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छिंदवाड़ा के तामिया के अतरिया ग्राम टिपाखेड़ा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को तीन महीने पहले आवारा कुत्ते ने काट लिया था लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने के कारण अब उसकी हालत गंभीर हो गई है। बताया जा रहा है कि महिला का व्यवहार कुत्ते जैसा हो गया और वह लोगों को काटने के लिए दौड़ने लगी। महिला के दामाद ने बताया कि टीपाखेड़ा निवासी पूरन उइके ने बताया कि उनकी सास जगवती (50) को जनवरी 2026 में कुत्ते ने काटा था। उस समय परिवार ने अस्पताल में इलाज कराने के बजाय गांव में झाड़-फूंक करवा ली। शुरुआती दिनों में महिला सामान्य रही, लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। महिला में अजीब लक्षण दिखने लगे वह पानी देखकर डरने लगी और उससे दूर भागती थी। इसके साथ ही उसका व्यवहार कुत्तों जैसा हो गया। स्थिति तब गंभीर हो गई जब वह आसपास के लोगों को काटने के लिए दौड़ने लगी। घबराए परिजन उसे तुरंत तामिया के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर दिनेश पलास ने बताया कि महिला का इलाज जारी है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर की अपील डॉक्टर दिनेश पलास ने बताया कि कुत्ते के काटने के मामलों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन और उचित इलाज बेहद जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
कुत्ते के काटने के बाद तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में जाकर टीकाकरण कराना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।
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छिंदवाड़ा में लोगों को काटने दौड़ी महिला, पानी देख भागी: 3 महीने पहले कुत्ते के काटने पर झाड़-फूंक कराया; अब बिगड़ी हालत – Chhindwara News
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छिंदवाड़ा के तामिया के अतरिया ग्राम टिपाखेड़ा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को तीन महीने पहले आवारा कुत्ते ने काट लिया था लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने के कारण अब उसकी हालत गंभीर हो गई है। बताया जा रहा है कि महिला का व्यवहार कुत्ते जैसा हो गया और वह लोगों को काटने के लिए दौड़ने लगी। महिला के दामाद ने बताया कि टीपाखेड़ा निवासी पूरन उइके ने बताया कि उनकी सास जगवती (50) को जनवरी 2026 में कुत्ते ने काटा था। उस समय परिवार ने अस्पताल में इलाज कराने के बजाय गांव में झाड़-फूंक करवा ली। शुरुआती दिनों में महिला सामान्य रही, लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। महिला में अजीब लक्षण दिखने लगे वह पानी देखकर डरने लगी और उससे दूर भागती थी। इसके साथ ही उसका व्यवहार कुत्तों जैसा हो गया। स्थिति तब गंभीर हो गई जब वह आसपास के लोगों को काटने के लिए दौड़ने लगी। घबराए परिजन उसे तुरंत तामिया के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर दिनेश पलास ने बताया कि महिला का इलाज जारी है और उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर की अपील डॉक्टर दिनेश पलास ने बताया कि कुत्ते के काटने के मामलों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन और उचित इलाज बेहद जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
कुत्ते के काटने के बाद तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में जाकर टीकाकरण कराना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।
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