10 दिन बीत गए, बहुमत के बाद भी कांग्रेस केरलम में CM तय नहीं कर पाई। राहुल गांधी एक्टिव हैं, 12 मई की रात तीन बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग चली, फिर भी नाम फाइनल नहीं कर पाए। केरलम के साथ ही 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी के चु
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पार्टी नेता जयराम रमेश के मुताबिक, 14 मई को CM के नाम का ऐलान होगा। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल, राज्य में कांग्रेस के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन और पार्टी के सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला दावेदार हैं। बीते 5 दिन से CM तय करने के लिए मीटिंग चल रही हैं। इस उलझन में केरलम में पार्टी टूटने की हालत हो गई।
सोर्स बताते हैं कि हाईकमान केसी वेणुगोपाल को CM बनाना चाहता है, सतीशन और रमेश चेन्नीथला इसके विरोध में हैं। कांग्रेस समर्थक सतीशन के साथ हैं, लेकिन विधायकों का समर्थन वेणुगोपाल को हासिल है। वहीं, पार्टी ने 2011 में रमेश से वादा किया था कि उन्हें आगे बड़ा पद मिलेगा। हो सकता है कि दो बड़े दावेदारों की लड़ाई में वे बाजी मार ले जाएं।
3 दिन से राहुल एक्टिव, रात तीन बजे तक खड़गे के घर मीटिंग
पार्टी सोर्स के मुताबिक, केरलम का CM तय करने के लिए 12 मई की देर रात करीब 3 बजे तक मल्लिकार्जुन खड़गे के घर मीटिंग हुई। राहुल गांधी 3 दिन से केरलम के कांग्रेस नेताओं, समर्थकों, दावेदारों और सहयोगी पार्टियों से बात कर रहे हैं। फिर भी मामला फंसा हुआ है। आखिरी फैसला राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ही करेंगे। वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी नेताओं से बात कर रही हैं। केरल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे अलग से मुलाकात की है।
सोर्स का दावा: राहुल चाहते हैं, CM हाईकमान की ओर से थोपा हुआ न लगे
सोर्स बताते हैं कि सिर्फ विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला करना होता, तो नतीजों के बाद 2 दिन में ही CM चुन लेते। हाईकमान विधायकों, पार्टी के नेताओं और समर्थकों की राय जानने की कोशिश कर रहा है।
राहुल गांधी दिल्ली से CM चुनकर नहीं भेजना चाहते। वे चाहते हैं कि सबकी सहमति से फैसला हो। सहयोगी दलों और सिविल सोसायटी की भी राय ली जा रही है। राहुल गांधी 3 दिन में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ और पूर्व अध्यक्षों से अलग-अलग मिल चुके हैं।

अब तक ये तीन सिनेरियो सामने हैं…
1. 50% सहमति वेणुगोपाल के नाम पर
राहुल गांधी की पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं, लेकिन उनके लिए कांग्रेस नेताओं का फीडबैक अच्छा नहीं है। राहुल गांधी कोई चूक नहीं होने देना चाहते, इसलिए सबसे मिलकर नाम तय कर रहे हैं।
वेणुगोपाल विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े। वे CM बने, तो उनके लिए उपचुनाव होगा। वेणुगोपाल केरल की अलाप्पुझा सीट से सांसद हैं। उन्हें इस्तीफा देना होगा और विधायक चुनकर आना होगा, यानी पार्टी को दो सीटों पर चुनाव में उतरना होगा। अभी ये रिस्क लेना आसान नहीं है।
2. 40% सहमति सतीशन के नाम पर
वीडी सतीशन 5 साल से विपक्ष के नेता थे। लेफ्ट सरकार को घेरते रहे। सतीशन के चेहरे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन UDF ने चुनाव लड़ा। उनका ग्राउंड कनेक्ट अच्छा है। 22 सीटें जीतने वाली सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी सतीशन के नाम पर राजी है। अगर हाईकमान किसी और का नाम फाइनल करती है, तो गठबंधन पर आंच आ सकती है।
पहले कांग्रेस में सतीशन के नाम पर सहमति बनी थी, इसलिए केसी वेणुगोपाल को चुनाव नहीं लड़ाया गया। चुनाव के बाद विधायकों ने केसी वेणुगोपाल का समर्थन किया, उससे सतीशन की सरकार चलाने की क्षमता पर सवाल उठा है।
3. 10% सहमति रमेश चेन्नीथला के नाम पर
रमेश चेन्नीथला का नाम तीसरे नंबर पर है। अगर केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्नीथला का समर्थन कर दें, तो समीकरण बदल जाएंगे। सतीशन भी वरिष्ठ होने की वजह से चेन्नीथला का विरोध नहीं कर पाएंगे और विधायकों का समर्थन चेन्नीथला के पक्ष में चला जाएगा। ऐसा भी हो सकता है कि सतीशन चेन्नीथला का समर्थन कर देें। ऐसे में केसी वेणुगोपाल को पीछे हटना पड़ सकता है।

वायनाड में पोस्टर- राहुल-प्रियंका यहां से दोबारा नहीं जीत पाओगे
कांग्रेस में टूट का एक संकेत वायनाड से है। ये 15 साल में कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट है। 2019 में राहुल गांधी अमेठी से हारे, लेकिन वायनाड से 4.3 लाख वोट से जीते। अब यहां पोस्टर लगे हैं- राहुल और प्रियंका वायनाड को भूल जाओ, यहां फिर नहीं जीतोगे। वायनाड अगला अमेठी होगा।
ये पोस्टर कांग्रेस समर्थकों ने लगाए हैं। उन्होंने हाईकमान को चेताया है कि केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया, तो ठीक नहीं होगा।

वायनाड के अलावा केरल में अलग-अलग शहरों में ऐसे पोस्टर लगे हैं। इसमें लिखा है कि अगर केसी वेणुगोपाल को CM बनाया तो ये बड़ी गलती होगी।
एक्सपर्ट: कांग्रेस के पास अच्छे मैनेजर नहीं, इसलिए राहुल-प्रियंका फंसे
- पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि कांग्रेस में अब कोई मैनेजर नहीं है। पहले अहमद पटेल या गुलाम नबी आजाद जैसे नेता सब तैयारी कर लेते थे और CM का चुनाव हो जाता था। केरलम के मामले में राहुल-प्रियंका फंस गए हैं, उनके पास इसका अनुभव नहीं है।
- कांग्रेस ने राज्यों में सीएम चुनने का कोई फॉर्मूला नहीं बनाया है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और कर्नाटक में यही दुविधा रही। आज तक तय नहीं हो पाया कि कांग्रेस जीते हुए राज्यों में CM कैसे चुनेगी।
- वेणुगोपाल 2019 से कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं, अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उनकी जगह कौन लेगा, ये भी बड़ा सवाल है।

वहीं, कांग्रेस को लंबे वक्त तक कवर करने वाले जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं कि हाईकमान के सामने संकट है कि विधायकों की सुने या समर्थकों की। इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। राहुल गांधी चाहते है कि ऑब्जर्वर भेजकर विधायकों की राय लें और उनके साथ जाएं, लेकिन यहां वे फैसला नहीं कर पाए हैं।
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