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चंडीगढ़ में ₹2.10 करोड़ में कोठी नीलाम: कलेक्टर-मार्केट रेट ज्यादा होने की याचिका खारिज; कोर्ट ने कहा- नीलामी सबकी मौजूदगी में हुई – Chandigarh News

चंडीगढ़ में ₹2.10 करोड़ में कोठी नीलाम:  कलेक्टर-मार्केट रेट ज्यादा होने की याचिका खारिज; कोर्ट ने कहा- नीलामी सबकी मौजूदगी में हुई – Chandigarh News

चंडीगढ़ में एक कोठी 2.10 करोड़ रुपए में नीलाम हो गई। इस नीलामी को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे चंडीगढ़ कोर्ट ने खारिज कर दिया। चंडीगढ़ कोर्ट ने 19 जनवरी के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि यह नीलामी कोर्ट की निगरानी में हुई। वहीं याचिकाकर्ता का तर्क था कि कोठी की कीमत 3.5 करोड़ रुपए से ज्यादा है। जितने में इसे बेचा जा रहा, वह तो रिजर्व प्राइस होना चाहिए। जानिए पूरा क्या था मामला
मामला सेक्टर 22-C स्थित कोठी नंबर 2781 के बंटवारे और बिक्री से जुड़ा है। इस संपत्ति को लेकर पहले 6 जनवरी 2017 को प्रारंभिक डिक्री और 1 दिसंबर 2018 को अंतिम डिक्री पारित हुई थी। इसके बाद संपत्ति की बिक्री के लिए निपटारे की याचिका दायर की गई। 15 अक्टूबर 2025 को अदालत की निगरानी में कोठी की नीलामी हुई, जिसमें पंकज बंसल ने 2 करोड़ 10 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर संपत्ति खरीदी। राजिंदर कौर (डिक्री होल्डर नंबर-1) ने अपने जीपीए धारक जे.बी. सिंह के माध्यम से तथा रणजीत सिंह (जजमेंट डेब्टर नंबर-3) ने संयुक्त रूप से नीलामी रद्द करने के लिए अपील दायर की थी। अपील में कहा- रेट ज्यादा, कम में बेच दिया
अपीलकर्ताओं ने कहा कि नीलामी से पहले कोर्ट ने कोठी की न्यूनतम कीमत तय नहीं की। कलेक्टर रेट और मार्केट रेट ज्यादा होने के बावजूद मकान को कम दाम में बेच दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीलामी की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं अपनाई गई और कुछ इच्छुक खरीदारों को बोली में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला। इसके साथ ही, सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 66 से 68 का पालन नहीं किया गया। अपीलकर्ताओं का दावा था कि मकान की असली कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये है और इसकी न्यूनतम बोली कम से कम 2.20 करोड़ रुपये तय होनी चाहिए थी। पहले भी हो चुकी थी नीलामी
रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले 6 जनवरी 2025 को भी नीलामी हुई थी। उस समय 2 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये की बोली लगी, लेकिन सफल बोलीदाता निर्धारित समय में 25 प्रतिशत राशि जमा नहीं कर सका। इसके बाद उसे भविष्य की नीलामी में भाग लेने से रोक दिया गया। बाद में पुनः नीलामी की प्रक्रिया शुरू की गई। एक सह-स्वामी ने स्वयं आवेदन देकर आम जनता को भी नीलामी में भाग लेने की अनुमति देने की मांग की थी। अदालत ने क्यों खारिज की अपील, 2 पॉइंट में जानिए..



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