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पंजाब- एनकाउंटर में ढेर साइको किलर की कहानी: 2011 में आर्मी से रिटायर, सिक्योरिटी गार्ड लगा, मां के निधन के बाद डिप्रेशन में गया – tarn-taran News

पंजाब- एनकाउंटर में ढेर साइको किलर की कहानी:  2011 में आर्मी से रिटायर, सिक्योरिटी गार्ड लगा, मां के निधन के बाद डिप्रेशन में गया – tarn-taran News

26 घंटे में 3 हत्यााएं करने वाला पंजाब के तरनतारन का साइको किलर गुरप्रीत सिंह उत्तर प्रदेश (UP) में मारा गया। UP पुलिस के मुताबिक, टीम आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट कराने के लिए लेकर गई थी। इसी दौरान उसने पुलिस अफसर की पिस्टल छीन ली और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसे सिर और सीने में गोली लग गई। गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी (45) मूल रूप से तरनतारन जिले के गांव तख्तू चक का रहने वाला था। वह भारतीय सेना से साल 2011 में रिटायर हुआ था। इसके बाद उसने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। गुरप्रीत कौन है, इसे लेकर दैनिक भास्कर की टीम उसके गांव पहुंची। परिवार का कहना है कि गुरप्रीत पिछले कुछ समय से डिप्रेशन का शिकार था। मां की मौत के बाद वह काफी बदल गया था। पहले की तुलना में वह ज्यादा चुप रहने लगा था और अक्सर अकेले बैठकर सोच में डूबा रहता था। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि गुरप्रीत का स्वभाव अच्छा था। वह शांत रहता था। वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उधर, गांव के सरपंच और परिवार के सदस्य बॉडी लेने के लिए UP रवाना हो गए हैं। गुरप्रीत के पिता की अहम बातें… नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीण क्या बोले… 2 बच्चों का पिता था, पिता से अलग रहता था गुरप्रीत सिंह के परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी है। बेटे की उम्र करीब 14 साल और बेटी की उम्र लगभग 16 साल बताई जा रही है। गुरप्रीत के पिता भी गांव में ही रहते हैं। गुरप्रीत ने अपना अलग मकान बनाया हुआ है, जहां वह पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। वहीं, उसके घर से दो मकान छोड़कर उसकी जॉइंट फैमिली रहती है, जिसमें पिता, ताया-ताई और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं। 29 अप्रैल को घर से निकला था परिवार के अनुसार गुरप्रीत सिंह 29 अप्रैल को घर से ड्यूटी के लिए निकला था। फौज की नौकरी के बाद वह अलग-अलग राज्यों में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता था। गुरप्रीत के दो भाई भी हैं, जो अलग-अलग राज्यों में ट्रक ड्राइवरी का काम करते हैं। UP पुलिस ने कैसे किया ढेर गार्ड की नौकरी करने के लिए बिहार आया था पीडीडीयू नगर के सीओ अरुण कुमार सिंह ने बताया- गार्ड की नौकरी करने के लिए गुरप्रीत बिहार के आरा शहर गया था। वहां कुछ दिनों तक काम करने के दौरान उसकी शराब पीकर हंगामा करने की आदत सामने आई। उसे नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद वह दिमागीतौर पर परेशान रहने लगा। वह 9 मई से अलग-अलग ट्रेनों से प्रयागराज, चंदौली समेत कई स्थानों पर घूमता रहा। कैसे पुलिस साइको किलर तक पहुंची, 4 पॉइंट में जानिए अब सिलसिलेवार तीनों वारदातें जानिए… 1- अस्पताल में घुसकर महिला को गोली मारी जगह- चंदौली का जीवक अस्पताल, समय- सोमवार सुबह साढ़े 8 बजे…। चंदौली जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर अलीनगर थाना क्षेत्र में जीवक अस्पताल है। बिहार के भभुआ जिले के चैनपुर थाना के बहोवना गांव की रहने वाली लक्ष्मीना देवी (55) का पैर टूट गया