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देवरिया में उत्तर प्रदेश की राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम समेत 13 आरोपियों को देवरिया की एक अदालत ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कोविड नियमों की अनदेखी और आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रज्ञा सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपितों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। फैसले से पहले, राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम अदालत में उपस्थित हुईं और अपने विरुद्ध जारी गैर-जमानती वारंट को निरस्त करने की मांग की। लगभग चार घंटे चली सुनवाई के बाद, अदालत ने सभी आरोपितों को राहत देते हुए दोषमुक्त कर दिया। यह मामला 26 जनवरी 2022 का है। सलेमपुर थाना क्षेत्र में फ्लाइंग स्क्वायड टीम के प्रभारी और तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी व्यासदेव यादव की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में कंबल वितरण के दौरान आदर्श आचार संहिता और कोविड नियमों का उल्लंघन किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय बड़ा झटका लगा, जब मुख्य सरकारी गवाह व्यासदेव यादव अपने पूर्व बयान से मुकर गए। अदालत में गवाही के दौरान, तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी व्यासदेव यादव कई महत्वपूर्ण तथ्यों का स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके। वे यह भी नहीं बता पाए कि घटना के समय जिले के जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कौन थे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रस्तुत तस्वीरों के संबंध में भी अपना बयान बदलते हुए कहा कि कार्यक्रम में सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का पालन किया गया था। उन्होंने महामारी अधिनियम की अवधि भी स्पष्ट नहीं की और यहां तक कहा कि वे राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम को पहचानते नहीं हैं। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। इसी आधार पर सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने आदेश की प्रति जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
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