![]()
भोपाल में बढ़ती गर्मी के साथ बच्चों में उल्टी-दस्त (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। पिछले एक हफ्ते से अस्पतालों में इस तरह के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है। हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मरीज उल्टी-दस्त और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। हमीदिया के बाल एवं शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश टिक्कस बताते हैं कि मौजूदा मौसम में तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण बच्चों में लू के हल्के लक्षणों के साथ उल्टी, दस्त और बुखार का कॉम्बिनेशन देखने को मिल रहा है। पिछले 5 से 7 दिनों में ऐसे मामलों में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बता दें कि हमीदिया अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 250 से अधिक बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें से करीब 50 से अधिक बच्चे उल्टी-दस्त (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) से पीड़ित हैं। पिछले एक हफ्ते से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दवा से ज्यादा जरूरी है पानी की कमी पूरी करना डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश अभिभावक उल्टी-दस्त को तुरंत बंद कराने के लिए दवाओं पर जोर देते हैं, जबकि सबसे अहम जरूरत शरीर में पानी और लवण की कमी को पूरा करना है।
डॉ. टिक्कस के अनुसार “उल्टी-दस्त के दौरान शरीर से फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से निकलते हैं। इसे पूरा करना ही प्राथमिक उपचार है, जिसमें ओआरएस सबसे प्रभावी उपाय है।” ओआरएस ही सबसे कारगर उपाय उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को WHO मानक वाला ओआरएस घोल सही तरीके से तैयार कर थोड़ा-थोड़ा पिलाना चाहिए। इसके अलावा स्तनपान कराने वाली माताएं बच्चों को दूध देना जारी रखें। साथ ही नारियल पानी, चावल का माड़, पतली खिचड़ी, दलिया और शिकंजी जैसे तरल पदार्थ भी फायदेमंद हैं। बचाव ही बेहतर उपाय विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को तेज धूप में अनावश्यक बाहर न ले जाएं, बाहर ले जाते समय हल्के सूती कपड़े पहनाएं, बाहर निकलने से पहले हल्का भोजन या तरल जरूर दें। डॉ. टिक्कस के अनुसार उल्टी-दस्त पूरी तरह ठीक होने में 48 से 72 घंटे तक का समय लग सकता है। इसलिए घबराने के बजाय इस दौरान बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाना सबसे जरूरी है।
Source link
