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फरीदाबाद NCR की डेथ वैली बनी अरावली की झीलें: ब्लू लेक के नाम पर मौत दिखा रहीं इंटरनेट रील्स; 16 साल में 100 से ज्यादा मौत – Faridabad News

फरीदाबाद NCR की डेथ वैली बनी अरावली की झीलें:  ब्लू लेक के नाम पर मौत दिखा रहीं इंटरनेट रील्स; 16 साल में 100 से ज्यादा मौत – Faridabad News

फरीदाबाद के अरावली में बनी कृत्रिम झीलें दिल्ली एनसीआर के युवाओं के लिए मौत का जाल बन गई हैं। सोशल मीडिया पर ‘हिडन लेक’ के नाम से मशहूर हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले 16 सालों में 100 से अधिक युवा इन गहरी और खतरनाक झीलों में डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल में ही दो युवकों की मौत के बाद फरीदाबाद पुलिस की डीसीपी एनआईटी Ms. उत्तम ने झीलों का जायजा लेकर पुलिस कर्मचारियों की डयूटी लगाई है। पुलिस के द्वारा इन झीलों तक पहुंचने के रास्तों को जेसीबी मशीन से खोदा गया है ताकि कोई भी इनके नजदीक ना पहुंच सकें। सोशल मीडिया पर मशहूर हुई झीलें दिल्ली-फरीदाबाद एनसीआर के युवाओं के बीच ‘हिडन लेक’, ‘ब्लू वाटर प्वाइंट’ और ‘वीकेंड एडवेंचर स्पाट’ के नाम से इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर मशहूर हो चुकी अरावली की कृत्रिम झीलें मौत का खामोश जाल बन चुकी हैं। फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड से लेकर सिरोही, मांगर, पाली और सूरजकुंड क्षेत्र तक फैली अरावली की कृत्रिम झीलों में सैकड़ों युवाओं की डूबकर मौत हो चुकी है। गर्मी के मौसम बढ़ती है मौतों की संख्या मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या फरीदाबाद, दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आने वाले युवाओं की रही है। गर्मी बढ़ते ही हर सप्ताह बड़ी संख्या में युवा इंटरनेट मीडिया पर वायरल फोटो और रील देखकर यहां पहुंच रहे हैं। कोई प्री-वेडिंग शूट करने आता है, कोई पार्टी करने, तो कोई नहाने। लेकिन कुछ मिनट की लापरवाही कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ देती है। वीडियो देखकर नहाने पहुंचते है युवा 7 दिन पहले दिल्ली के डेरा फतेहपुर निवासी 24 वर्षीय रमाशंकर की सिरोही झील में डूबने से मौत हो गई। दोस्तों के साथ घूमने आया रमाशंकर झील की खूबसूरती देखकर पानी में उतरा था, लेकिन कुछ ही मिनट में गहरे पानी में समा गया। इससे पहले अप्रैल में दिल्ली के ही 21 वर्षीय युवक अभिषेक की भी इसी इलाके की झील में डूबकर मौत हुई थी। पिछले कई वर्षों में ऐसे दर्जनों हादसे हो चुके हैं। खदानें बंद हुईं, पीछे छोड़ गईं मौत के कुएं ये झीले कभी अरावली की खनन साइट थीं। वर्ष 1991 में सुप्रीम कोर्ट और सरकार की सख्ती के बाद यहां खनन पर रोक लगी, लेकिन गहरी खाइयों को भरा नहीं गया। समय के साथ इनमें बारिश का पानी भरता गया और ये विशाल कृत्रिम झीलों में बदल गईं। अरावली क्षेत्र में ऐसी आठ से 10 बड़ी झीलें हैं। इनमें कई की गहराई इतनी ज्यादा है कि उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं है। स्थानीय निवसी रामबीर का कहना है कि कुछ जगह पानी के अंदर अचानक 40 से 60 फीट तक गहराई शुरू हो जाती है। ऊपर से शांत और सुंदर दिखने वाला पानी अंदर मौत छिपाए बैठा है। सोशल मीडिया बना मौत का निमंत्रण अरावली की झीलों के ड्रोन वीडियो, बाइक राइड रील और रोमांटिक फोटो इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर हजारों की संख्या में मौजूद हैं। ‘दिल्ली के पास सीक्रेट लेक’, ‘नोएडा से दो घंटे दूर ब्लू लेक’ और ‘हिडन पैराडाइज’ जैसे कैप्शन युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। दिल्ली और गुरुग्राम से सबसे ज्यादा भीड़ आती स्थानीय लोगों के अनुसार वीकेंड पर यहां सबसे ज्यादा भीड़ दिल्ली और गुरुग्राम से पहुंचती है। कई युवक शराब पार्टी करते हैं, फिर पानी में उतर जाते हैं। कुछ लोग सेल्फी लेते समय फिसल जाते हैं, जबकि कई गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते। पुलिस ने झीलों को लेकर बढ़ाई सुरक्षा पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए झील की तरफ जाने वाले आने-जाने के कई रास्तों को जेसीबी से खोदकर बंद कर दिया गया है, ताकि लोग आगे झील की तरफ न जा सकें। इसके साथ ही आसपास के पहाड़ों और स्थानों पर चेतावनी संदेश भी लिख दिए गए हैं, जिससे लोगों को झील में जाने से रोका जा सके। इसके अलावा झील के आसपास कई स्थानों पर चेतावनी संकेत और सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिनमें साफ तौर पर लिखा गया है कि झील में प्रवेश करना खतरनाक और जानलेवा हो सकता है। डीसीपी ने पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई उन्होंने बताया कि डीसीपी एनआईटी Ms. उत्तम ने झीलों का जायजा लेकर पुलिस कर्मचारियों की डयूटी लगाई है। डीसीपी ने गांव के लोगों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि गांव में बाहर से आने वाले लोगों को जागरूक करें और अनावश्यक रूप से किसी को भी झील के पास जाने से रोकें। फरीदाबाद पुलिस ने आमजन से अपील की है कि प्राकृतिक झीलों में नहाने से बचें, क्योंकि इन झीलों में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस का कहना है कि लोगों की सुरक्षा के लिए ऐसे संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और सख्ती आगे भी जारी रहेगी।



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