चाईबासा के सारंडा के चड़राडेरा इलाके में बुधवार से शुरू हुई सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ करीब 40 घंटे बाद थम गई है। शुक्रवार को तीसरे दिन गोलीबारी नहीं हुई, लेकिन इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है। इस लंबी कार्रवाई ने कई बड़े और नामी नक्सलियों को दबाव में ला दिया है। आलम यह है कि कभी ग्रामीणों को डरा-धमका कर अपनी स्थिति नक्सलियों ने मजबूत की थी, वहीं आज वे उन्हीं ग्रामीणों से मदद मांग रहे हैं। ग्रामीणों से चावल और दूसरी जरूरत की चीजें वे मांग रहे हैं। इधर, मुठभेड़ के पहले दिन बुधवार को सुबह करीब 8 से 8:30 बजे के बीच सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों की नक्सलियों से आमने-सामने मुठभेड़ शुरू हो गई। शुरुआती फायरिंग के साथ ही आईईडी ब्लास्ट भी हुए, जिसमें कोबरा बटालियन के दो अधिकारियों सहित कुल पांच जवान घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल चार जवानों को तुरंत एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया। पूरे दिन रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। सुरक्षा बल इलाके में दबाव बनाए रखने के लिए ऑपरेशन जारी रखे रहे। दूसरे दिन घेराबंदी तेज, एक और जवान घायल गुरुवार को सुबह होते ही सुरक्षा बलों ने फिर से सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया। इस दौरान एक और जवान आईईडी की चपेट में आकर घायल हो गया, जिसे एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया। दिनभर सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी और मजबूत कर दी। जंगल के भीतर लगातार मूवमेंट और तलाशी अभियान चलता रहा, जिससे नक्सलियों की गतिविधियां सीमित होती गईं। सुरक्षा बलों की रणनीति साफ थी कि नक्सलियों को बाहर निकलने का मौका न दिया जाए। तीसरे दिन फायरिंग थमी, सर्च ऑपरेशन जारी शुक्रवार को एसपी अमित रेणु ने पुष्टि की कि गुरुवार देर रात करीब 12 बजे के बाद से फायरिंग बंद हो गई है। तीसरे दिन इलाके में कोई गोलीबारी नहीं हुई, लेकिन सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी को और सख्त कर दिया है। जवान जंगल में ‘लेइंग अप पोजिशन’ में रहकर लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। इस मुठभेड़ और सर्च से करीब 50 से अधिक नक्सलियों पर इस कार्रवाई से दबाव बढ़ गया है। टॉप नक्सली नेतृत्व घिरा, सरेंडर या मुठभेड़ ही विकल्प पुलिस सूत्रों के मुताबिक सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने भाकपा माओवादी के शीर्ष नेतृत्व को निर्णायक घेराबंदी में ले लिया है। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी और रीजनल कमेटी के लगभग 20 बड़े नक्सली कमांडर फंसे हुए हैं, जिनमें छह महिला नक्सली भी शामिल हैं। एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा और असीम मंडल भी इसी घेरे में बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अभियान अब अंतिम चरण में है। नक्सलियों के पास सरेंडर के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। मिसिर बेसरा का दस्ता चाईबासा, सरायकेला और खूंटी में लंबे समय से सक्रिय था, लेकिन लगातार दबाव के कारण अब इन्हें सारंडा के सीमित इलाके में समेट दिया गया है। ऑपरेशन में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही है। कोबरा की पहले से तैनात दो कंपनियों के साथ छत्तीसगढ़ से लौटी तीन अतिरिक्त कंपनियों को भी लगाया गया है, जिससे घेराबंदी और सख्त हो गई है। माइंस बिछाकर रोकने की कोशिश पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सारंडा में अब 55 से 60 नक्सली ही बचे हैं, जिनमें 20 लीडर शामिल हैं। खुद को घिरता देख नक्सलियों ने जंगल में जगह-जगह लैंड माइंस बिछा दी हैं, ताकि सुरक्षा बलों की बढ़त रोकी जा सके। हालांकि, बम निरोधक दस्ते और प्रशिक्षित जवानों की तैनाती के कारण अभियान सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों का प्रभाव अब लगभग समाप्ति की ओर है।
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