इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ बार एसोसिएशन के आगामी चुनावों को दोबारा निर्धारित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह आदेश चुनाव में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू न किए जाने के कारण दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन बताया गया है। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अधिवक्ता सोनी शर्मा द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश सभी बार एसोसिएशनों पर बाध्यकारी हैं। ऐसे में 30 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किए बिना चुनाव कराना स्वीकार्य नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान, बार एसोसिएशन की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश के तहत चुनाव कराए जा रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी हुई है। हाईकोर्ट ने लखनऊ बार एसोसिएशन को 24 घंटे के भीतर नया चुनाव कार्यक्रम जारी करने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह भी कहा गया कि पुनर्निर्धारित चुनाव एक सप्ताह के भीतर शुरू किए जाएं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के सभी बार एसोसिएशनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा।
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