नमस्कार उदयपुर में बुजुर्ग जादूगर ने सांसद महोदय को रेत से 500-500 के नोट निकालने का जादू दिखाया। जयपुर में संगठन के मुखियाजी ‘नारी शक्ति’ को नाराजगी वाला ‘वंदन’ करके चले गए। दौसा में विधायक जी ने अग्रवाल साहब को लेकर बहुत ही तीखी भाषा का प्रयोग कर दिया और दुल्हन को जल्दी विदा कराने के लिए दूल्हे राजा ने सुरीली तान छेड़ दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. MP के सामने मिट्टी से निकाले ‘नोट’ वैसे तो राजनीति में मिट्टी से नोट निकालने की कला आम है। कई राजनीतिज्ञ इस हुनर में माहिर हैं। लेकिन उदयपुर में एक जादूगर ने सचमुच ही सांसद महोदय के सामने इस कला का प्रदर्शन कर दिया। हुआ यूं कि सरकारी योजनाओं के फायदे गिनाने के लिए उदयपुर में सूचना केंद्र से ग्राम रथों को रवाना किया जा रहा था। रथों को हरी झंडी दिखाने सांसद मन्नालाल रावत पहुंचे थे। इस दौरान एक बुजुर्ग जादूगर भी वहां मौजूद थे। कार्यक्रम से फ्री होने के बाद बुजुर्ग ने सांसद महोदय के सामने जादू दिखाने की पेशकश की। मजमा लग गया। मीडिया के लोग मौजूद थे ही। कार्यकर्ताओं का रेला भी था। बुजुर्ग जादूगर ने झुककर मिट्टी उठाई। मिट्टी को मुट्ठी में लेकर सांसद जी से फूंक मारने को कहा। इसके बाद मिट्टी को मलने लगे। धीरे-धीरे 500-500 के चार नोट निकल आए। सभी ने हैरानगी जताई। बुजुर्ग ने बात को सरकारी कार्यक्रम से जोड़ने के लिए कहा- हर महीने सरकार किसानों को यह राशि देती है। सांसद महोदय की रुचि दूसरे पक्ष की ओर थी। बोले- ये कहिये कि अब पैसा निकालना सिखाएंगे। इस बात पर सामूहिक ठहाका गूंजा। 2. नारी शक्ति को वंदन करके चले गए मुखियाजी कार्यक्रम ‘नारी शक्ति’ का था तो महिला कार्यकर्ता आग से खेलकर शक्ति का प्रदर्शन कर रहीं थीं। मुखियाजी को चिंता हुई। कार्यकर्ता साड़ी पहने हैं। गर्मी का वक्त है। मशाल लेकर झुंड बनाकर पास-पास खड़ी हैं। कोई घटना हो सकती है। वे समझाने लगे कि दूर-दूर हो जाओ। लेकिन महिलाओं ने नहीं सुनीं। कहने के बावजूद ‘जिद’ की मशाल जलती रही और महिलाएं टस से मस न हुईं। बस इसी बात पर मुखियाजी झल्ला गए। मुंह फुलाकर गाड़ी की तरफ तेज गति से चल दिए। ट्रैफिक को भी इशारा करके खुद ही मैनेज किया। सीनियर कार्यकर्ताओं ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। लेकिन नाराजगी दूर नहीं हुई। नारी शक्ति को ‘वंदन’ करके वे कार में बैठे और ड्राइवर से कहा- चलो-चलो। 3. विधायक डीसी बैरवा की तीखी प्रतिक्रिया डीसी बैरवा जी का आक्रोश अभी तक नहीं थमा है। पिछले दिनों वे चर्चा में रहे थे। वे अतिक्रमण की एक कार्रवाई रुकवाने गए थे। वहां तहसीलदार ने हड़का दिया था। ऊंची-नीची भाषा में बात की थी। विधायकजी को यह बात गहराई से चुभी। उन्होंने तहसीलदार की शिकायत कई जगह की। विधानसभा तक में मुद्दा उठा दिया। उस घटना के बाद वे आक्रोश का निहीतार्थ समझ गए हैं। आक्रोश की वैल्यू है। हाल ही टोंक में प्रदेश प्रभारी जी ने कांग्रेस के सीनियर नेता सचिन पायलट पर टिप्पणी कर दी। उन्हें भी शायद आभास नहीं था कि मामला तूल पकड़ जाएगा। पायलट को बहरूपिया तक कह गए। सब जगह कांग्रेस विरोध प्रदर्शन करने लगी। दौसा में भी पुतला फूंका गया। इस दौरान विधायक जी ने तीखा रिएक्शन दिया। बोले- युवा गुस्से में है। साहब कहीं दिखे तो युवा ‘चपेड़’ मारेंगे। जूतों की माला भी पहना देंगे। विरोध करना जायज है, लेकिन हमले के लिए उकसाना तो ठीक नहीं। 4. चलते-चलते.. राजस्थान की परंपरा, रस्म-रिवाज का अपना ही आनंद है। हर बात सुरीली है। हर बात में मिठास है। शादी-ब्याह के मौके पर तो मीणावाटी के गीतों की मस्ती और बढ़ जाती है। चित्तौड़गढ़ के सिंगर नरेश भाभड्या की शादी हुई। दूल्हे ने खूब सुर साधे। सालियों की फरमाइश पर जूतियों के बदले गीत गाते हुए नेग दिया। गीतों के बोल पर सालियां शरमा कर लाल हो गईं। इसके बाद दुल्हन को विदा करने का अवसर आया। विदाई की वेला में यूं तो आंसुओं की नदियां बहती हैं। लेकिन दूल्हे राजा ने गीत गाया। जिसका अर्थ है- जल्दी दुल्हन को विदा कर दो, काका-बाबा लेट हो रहे हैं। जिस अंदाज में नरेश ने इस बात को सुर में पिरोया, उसे सुनकर वहां मौजूद महिलाएं जोरदार डांस करने लगीं और कोरस में गाने लगीं। इनपुट सहयोग- राघवेंद्र सिंह गुर्जर(दौसा), मुकेश हिंगड़ (उदयपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी
Source link
