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अमृतसर बस हादसा, हाईकोर्ट का आरोपी को जमानत से इनकार: कहा- बस की छत पर सफर खतरनाक कृत्य, तीन युवकों की हुई थी मौत – Chandigarh News

अमृतसर बस हादसा, हाईकोर्ट का आरोपी को जमानत से इनकार:  कहा- बस की छत पर सफर खतरनाक कृत्य, तीन युवकों की हुई थी मौत – Chandigarh News

अमृतसर बस हादसे में तीन लोगों की मौत के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि बस की छत पर यात्रियों को बैठाकर सफर कराना “स्वभाविक रूप से खतरनाक कृत्य” है, जो सीधे तौर पर लोगों की जान जोखिम में डालता है। बता दें कि, यह मामला 7 अक्टूबर 2025 का है और अमृतसर के मकबूलपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अमृतपाल सिंह के अनुसार, बस में सीटें कम होने के कारण कुछ यात्रियों को छत पर बैठाया गया था। जब बस अल्फा वन मॉल के पास एक पुल के नीचे से गुजर रही थी, तो छत पर बैठे यात्री पुल से टकरा गए। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोपी 4 महीने से जेल में इस मामले में आरोपी जगीर सिंह को 19 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह तभी से न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) और धारा 125 (जीवन को खतरे में डालना) के तहत केस दर्ज है। यात्रियों को बस की छत पर बैठने दिया सुनवाई के दौरान जस्टिस मंदीप पन्नू ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि आरोपी ने खुद ही यात्रियों को बस की छत पर बैठने दिया, जो बहुत खतरनाक है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं रहेगा, बल्कि गंभीर आपराधिक जिम्मेदारी बनती है। आरोपी के वकील ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह पिछले चार महीनों से जेल में है। ट्रायल में समय लग सकता है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की लापरवाही के कारण तीन लोगों की जान गई है। ऐसे में उसे रिहा करना उचित नहीं होगा और इससे गवाहों पर भी असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट का जमानत देने से इनकार हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अभी यह तय होना बाकी है कि मामला गैर इरादतन हत्या का है या लापरवाही से मौत का, जो ट्रायल के दौरान स्पष्ट होगा। लेकिन घटना की गंभीरता और गवाहों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इस चरण पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।



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