था। उन्हें पिछले माह 5 अप्रैल को जीवक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक रिश्तेदार भी उसके साथ था। हमलावर वीरेंद्र सोमवार सुबह मुंह बांधकर इलाज कराने के बहाने अस्पताल में घुसा। वह बेड पर लेटी महिला के पास गया। सीधे कनपटी पर पिस्टल सटाकर गोली मार दी। हत्या से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। वारदात के बाद आरोपी फायरिंग करते हुए भागने लगा। इसी दौरान एक ऑटो चालक ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया और उससे पिस्टल छीन ली। इसके बाद भीड़ ने आरोपी की पिटाई कर दी और पुलिस के हवाले कर दिया। ऑटो ड्राइवर बोला- फायरिंग करते हुए हमलावर भागा एडीजी पीयूष मोर्डिया ने भी अस्पताल पहुंचकर जांच की। ऑटो चालक विनोद दुबे ने बताया कि महिला की हत्या के बाद बदमाश फायरिंग करते हुए भाग रहा था। उस समय वह अस्पताल के बाहर एक मरीज को उतार रहा था। भीड़ के चिल्लाने पर उसने बदमाश को पकड़ लिया। आरोपी ने उस पर असलहा तान दिया, लेकिन उसने उसके हाथ मरोड़ दिए। असलहा जमीन पर गिर गया। इसके बाद उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया। तभी भीड़ इकट्ठा हो गई और लोगों ने उसे घेर लिया। उसके दोनों हाथ गमछे से बांध दिए गए। कुछ लोगों ने आरोपी को ईंट-पत्थरों से भी मारा। इससे वह घायल हो गया। हालांकि, समय रहते पुलिस मौके पर पहुंच गई और आरोपी को भीड़ से छुड़ाकर थाने ले गई। 2- ट्रेन में बाथरूम से निकलते ही मारी गोली जगह- वाराणसी, रविवार, समय- रात 2 बजे…। बिहार के गया जिले में पिपरिया गांव के रहने वाले दिनेश साहू (42) कोलकाता-जम्मू तवी एक्सप्रेस से सीतापुर के नैमिषारण्य धाम जा रहे थे। वह पत्नी के साथ कोच S-2 में सवार थे, जबकि उनकी बहन, उनके दो बच्चे और सास जनरल कंपार्टमेंट में यात्रा कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, रविवार देर रात करीब 2 बजे मुगलसराय रेलवे स्टेशन से पहले ब्लॉक हट-बी के पास ट्रेन पहुंची थी। उस समय दिनेश बाथरूम गए थे। जैसे ही वह बाहर निकले, आरोपी वीरेंद्र ने गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर यात्री मौके पर पहुंचे। पत्नी भी दौड़कर पहुंची और देखा कि दिनेश का शव खून से लथपथ पड़ा था। ब्लॉक हट-बी के चलते ट्रेन की स्पीड धीमी थी, मौका पाकर वीरेंद्र ट्रेन से उतर गया। यात्रियों ने पुलिस को सूचना दी। रात 2:42 बजे ट्रेन वाराणसी जंक्शन पहुंची, जहां शव को नीचे उतारा गया। 3. पैसेंजर ट्रेन में मारी गोली, रफ्तार कम होते ही भागा जगह- चंदौली, रविवार, समय सुबह 7 बजे…। गाजीपुर के जमानिया थाना क्षेत्र के चौधरी मोहल्ला का रहने वाला मंगरू (34) 15 दिन पहले काम की तलाश में कर्नाटक गया था। वहां पर मछली पकड़ने का काम करने लगा। काम पसंद नहीं आया। इसके बाद मंगरू वापस अपने घर लौट रहा था। वह कर्नाटक से सुपरफास्ट ट्रेन पकड़कर प्रयागराज (डीडीयू) जंक्शन पहुंचा था। यहां से घर जाने के लिए डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर में सवार हुआ था। ट्रेन सुबह 6:30 बजे डीडीयू जंक्शन से रवाना हुई थी। यात्रियों ने बताया- ट्रेन चंदौली में कचमन स्टेशन से पहले अलीनगर थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर गांव के पास पहुंची थी। तभी एक व्यक्ति ने मंगरू के माथे पर तमंचा सटाकर गोली मार दी। मंगरू घायल होकर गिर पड़ा। गोली की आवाज सुनकर ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई। आरोपी ने शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। इसके बाद ताजपुर गांव के पास ट्रेन धीमी होने पर कूदकर फरार हो गया।



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