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चंडीगढ़ में बिना फूड लाइसेंस लड्डू-बर्फी बनाना पड़ा महंगा: मिठाई कारोबारी को अदालत ने भेजा जेल, दलीलों की बजाय मांगी माफी – Chandigarh News

चंडीगढ़ में बिना फूड लाइसेंस लड्डू-बर्फी बनाना पड़ा महंगा:  मिठाई कारोबारी को अदालत ने भेजा जेल, दलीलों की बजाय मांगी माफी – Chandigarh News

चंडीगढ़ में बिना फूड लाइसेंस मिठाइयां बनाने और बेचने वाले कारोबारी को जिला अदालत ने जेल भेज दिया है। दोषी की पहचान दड़वा स्थित न्यू चंडीगढ़ स्वीट्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के संचालक आनंद कुमार के रूप में हुई है। मामला करीब पांच साल पुराना है। फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने 12 अक्टूबर 2021 को दड़वा में स्थित यूनिट पर छापा मारा था। जांच के दौरान टीम ने देखा कि वहां लड्डू, बर्फी और अन्य मिठाइयां बनाई और बेची जा रही थीं। जब अधिकारियों ने संचालक से फूड लाइसेंस मांगा तो वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद फूड सेफ्टी विभाग ने जिला अदालत में केस दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद 12 सितंबर 2022 को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने आनंद कुमार को दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा और 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया था। सेशन कोर्ट पहुंचा मामला निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आनंद कुमार ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज H. S. Grewal की अदालत ने 5 मई 2026 को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि अदालत ने उसकी सजा 6 महीने से घटाकर 1 महीना कर दी। दोषी पहले ही 50 हजार रुपए का जुर्माना जमा कर चुका था। ऊपरी अदालत से फैसला आने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बुड़ैल जेल भेज दिया। अदालत में दलीलों की बजाय मांगी माफी आमतौर पर अपील में आरोपी नई दलीलें पेश करते हैं, लेकिन इस मामले में आनंद कुमार ने अदालत में सीधे माफी मांगी। उसने बताया कि वह न्यूरो से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसके शरीर का ऊपरी हिस्सा लगातार कांपता रहता है। उसने यह भी कहा कि उसका मिठाई का कारोबार बंद हो चुका है। अदालत ने बीमारी को देखते हुए उसकी सजा कम जरूर की, लेकिन पूरी तरह माफ नहीं की। फूड लाइसेंस जरूरी फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों के अनुसार खाने-पीने की चीजें बनाने, पैक करने, स्टोर करने, सप्लाई करने या बेचने वाले हर कारोबारी के लिए फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य है। यह लाइसेंस फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के नियमों के तहत जारी किया जाता है। इसका मकसद लोगों तक सुरक्षित और साफ-सुथरा खाना पहुंचाना होता है। मिठाई की दुकानें, रेस्टोरेंट, ढाबे, बेकरी, डेयरी, फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और यहां तक कि छोटे फूड स्टॉल संचालकों को भी नियमों के अनुसार लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है। लाइसेंस लेने से पहले विभाग यह जांच करता है कि दुकान या यूनिट में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्टोरेज के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। बिना लाइसेंस खाद्य सामग्री तैयार करना या बेचना कानून का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में विभाग छापेमारी कर सैंपल ले सकता है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अदालत में केस दर्ज किया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और जेल तक की सजा का प्रावधान है।



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