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राजस्थान में मिले एक हजार साल पुराने मंदिर के अवशेष: यहां बसा था पाटन शहर, हमले और आगजनी से उजड़ने की आशंका – Khetari News

राजस्थान में मिले एक हजार साल पुराने मंदिर के अवशेष:  यहां बसा था पाटन शहर, हमले और आगजनी से उजड़ने की आशंका – Khetari News


खुदाई कर रहे विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यहां कई और ऐतिहासिक वस्तुएं मिल सकती हैं।

राजस्थान के खेतड़ी (झुंझुनूं) में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को काफी पुरानी आबादी के अवशेष मिले हैं। ये खुदाई त्योंदा गांव में रीढ़ का टीला नामक जगह पर की जा रही है।

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अब तक यहां 11वीं सदी यानी करीब एक हजार साल पहले के अवशेष मिल चुके हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण अवशेष एक मंदिर के हैं। यहां कई मूर्तियां ऐसी हैं, जैसे उन्हें सुरक्षित रखा गया हो। मंदिर के स्तंभ भी सही कंडीशन में हैं।

ऊपरी स्तरों पर मध्यकालानी स्थापत्य की डिजाइन है। इसके अलावा मिट्‌टी के बर्तन और जमीन में 1 मीटर मोटी राख की लेयर भी खुदाई में मिली है।

त्योंदा गांव का यह टीला खेतड़ी से करीब 21 किमी दूर है। दैनिक भास्कर एप की टीम रविवार दोपहर यहां पहुंची। हमारे सामने जैसे हजारों साल पुराने किसी शहर का एक हिस्सा था।

खुदाई में मिले अवशेष ठीक वैसे ही हैं जैसे आज किसी कस्बे या शहर का हिस्सा होता है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी खनन में जुटे थे।

उनके बताए अनुसार श्रमिक मिट्‌टी हटाते जा रहे थे, लेकिन इतनी सावधानी के साथ कि जमीन में धंसी किसी भी वस्तु को नुकसान न पहुंचे।

मंदिर परिसर में पत्थरों से निर्मित फर्श चौकोर आधार पर स्थित पत्थर के टुकड़े मिले हैं।

मंदिर परिसर में पत्थरों से निर्मित फर्श चौकोर आधार पर स्थित पत्थर के टुकड़े मिले हैं।

मंदिर के अवशेष मिले, मूर्तियों को सुरक्षित दबाया गया

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने यहां जनवरी में खुदाई शुरू की थी। सतह से ढाई मीटर और छह मीटर के गहराई पर अवशेष सामने आने लगे। अब यह स्पष्ट हुआ है कि ये अवशेष किसी मंदिर के थे।

डॉ. विनीत गोधल बताते हैं कि सरंचना को देखकर ये कहा जा सकता है कि ये मंदिर उस समय बहुत भव्य रहा होगा। यहां स्तंभों के आधार मिले हैं।

मंदिर के फर्श पर काफी मिट्‌टी मिली, उसे हटाया गया तो अंदर से भगवान विष्णु, सिंहव्याल, गणेश जी आदि की मूर्तियां मिली हैं।

अर्धवृत्ताकार पत्थर संरचना से यह संकेत मिलता है कि यहां कोई मंदिर था या इस परिसर में अनुष्ठान होता होगा। (AI जेनरेटेड)

अर्धवृत्ताकार पत्थर संरचना से यह संकेत मिलता है कि यहां कोई मंदिर था या इस परिसर में अनुष्ठान होता होगा। (AI जेनरेटेड)

पत्थरों को जोड़ने के लिए लोहे की कीलें भी मिली हैं

80 के दशक में यहां की जमीन पर कई मूर्तियां बिखरी हुई मिली थीं। इन मूर्तियों को हरियाणा के झज्जर में गुरुकुल म्यूजियम में रखा गया था। अब पुरातत्व अधिकारी उन मूर्तियों का भी अध्ययन करेंगे।

यहां कई मूर्तियां मिली हैं। इनमें गणेश जी प्रतिमा स्पष्ट दिखाई दे रही है। इसके अलावा विष्णु भगवान और सिंहब्याल की प्रतिमाएं मिली हैं।

यहां कई मूर्तियां मिली हैं। इनमें गणेश जी प्रतिमा स्पष्ट दिखाई दे रही है। इसके अलावा विष्णु भगवान और सिंहब्याल की प्रतिमाएं मिली हैं।

चाक पर और हाथ से बनाए बर्तन मिले

अधिकारी विवेक शुक्ला बताते हैं कि खनन के दौरान यहां मिट्‌टी से बने बर्तन मिले हैं। ये बर्तन हाथ से और चाक से बनाए गए हैं। ज्यादातर बर्तन नष्ट हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर काले और लाल रंग के हैं।

ये सामग्री यहां के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चरणों की ओर संकेत करती है। अधिकारियों के अनुसार यह कहा जा सकता है कि रीढ़ का टीला एक बहु-सांस्कृतिक पुरास्थल रहा होगा।

मंदिर परिसर और इसके आसपास मिट्‌टी से बने बर्तनों के टुकड़े मिले हैं। अब इनके काल की गणना के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

मंदिर परिसर और इसके आसपास मिट्‌टी से बने बर्तनों के टुकड़े मिले हैं। अब इनके काल की गणना के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

दोहान नदी के किनारे था पाटन नाम का शहर

यहां खनन कर रहे पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उत्खनन अधीक्षक डॉ. विनीत गोधल ने बताया कि जिस जगह अवशेष मिले हैं, वहां के पास से ही दोहान नदी बहती थी। यानी ये शहर नदी के किनारे था।

उन्होंने बताया कि इस शहर के बारे में अभी तक ज्यादा जानकारी नहीं मिली है, लेकिन इसका नाम पाटन था। तब के शासक यहां रहते थे और यहां की राजधानी था।

मिट्टी की परतों और संरचनात्मक शैली के अध्ययन से ऐसा लगता है कि ये जगह राजपूत काल से संबंधित है, हालांकि इसकी सटीक तिथि आगे की खुदाई, सामग्री विश्लेषण एवं वैज्ञानिक परीक्षण से ही सामने आ सकेगी।

सुनारी सभ्यता से 35 किमी की दूरी

जिले की खेतड़ी तहसील में ही 80 के दशक में ताम्रयुगीन सुनारी सभ्यता के अवशेष मिले थे। जो बड़ी महत्वपूर्ण खोज थी। नए मिले अवशेष उस जगह से करीब 35 किमी दूर है।

ऐसे में यह अवशेष इतिहास को जानने की दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे हैं। सुनारी सभ्यता आज से तीन हजार साल पुरानी हैं। जबकि रीढ़ का टीला पर मिले अब तक के अवशेष एक हजार साल पुराने मध्यकाल के हैं।

हालांकि, जैसे-जैसे उत्खनन होगा वैसे-वैसे संभव है कि ये अवशेष भी सुनारी सभ्यता के काल से मिल जाएं।

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राजस्थान के डीग के बहज गांव में भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) की खुदाई में टीम को साइट पर हजारों साल पुराने शहर के अवशेष मिले थे। इसी साइट पर टीम को गुप्त काल (करीब 1700 साल पहले) का एक नरकंकाल भी मिला था। (पूरी खबर पढे़ं)



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