भोपाल से जुड़े अवैध वन्यजीव शिकार और मांस तस्करी के बड़े नेटवर्क का वन विभाग ने खुलासा किया है। कार्रवाई गुना जिले के बीनागंज क्षेत्र में की गई, जहां से शिकारियों को पकड़कर इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया कि गिरोह हिरण, नीलगाय और सांभर जैसे वन्यजीवों का शिकार कर उनका मांस भोपाल लाता था। यहां रिंग रोड के आसपास ठिकानों पर इसे जमा कर देश के कई शहरों जैसे मुंबई, पुणे और दक्षिण भारत के साथ दुबई तक सप्लाई किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का मुख्य ट्रांजिट और वितरण केंद्र भोपाल बना हुआ था। भोपाल के कई होटल संचालक भी सीधे संपर्क में आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह हर हफ्ते कम से कम तीन शिकार करता था। रायसेन, गुना, नर्मदापुरम, नजीराबाद और सिरोंज के जंगलों में नियमित रूप से शिकार किया जाता था। सालभर में 200 से ज्यादा वन्यजीवों के शिकार और पिछले पांच वर्षों में यह संख्या 1000 के पार पहुंचने का अनुमान है। जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ कि वन विभाग का रिटायर्ड रेंजर नियामत हासमी भी इस गिरोह में शामिल था। वह शिकार के लिए लोकेशन और तरीके बताने के साथ मांस के लेन-देन में मदद करता था। बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए उसकी संलिप्तता के प्रमाण भी मिले हैं। गिरोह केवल भरोसेमंद ग्राहकों को ही मांस बेचता था। जांच में यह भी सामने आया कि भोपाल के कुछ होटल संचालकों से इनके सीधे संपर्क थे। कार्रवाई के दौरान एमपी-09 सीके 8530 नंबर की कार से वन्यजीवों का मांस और हथियार बरामद किए गए। जब्त सामान में दूरबीन लगी सिंगल नाल बंदूक, तीन छुरियां, एक बका, एक शार्पनर और सात जिंदा कारतूस शामिल हैं। फिलहाल वन विभाग पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटा है।
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