला जाएगा। अगर अभी खोला जाएगा और कस्टमर को ड्राइवर नहीं मिलेगी तो दिक्कत होगी। सभी के लिए एकसमान रेट की मांग पर विवेक कहते हैं कि ट्रांसपोर्ट राज्य सरकारों का विषय है, अगर सरकार किराया तय करती है तो हम उसका पालन जरूर करेंगे। …………..

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