भास्कर एनालिसिस बिहार में 11 फरवरी से जमीन के कामों पर लगा ‘ग्रहण’ अब छंट गया है। राज्य के 3500 राजस्व कर्मचारियों की तीन महीने लंबी हड़ताल शुक्रवार को खत्म हो गई। इसके साथ ही सभी 537 अंचल कार्यालयों (सीओ ऑफिस) में फिर से कामकाज शुरू हो गया है। सीओ और आरओ 4 दिन पहले ही काम पर लौट चुके थे। इस लंबी हड़ताल के कारण आम आदमी को भारी परेशानी उठानी पड़ी है। अंचलों में काम ठप होने से 51 लाख से ज्यादा जमीन के मामले अटक गए हैं। इनमें 43.70 लाख मामले सिर्फ परिमार्जन के हैं। इसके अलावा म्यूटेशन के 7 लाख और जमीन मापी के 39 हजार आवेदन लंबित हैं। हड़ताल के दौरान हालात इतने खराब थे कि रोज 10,000 परिमार्जन, 5,500 म्यूटेशन और 1,050 मापी के नए आवेदन पेंडिंग हो रहे थे। पहले से ही 40 लाख परिमार्जन और 5 लाख म्यूटेशन के मामले अटके हुए हैं। शुक्रवार को नवनियुक्त मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने विभाग का कार्यभार संभाला। उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही बड़ा ऐलान किया। मंत्री ने कहा- “अगले 3 महीनों तक विशेष अभियान चलेगा। इस दौरान सभी लंबित कार्यों को निपटाया जाएगा”। अब अंचलों में म्यूटेशन, जमाबंदी और मापी का काम युद्धस्तर पर होगा। समय पर काम पूरा हो, इसके लिए जिला स्तर पर कड़ी मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। मंत्रीने माना कि 3 माह के इस प्रशासनिक गतिरोध से विभाग के काम और छवि दोनों को भारी नुकसान हुआ है। ‘सुशासन’ के लिए जमीन विवाद सुलझाना चुनौती कैबिनेट विस्तार के बाद डॉ. दिलीप जायसवाल को राजस्व विभाग सौंपना सरकार की प्राथमिकता और खास रणनीति है। बिहार में सबसे ज्यादा हिंसा और मुकदमों की असली जड़ जमीन विवाद ही रहे हैं। हड़ताल खत्म होते ही ‘विशेष अभियान’ का ऐलान चुनावी साल से पहले सरकार का एक बड़ा कदम है। इसका सीधा मकसद जनता की नाराजगी को दूर करना है। नए मंत्री का सख्त रुख और तीन महीने की डेडलाइन तय करना, प्रशासनिक सुस्ती को खत्म करने की बड़ी कवायद है। यह बदलाव न केवल 51 लाख लंबित फाइलों को क्लियर करेगा, बल्कि ‘न्याय के साथ विकास’ के नारे को जमीनी हकीकत में बदलने की चुनौती भी पेश करेगा।
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