खरगोन जिला अस्पताल में 17 मार्च को सिजेरियन डिलीवरी के दौरान मोहनगांव सेल्दा निवासी 30 वर्षीय मनीषा घोरमाड़े के गर्भाशय में नेपकिन छोड़ने का मामला सामने आया है। लगातार पेट दर्द की शिकायत के बाद हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 14 दिन बाद दोबारा ऑपरेशन कर नेपकिन निकाला गया। वर्तमान में प्रसूता आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर है। इस गंभीर चूक पर कलेक्टर भव्या मित्तल ने सिविल सर्जन डॉ. राजकुमारी देवड़ा से रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। 17 मार्च को डॉ. मोहित गुप्ता ने की थी डिलीवरी जानकारी के अनुसार, 17 मार्च को जिला अस्पताल में डॉ. मोहित गुप्ता ने मनीषा की सिजेरियन डिलीवरी की थी, जिसमें उन्होंने एक बालिका को जन्म दिया था। 21 मार्च को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। प्रसूता ने लगातार पेट में दर्द की शिकायत की, लेकिन उन्हें यह बताया गया कि सिजेरियन ऑपरेशन के बाद ऐसा दर्द सामान्य होता है। हालत बिगड़ने पर ले गए इंदौर, ICU में भर्ती हैं प्रसूता जब मनीषा की हालत बिगड़ने लगी, तो परिजन उन्हें इंदौर ले जाने को मजबूर हुए। वहां एक निजी अस्पताल में 14 दिन बाद महिला की दूसरी सर्जरी की गई, जिसमें उनके गर्भाशय से नेपकिन निकाला गया। फिलहाल, प्रसूता आईसीयू में भर्ती हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सिविल सर्जन बोलीं- छुट्टी के बाद परेशानी बताने अस्पताल नहीं आईं सिविल सर्जन डॉ. राजकुमारी देवड़ा ने बताया कि 17 मार्च को मनीषा घोरमाड़े की सिजेरियन डिलीवरी डॉ. मोहित गुप्ता ने की थी और उन्हें 21 मार्च को छुट्टी दे दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छुट्टी के बाद प्रसूता अपनी परेशानी बताने अस्पताल नहीं आई थीं। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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