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NUSRL में राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न: सिम्बायोसिस लॉ स्कूल नोएडा बना विजेता, विधि क्षेत्र में एआई की भूमिका पर हुई चर्चा – Ranchi News

NUSRL में राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न:  सिम्बायोसिस लॉ स्कूल नोएडा बना विजेता, विधि क्षेत्र में एआई की भूमिका पर हुई चर्चा – Ranchi News

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL) में आयोजित दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक समापन हो गया। तीन दिनों तक चले 2nd Surana & Surana – NUSRL National Criminal Law Moot Court Competition में सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नोएडा क

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इसके साथ ही युवा अधिवक्ताओं के लिए आयोजित Continuous Legal Education (CLE) Programme भी संपन्न हुआ। इन दोनों कार्यक्रमों की शुरुआत 13 मार्च 2026 को हुई थी, जिसमें देशभर के विधि महाविद्यालयों के छात्र, युवा अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी की। आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल के मार्गदर्शन में किया गया।

विधि क्षेत्र में एआई की भूमिका पर चर्चा

राष्ट्रीय आपराधिक विधि मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दौरान लॉ स्कूलों में मूट कोर्ट की भूमिका और उसके भविष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रीतम सुराना ने विधि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला और भावी वकीलों को तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप खुद को तैयार करने की सलाह दी।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अंबुज नाथ (सेवानिवृत्त), पूर्व न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय, ने अपने संबोधन में सफल विधिक करियर के लिए ईमानदारी, समर्पण और निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नोएडा की टीम विजेता और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर की टीम उपविजेता बनी।

युवा अधिवक्ताओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

इसके साथ ही NUSRL में युवा अधिवक्ताओं के लिए तीन दिवसीय Continuous Legal Education (CLE) Programme भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यावसायिक नैतिकता, न्यायालयीन प्रक्रिया, कानूनी अनुसंधान, वकालत कौशल और विधि क्षेत्र में उभरती तकनीकी चुनौतियों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने सत्र लिए। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संचित्ता तिवारी, डॉ. शुभम श्रीवास्तव, डॉ. मृतुंजय मयंक और डॉ. कौशिक बागची ने पेशेवर नैतिकता, कोर्टरूम प्रोसीजर, एडवोकेसी स्किल्स और मौखिक दलीलों की कला पर विस्तार से चर्चा की।

अधिवक्ता सोनल तिवारी ने ‘एक्सेस टू जस्टिस, लीगल एड और जनहित याचिका’ विषय पर सत्र लिया, जबकि डी.सी. मंडल ने कोर्ट फाइलिंग प्रक्रिया और जिला न्यायालय की कार्यप्रणाली पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। समापन सत्र में झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने केस तैयारी, कानूनी ड्राफ्टिंग और मुवक्किल से प्रभावी संवाद पर मार्गदर्शन दिया। कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि विश्वविद्यालय विधि शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।



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