जयपुर में हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल उपमन ने कहा- उन्हें बजट से निराशा हुई। उन्होंने कहा- पहले मैं वकील था और अब जज हूं। इसके साथ-साथ राजस्थान का एक नागरिक भी हूं तो हमारी भी कुछ डिमांड होती हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में सोमवार
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वहीं उन्होंने कहा- जब कभी भी मैं हाईकोर्ट से यहां बनीपार्क में सेशन कोर्ट में आता था तो मैं रिक्शा लेकर आता था। अपनी गाड़ी लेकर नहीं आता था, क्योंकि यहां पार्किंग नहीं मिलती है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल उपमन ने कहा- उन्हें बजट से निराशा हुई।
बोले- न्यायपालिका को नहीं दिया पूरा बजट हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल उपमन ने कहा- एक नागरिक के रूप में इस बार का बजट हमने देखा तो मुझे थोड़ी-सी न्यायपालिका के दृष्टिकोण से हल्की सी निराशा हुई कि उतना बजट न्यायपालिका को राज्य सरकार ने नहीं दिया। उन्होंने कहा- मैं मुख्यमंत्री से गुजारिश करूंगा कि वे इस संबंध में विचार करेंगे और बजट में हम पर कृपा करेंगे। इससे वकील और न्यायिक अधिकारी लोगों को न्याय देने के लिए प्रयासों को गति दे सकेंगे।
कहा- बनीपार्क में दिन में चलने की जगह भी नहीं मिलती जस्टिस अनिल उपमन ने कहा- हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष के रूप में आप लोगों ने मुझे अपनी सेवा करने का मौका दिया था तो एक तरह से मैं आपका परमानेंट प्रतिनिधि हूं। आज ऐसा शानदार मौका है कि राजस्थान सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं। शहरी विकास मंत्री भी मौजूद हैं।
उन्होंने कहा- जो भवन यहां से दिख रहा है, वह बहुत पुराना हो चुका है। मैंने यहां बहुत चक्कर लगाए हैं और यहां की जो समस्या है, उससे मैं पूरी तरह से वाकिफ हूं। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा- कभी आप दिन में यहां आएंगे तो यहां चलने की भी जगह नहीं मिलती है। उन्होंने कहा- न्यायिक अधिकारी किन परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं, वह भी किसी से छुपा हुआ नहीं है। जब कभी भी मैं हाईकोर्ट से यहां बनीपार्क में सेशन कोर्ट में आता था तो मैं रिक्शा लेकर आता था। अपनी गाड़ी लेकर नहीं आता था, क्योंकि यहां पार्किंग नही मिलती है।
