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आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल: 10 मई को कार्यक्रम में PM मोदी शामिल होंगे, 182 देशों से लोग आएंगे

आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल:  10 मई को कार्यक्रम में PM मोदी शामिल होंगे, 182 देशों से लोग आएंगे


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बेंगलुरु2 घंटे पहले

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आर्ट ऑफ लिविंग के 182 देशों में स्थापित 10000 से ज्यादा केंद्र हैं, जिन्होंने 100 करोड़ लोगों का जीवन प्रभावित किया।

‘आर्ट ऑफ लिविंग’ 10 मई को स्थापना के 45 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इसके संस्थापक गुरुदेव श्रीश्री रवि शंकर 13 मई को 70वां जन्मदिवस मनाएंगे। इन दो आयोजनों के ऐतिहासिक संयोग पर बेंगलुरु में महाआयोजन होने जा रहा है। वैश्विक समागम में 182 से अधिक देशों के प्रतिभागी प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से सम्मिलित होंगे। 10 मई से शुरू हो रहे आयोजन 26 मई तक चलेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके साक्षी बनेंगे। वे 10 मई को आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और शुभकामनाएं देंगे।

पीएम मेडिटेशन हॉल ‘ध्यान मंदिर’ का उद्घाटन करेंगे। साथ ही मेंटल हेल्थ, रूरल डेवलपमेंट, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन से जुड़ी राष्ट्रव्यापी सेवा पहलों का भी शुभारंभ करेंगे।

आयोजनों की शृंखला: 7 बिम्सटेक देशों के युवा नेता लीडरशिप का अनुभव लेंगे

  • 13 मई को श्रीश्री रवि शंकर के जन्मदिन पर ‘विश्व शांति के लिए वैश्विक ध्यान’ होगा। विश्वभर में लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।
  • 182 देशों की संस्कृतियों को पेश करते हुए संगीत, नृत्य और कलात्मक अभिव्यक्तियों से वाला सांस्कृतिक महोत्सव होगा।
  • भारत के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे अनसुने नायक विशेष समारोह में सम्मानित होंगे।
  • 25-26 मई को ‘कैदी कल्याण और नीतिगत सुधार’ पर विशेष गोलमेज चर्चा होगी।
  • उद्देश्य जेलों में सुधार की सर्वोत्तम पद्धतियों को बताना और कैदियों के पुनर्वास में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के सकारात्मक प्रभाव को प्रदर्शित करना होगा।
  • विदेश मंत्रालय के सहयोग से ‘बिम्सटेक यूथ लीडरशिप एक्सचेंज’ कार्यक्रम होगा। सभी 7 बिम्सटेक देशों के युवा नेता ‘आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर’ में नेतृत्व प्रशिक्षण के लिए जुटेंगे।

क्या है आर्ट ऑफ लिविंग…

श्रीश्री रवि शंकर ने 1981 में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की स्थापना की थी। अब यह वैश्विक, स्वयंसेवक-आधारित मानवीय और शैक्षिक संगठन है। संस्था ‘सुदर्शन क्रिया’ जैसी बदलाव लाने वाली श्वास तकनीकों और सतत विकास के क्षेत्र में अग्रणी पहलों के जरिये 1 अरब जीवन को स्पर्श कर चुकी है।



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