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मोहाली में सुखमनी स्कूल के बाहर 30 दिन से धरना: निकाले गए कर्मचारियों को बहाल करने की मांग को किसान मोर्चा ने निकाली रैली – Mohali News

मोहाली में सुखमनी स्कूल के बाहर 30 दिन से धरना:  निकाले गए कर्मचारियों को बहाल करने की मांग को किसान मोर्चा ने निकाली रैली – Mohali News

मोहाली के डेराबस्सी स्थित श्री सुखमनी इंटरनेशनल स्कूल के बाहर नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), ट्रेड यूनियनों और विभिन्न संगठनों ने गुरुवार को एक विशाल रोष रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। यह धरना 12 मार्च से लगातार जारी है और अब 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है। रैली को संबोधित करते हुए पंजाब एटक के प्रधान कामरेड बंत सिंह बराड़ ने स्थानीय विधायक कुलजीत सिंह रंधावा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपनी ही सरकार होने के बावजूद विधायक अपने क्षेत्र के मजदूरों को न्याय दिलाने में विफल रहे हैं। बराड़ ने विधायक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र के मजदूरों के हितों की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन वे ऐसा करने में नाकाम रहे हैं। पंजाब एटक के उपप्रधान विनोद चुघ ने आरोप लगाया कि पक्के कर्मचारियों को हटाकर ठेके पर नई भर्ती करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि मजदूरों के साथ धोखा भी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रैली को कमजोर करने के लिए जानबूझकर स्कूल में छुट्टी कर दी गई और अभिभावकों को ‘मरम्मत कार्य’ का हवाला देकर गुमराह किया गया। पंजाब सरकार से हस्तक्षेप की मांग प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि कर्मचारियों को बहाल करने तक संघर्ष जारी रहेगा। पंजाब सरकार से मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान कराने की मांग की। नेताओं ने घोषणा की कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 21 अप्रैल को डेराबस्सी बस स्टैंड पर एक बड़ा जमावड़ा होगा। इसके बाद विधायक कुलजीत सिंह रंधावा के गांव और निवास तक पैदल रोष मार्च निकाला जाएगा और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। पक्का मोर्चा ​फिलहाल स्थगित फिलहाल, फसल सीजन को देखते हुए पक्का मोर्चा कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है। स्कूल गेट पर रोजाना सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक धरना जारी रहेगा। इस मौके पर विभिन्न किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सामाजिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे, जो निकाले गए कर्मचारियों के प्रति अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे थे।



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