सिवनी जिले की लखनादौन नगर पालिका में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां तत्कालीन सीएमओ सहित उप निरीक्षक, प्रेसिडेंट इन काउंसिल समेत 23 लोगों ने मिलकर दुकानों के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार किया। शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच करते हुए एफआईआर दर्ज की है। जबलपुर आदर्श नगर निवासी रविंदर सिंह आनंद की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नगर परिषद लखनादौन, जिला सिवनी में पदस्थ रहे सीएमओ एवं अध्यक्ष ने मिलीभगत करते हुए न सिर्फ पद का दुरुपयोग किया, बल्कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में निर्मित दुकानों की प्रीमियम राशि लिए बिना ही दुकानों का आवंटन कर दिया। दरअसल, नगर परिषद लखनादौन ने 8 शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 75 दुकानें निर्मित कराईं, जिसके बाद उनकी नीलामी के लिए निविदा की कार्यवाही की गई। सभी दुकानों की उच्चतम बोलियों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। नीलामी के दौरान ही दुकानों के आरक्षण का नियम भी लागू किया गया था। आरक्षण रोस्टर में प्रत्येक कॉम्प्लेक्स में कौन-से नंबर की दुकान आरक्षित होगी, यह निर्धारित किया गया था। नियमों के अनुसार 21 दिन के भीतर नीलामी की 25 प्रतिशत राशि जमा की जानी थी और शेष राशि निविदा की अंतिम स्वीकृति के संबंध में लिखित सूचना प्राप्त होने की तिथि से 120 दिन के अंदर जमा की जानी चाहिए थी। परिषद को संबंधित हितग्राही से एक अनुबंध तैयार किया जाना था, जिसमें नगर परिषद द्वारा दुकान का प्रति माह लिया जाने वाला किराया भी उल्लेखित होता है। 13 दुकानदारों ने 79.82 लाख रुपए नहीं किए जमा मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने दुकानदारों से मिलीभगत कर बिना अनुबंध किए एवं नीलामी की बोली की पूरी राशि जमा कराए बिना ही दुकानदारों को दुकानों का कब्जा दे दिया। सत्यापन में यह भी पाया गया कि 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों ने नीलामी की राशि लगभग 79,82,500 रुपए जमा ही नहीं की है और परिषद से अनुबंध किए बिना ही दुकानें संचालित कर रहे हैं। इन दुकानदारों से नियमानुसार किराये की राशि भी वसूल नहीं की गई है, जो लगभग 2,88,000 रुपए होती है। अगल-बगल की दुकानें दिलाकर दिया गया लाभ दुकानदार वैभव दुबे ने कॉम्प्लेक्स ए की दुकान नंबर 9 को नीलामी में उच्चतम बोली लगाकर प्राप्त किया था। उन्होंने अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित दुकान नंबर 7 प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया था।नियमों के अनुसार, यदि किसी आरक्षित दुकान की नीलामी तीन बार में भी नहीं हो पाती है, तो परिषद उस आरक्षित दुकान को अनारक्षित घोषित कर पुनः नीलामी की कार्यवाही कर सकती है। वैभव दुबे के आवेदन पर नगर परिषद लखनादौन की प्रेसिडेंट इन काउंसिल की बैठक में मात्र प्रस्ताव पारित कर, उनके आवेदन के आधार पर उन्हें दुकान क्र. 9 की नीलामी में प्राप्त राशि पर ही आरक्षित दुकान क्र. 7 आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। बिना पुनः नीलामी कराए ही दुकान आवंटित कर दी गई, जबकि दुकान नंबर 6 उनकी पत्नी के नाम से प्राप्त हुई थी। इस प्रकार श्री वैभव दुबे को अगल-बगल की दुकानें प्राप्त करने में अवैध लाभ दिया गया। शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई शिकायत के बाद जांच करते हुए सोमवार को ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका परिषद लखनादौन के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजेंद्र पांडे, गीता वाल्मीकि तथा राजस्व विभाग के राजस्व उप निरीक्षक रवि झारिया द्वारा दुकानदारों भागचंद्र अहिरवार, तेजस्व जैन, शैलेन्द्र उर्फ सोनू यादव, सीमा गोल्हानी, संगीता गोल्हानी, बुलबुल जैन, खूबचंद चौकसे, सतीश उइके, देवेंद्र राय श्रीवास्तव, सतेंद्र विश्वकर्मा, गणेश पटेल, विकास नामदेव एवं शिवप्रसाद गोल्हानी से मिलीभगत कर अपने पद का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज किया है। लोकसेवक होने के नाते उन्हें न्यस्त संपत्ति का बेईमानी से दुरुपयोग कर दुकानदारों से नीलामी की राशि वसूल किए बिना एवं अनुबंध किए बिना ही दुकानों का कब्जा दे दिया गया, जिनमें वर्तमान में दुकानें संचालित हो रही हैं। इससे शासन को लगभग 83 लाख रुपए की क्षति हुई है। 23 लोगों पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज नगर पालिका परिषद लखनादौन की प्रेसिडेंट इन काउंसिल के सदस्य मीणा बलराम गोल्हानी, देवकी शिवकुमार झारिया, संगीता संजय गोल्हानी, वर्षा श्रीकांत गोल्हानी, अनीता संदीप जैन, सविता गोलू कुमरे एवं तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी गीता वाल्मीकि द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर आरक्षित दुकान क्र. 7 का आवंटन बदलकर उसे आरक्षित से अनारक्षित कर दिया गया। बिना इस दुकान की पुनः नीलामी कराए ही उसे सामान्य वर्ग के व्यक्ति वैभव दुबे को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से आवंटित करना सिद्ध पाए जाने पर उपरोक्त 23 लोगों के विरुद्ध धारा 409, 120बी भा.द.वि. एवं धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
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