शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के आदेश का विरोध तेज हो गया है। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, जिला विदिशा ने शुक्रवार को प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। संघ का कहना है कि इस निर्णय से प्रदेशभर के शिक्षकों में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया है। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि प्रांतीय आह्वान पर जिले के कर्मचारियों और शिक्षकों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षक वर्ग में असमंजस की स्थिति बन गई है और बड़ी संख्या में शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। नियमों के तहत हुई थीं नियुक्तियां संघ का तर्क है कि शिक्षकों की नियुक्तियां समय-समय पर शासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया पूरी कर की गई थीं। कई शिक्षक लंबे समय से सेवा दे रहे हैं। अब 25 से 57 वर्ष तक की आयु वर्ग के शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक दबाव और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक परीक्षा की अनिवार्यता में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है। इससे शिक्षकों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग
संघ ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इस आदेश पर तत्काल रोक लगाई जाए और न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर कर शिक्षक संवर्ग के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान संघ के कई पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
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