देवास कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ऋतुराज सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1) (2) के तहत देवास जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा के लिए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों और विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करना है। जारी निर्देशानुसार, स्कूल संचालक-प्राचार्य को प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य पुस्तकों की सूची विद्यालय की वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम से पहले अपलोड करनी होगी। यह सूची विद्यालय के सार्वजनिक सूचना पटल पर भी चस्पा की जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्कूल के प्राचार्य-संचालक प्रवेश के समय और परीक्षा परिणाम के समय अभिभावकों को पुस्तकों की सूची की एक प्रति उपलब्ध कराएंगे। नए सत्र में प्रवेश से एक माह पूर्व भी विभिन्न माध्यमों से यह सूची उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा। पेरेंट्स पर वित्तीय भार कम होगा
स्कूल संचालक-प्राचार्य विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सूची में शामिल पुस्तकें परीक्षा परिणाम या उससे पहले खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। अभिभावक पुस्तकों की उपलब्धता के आधार पर 30 अप्रैल 2026 तक खरीदारी कर सकेंगे। स्कूल जिस नियामक बोर्ड जैसे सीबीएसई/आईसीएसई/एमपीबीएसई/माध्यमिक शिक्षा मंडल आदि से संबद्ध हैं, उन्हें उस संस्था द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम और उसके अंतर्गत नियामक संस्था या उसके द्वारा विधिक रूप से अधिकृत एजेंसी जैसे एनसीईआरटी, म.प्र. पाठ्य पुस्तक निगम आदि द्वारा प्रकाशित एवं मुद्रित पुस्तकों को ही अध्यापन के लिए न्यूनतम रखना होगा। इससे अभिभावकों पर वित्तीय भार कम होगा। प्रिंट रेट और पेज संख्या होना अनिवार्य
स्कूल संचालक-प्राचार्य यह भी सुनिश्चित करेंगे कि नैतिक शिक्षा, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर आदि जैसे अन्य विषयों के लिए निजी प्रकाशकों-मुद्रकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकें खरीदना अनिवार्य न किया जाए। नोटबुक और कॉपी पर ग्रेड, किस्म, साइज, मूल्य और पृष्ठ संख्या स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए। अभिभावकों को नोटबुक, कॉपी या उन पर चढ़ाए जाने वाले कवर पर विद्यालय का नाम मुद्रित सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। कोई भी स्कूल/संस्था किसी पुस्तक विक्रेता को पूरा किताब सेट किसी विशिष्ट सप्लायर या ठेकेदार से लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति/संस्था/आयोजक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत कार्यवाही की जा सकेगी।
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