पंजाबी युवक की रूसी सेना में भर्ती होने के बाद मौत हो गई। करीब 9 महीने बाद उनका शव घर पहुंचा। आज अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों के अनुसार, फरवरी 2025 में वर्क परमिट पर जर्मनी गए थे। इस दौरान परिवार ने कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था। हालांकि परिवार को यह जानकारी नहीं है कि वह जर्मनी से कैसे और किन परिस्थितियों में किसी एजेंट के माध्यम से रूसी सेना में भर्ती हो गए। परिवार की आखिरी बार सितंबर 2025 में वीडियो कॉल पर बात हुई थी। इसके बाद रूस से करीब तीन महीने पहले परिवार को कॉल आया और DNA सैंपल भेजने के लिए कहा गया। परिवार का कहना है कि उस समय उन्हें मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में जिला प्रशासन ने सूचना दी कि बेटे का शव दिल्ली पहुंच चुका है। DNA टेस्ट की फीस चुकाने के लिए परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा। 2025 की शुरूआत में वर्क परमिट पर जर्मन गया था मृतक की पहचान गुरसेवक सिंह के नाम से हुई, जो श्री हरगोबिंदपुर के गांव बोहजा का रहने वाला था। गुरबाज सिंह ने बताया कि उसका भाई गुरसेवक 2025 की शुरूआत में वर्क परमिट पर जर्मन गया था। लेकिन पता नहीं कैसे वह वहां से किसी एजेंट के माध्यम से रूस की फौज में भर्ती हो गया। गुरसेवक सिंह के साथ आखरी बार सितंबर में वीडियो कॉल पर बात हुई थी। गुरसेवक सिंह को रूसी फौज में यह कह कर भर्ती किया गया था कि उसे फौजी कैंप में तैनात किया जाएगा। लेकिन उसे पता नहीं था कि लड़ाई की आग में गुरसेवक को झोंक दिया जाएगा। लेकिन सितंबर 2025 के बाद से गुरसेवक से कोई संपर्क नहीं हो पाया। पंजाब और केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे परिवार की तरफ से गुरसेवक सिंह को ढूंढने के लिए पंजाब और केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया और न ही गुरसेवक का पता चला। करीब पच्चीस दिन पहले परिवार को भारत सरकार की तरफ से जानकारी मिली कि उनके बेटे की मौत रूसी सेना में हुई है और उसकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भेजना होगा। शुक्रवार को गुरसेवक का शव दिल्ली पहुंचा गुरबाज सिंह ने बताया की शुक्रवार को प्रशासन की तरफ से पता चला कि गुरसेवक सिंह का शव दिल्ली पहुंच चुका है। जिसके बाद परिवार उसके पार्थिव शरीर को गांव बोजा लाया गया। रूसी सेना की तरफ से गुरसेवक की अंतिम विदाई सैन्य सम्मान के साथ की गई थी। रूसी सरकार द्वारा डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया है। आर्थिक सहायता की मांग वहीं गांव वासियों और परिजनों ने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा है कि गुरसेवक सिंह के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का गुजारा चल सके। घर बेच कर भेजा डीएनए परिवार ने कहा कि गुरसेवक सिंह की मौत रूसी जंग के दौरान कैसे हुई अभी तक परिवार को जानकारी नहीं है। रशियन फौज की तरफ से मृतक के परिजनों से डीएनए टेस्ट मांगा था, तो परिवार के पास टेस्ट के लिए रुपए चाहिए थे। अपने बेटे की मृतक देह मंगवाने के लिए परिवार ने अपना घर बेच कर डीएनए टेस्ट करवा कर भेजना पड़ा। जिसके बाद जिस दौरान परिवार का डीएनए टेस्ट कर पहचान हो पाई थी। जिस कारण गुरसेवक का शव देरी से पहुंचा।
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