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हिमाचल के पुलिस कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा का ऑडिट: DGP ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट, ट्रेनी महिला सिपाही से छेड़छाड़ के बाद फैसला – Shimla News

हिमाचल के पुलिस कार्यालय में महिलाओं की सुरक्षा का ऑडिट:  DGP ने 15 दिन में मांगी रिपोर्ट, ट्रेनी महिला सिपाही से छेड़छाड़ के बाद फैसला – Shimla News

हिमाचल के कार्यवाहक डीजीपी अशोक तिवारी।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर डरोह में ट्रेनी महिला सिपाही से छेड़छाड़ के बाद पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राज्य के सभी पुलिस कार्यालयों और इकाइयों में POSH अधिनियम 2013 के अनुपालन का ऑडिट करने के निर्देश दिए हैं। DGP ने सभी SP और

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इसके बाद रिपोर्ट DGP कार्यालय शिमला को भेजनी होगी। DGP की ओर से मीडिया को जारी बयान में कहा गया कि यदि कहीं कमी पाई गई, तो उसे तुरंत ठीक किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन या जानकारी छिपाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह ऑडिट वर्कप्लेस पर महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और उत्पीड़न-मुक्त वातावरण बनाने के लिए कराया जा रहा है।

इसके जरिए सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कार्यालयों में आंतरिक शिकायत समितियां (ICC) सही ढंग से बनी हों और अपना काम कर रही हों। POSH एक्ट में बताए गए नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। शिकायतों के रिकॉर्ड, जांच की समय पर प्रक्रिया और कर्मचारियों की जागरूकता पर भी नजर रखी जाएगी। महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है।

उत्पीड़न के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति: DGP

DGP ने कहा कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। यह ऑडिट केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाने के लिए किया जा रहा है।

क्यों POSH के ऑडिट की नौबत आई?

दरअसल, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर डरोह में बीते सप्ताह एक महिला ट्रेनी कांस्टेबल से छेड़छाड़ का मामला सामने आया। इस मामले में डीआईजी (नॉर्दर्न रेंज) सौम्या सांबशिवन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पुलिस इंस्ट्रक्टर को सस्पेंड किया। नई रिक्रूट महिला सिपाही ने शिकायत दर्ज कराई थी कि संस्थान का ही एक इंस्ट्रक्टर उसे मोबाइल पर आपत्तिजनक मैसेज भेजकर परेशान कर रहा था।

डीआईजी सौम्या सांबशिवन ने शिकायत मिलते ही संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले की गहनता से जांच के लिए पुलिस शिकायत समिति को जांच का जिम्मा सौंपा। इतना ही नहीं, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी अधिकारी के खिलाफ सस्पेंशन और विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए। इसके बाद DGP ने पूरे प्रदेश के सभी कार्यालयों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट कराने का फैसला लिया।

POSH अधिनियम क्या है?

यह एक कानून है जो महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देता है। इसका उद्देश्य है कि महिलाएं काम के दौरान सुरक्षित, सम्मानजनक और डर-मुक्त वातावरण में काम कर सकें।

POSH अधिनियम के मुख्य बिंदु

यौन उत्पीड़न की परिभाषा – इसमें शारीरिक, मौखिक या इशारों-संदेशों के जरिए होने वाला कोई भी अनुचित व्यवहार शामिल है।

आंतरिक शिकायत समिति (ICC) – हर बड़े कार्यालय या संगठन में एक समिति बनानी होती है जो महिलाओं की शिकायतों की जांच करती है।

शिकायत की प्रक्रिया – महिला कर्मचारी अपने उत्पीड़न की शिकायत ICC के पास कर सकती हैं।

सुरक्षा और गोपनीयता – शिकायतकर्ता की पहचान और जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

कानूनी कार्रवाई – अगर कोई नियम तोड़ता है या उत्पीड़न करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

जागरूकता और प्रशिक्षण – कर्मचारियों को कानून और उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाती है।



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