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गुरुग्राम में आईएमटी मानेसर की होंडा कंपनी के बाद अब आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। सैकड़ों की संख्या में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी वेतन वृद्धि और बेहतर कामकाजी शर्तों की मांग को लेकर कंपनी गेट के बाहर धरने पर बैठे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। इन कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले कई साल से उनकी सैलरी में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। इस दौरान हड़ताली कर्मचारी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करके रोष जता रहे हैं। हड़ताल के चलते आईएमटी क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। लंबे समय से शोषण करने का आरोप कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स लंबे समय से शोषण का शिकार हैं। न्यूनतम मजदूरी, ओवरटाइम भुगतान, सुरक्षा और स्थायीकरण जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं। होंडा के कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो चुकी है, लेकिन उसके बाद अब सत्यम, मुंजाल शोवा, रिको और अन्य कंपनियों के कर्मचारी भी आंदोलन की राह पर हैं। इससे मानेसर के पूरे औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। वीडियो बनाने पर बिफरे कर्मचारी स्थिति पर कंट्रोल करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिसकर्मियों द्वारा वीडियो बनाने को लेकर हड़ताली कर्मचारियों द्वारा हंगामा किया जा रहा है। वीडियो बनाने पर इन कर्मचारियों ने पुलिस जवाने के साथ धक्का मुक्की की और मोबाइल छीनने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि कर्मचारियों को शांतिपूर्वक तरीके से समझाया जा रहा है। पुलिस प्रबंधन की तरफदारी न करें कर्मचारियों का कहना है कि यह उनकी हक की लड़ाई है, जिसमें प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच का मामला है। पुलिस को बीच में नहीं आना चाहिए और प्रबंधन की तरफदारी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप भी लगाया। भारी पुलिस फोर्स तैनात स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को समझाया जा रहा है, लेकिन कर्मचारी इसे दमनकारी रवैया बता रहे हैं। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उनकी सैलरी में उचित वृद्धि की जाए, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को सुरक्षा दी जाए। शांतिपूर्ण संघर्ष को न दबाया जाए एक कर्मचारी नेता ने कहा कि हम अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। प्रबंधन हमारी बात नहीं सुन रहा और पुलिस हमें दबाने की कोशिश कर रही है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। ऑटोमोबाइल और गारमेंट्स सेक्टर को नुकसान वहीं उद्यमियों का कहना है कि यदि प्रबंधन और सरकार ने तुरंत संवाद नहीं किया तो यह आंदोलन अन्य फैक्टरियों में फैल सकता है, जिसका सीधा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर की सप्लाई चेन पर पड़ेगा। हालांकि प्रशासन और संबंधित कंपनी प्रबंधनों की ओर से अब तक कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।
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