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बंगाल हार के बाद अखिलेश ने आईपैक से कॉन्ट्रैक्ट तोड़ा: कहा- मेरे पास पैसे नहीं; ममता का चुनावी कैंपेन इसी कंपनी ने संभाला था – Uttar Pradesh News

बंगाल हार के बाद अखिलेश ने आईपैक से कॉन्ट्रैक्ट तोड़ा:  कहा- मेरे पास पैसे नहीं; ममता का चुनावी कैंपेन इसी कंपनी ने संभाला था – Uttar Pradesh News


लखनऊ3 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी ने चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC (आई-पैक) के साथ करार तोड़ दिया है। अखिलेश ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- हां, हमारा संबंध उनसे था। कुछ महीने हमारे साथ उन्होंने काम किया। लेकिन, अब हम साथ काम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हमारे पास फंड की कमी है, हम इतने फंड नहीं दे सकते हैं।

अखिलेश ने कहा-

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कुछ लोगों ने हमें चुनाव जितवाने वाली कंपनी के बारे में बताया है। सलाह दी है कि सी-वोटर्स से सर्वे कराइए। एक AVM कंपनी है, उसको साथ रखिए। सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करना हो तो 360 डिग्री कंपनी से जुड़िए। उसको फंडिंग करिए।

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आई-पैक ही बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का चुनावी कैंपेन देख रही थी। यूपी में 2027 के लिए अखिलेश ने अपनी चुनावी रणनीति काम आई-पैक को ही सौंप रखा था। I-PAC ने ही 2021 में तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिम बंगाल में टीएमसी को जीत दिलाने में मदद की थी।

स्टालिन और ममता ने IPAC हायर करने दी थी सलाह

यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और CM योगी को टक्कर देने के लिए अखिलेश यादव ने I-PAC के साथ करार किया था। इस कंपनी की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। यह भारत की पहली प्रोफेशनल चुनावी कंसल्टेंसी कंपनी है। लेकिन, हाल के वर्षों में पीके ने कंपनी से दूरी बना ली। I-PAC अब प्रतीक जैन जैसे लोगों के हाथों में है, जो TMC और DMK के साथ काम कर रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और बंगाल की ममता बनर्जी ने IPAC हायर करने सलाह अखिलेश को दी थी। अखिलेश ने कंपनी के पदाधिकारियों के साथ दिसंबर, 2025 में दिल्ली में पहली मीटिंग की। फिर इस साल जनवरी में जब बंगाल गए तो दोबारा मुलाकात हुई। इसके बाद सपा ने IPAC को हायर किया।

सपा ने डेटा एनालिसिस और उसके आधार पर रणनीति का काम मुम्बई की कंपनी शो टाइम कंसल्टिंग को दिया है। सर्वे का काम कर्नाटक की एक कंपनी कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, I-PAC को चुनावी अभियान के साथ-साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए ऐप-बेस्ड टूल्स का इस्तेमाल करने और विपक्षी पार्टियों की कमजोरियों पर फोकस करने का काम दिया गया था।

I-PAC भारत की पहली प्रोफेशनल चुनावी कंसल्टेंसी कंपनी है, लेकिन हाल के वर्षों में पीके ने कंपनी से दूरी बना ली है।

I-PAC भारत की पहली प्रोफेशनल चुनावी कंसल्टेंसी कंपनी है, लेकिन हाल के वर्षों में पीके ने कंपनी से दूरी बना ली है।

कई राजनीतिक दलों के लिए PK बना चुके हैं स्ट्रैटजी

प्रशांत किशोर को राजनीतिक सर्किल में PK के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपनी कंपनी I-PAC के जरिए कई बड़े चुनावी अभियानों को सफलता दिलाई है। 2014 में भाजपा के लिए रणनीति बनाई। 2015 में नीतीश कुमार को बिहार में जीत दिलाई। 2016 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब में विजय दिलाई। ममता बनर्जी की टीएमसी और एमके स्टालिन की डीएमके की सफलताओं में PK की कंपनी की भूमिका अहम रही है।

कौन हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र से इस्तीफा देकर भारतीय राजनीति में कदम रखा। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कैंपेन किया। इसकी सफलता के बाद उन्होंने I-PAC बनाई। बिहार में अपनी जन सुराज पार्टी बनाने के बाद उन्होंने कंपनी दूरी बना ली। 2025 के बिहार चुनावों में उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया, बल्कि संगठन मजबूत करने पर फोकस किया।

यूपी में पहले भी काम कर चुके हैं प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर यूपी में इससे पहले भी काम कर चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई थी और 27 साल यूपी बेहाल का नारा दिया था। हालांकि, बाद में सपा और कांग्रेस के बीच समझौता हो गया था। यूपी बेहाल के नारे को बीच में ही छोड़ना पड़ गया था। सपा से समझौते के बाद भी केवल 7 सीटें ही कांग्रेस को मिल सकी थीं। सपा की भी बुरी हार हुई थी, उसे 47 सीटों पर सिमटना पड़ा था।

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