बैंकर उदय कोटक ने मंगलवार को चेतावनी दी- ‘बड़ा झटका आने ही वाला है… मुश्किल वक्त के लिए तैयार रहें।’ इससे दो दिन पहले पीएम मोदी ने भी कहा था- 1 साल तक सोना न खरीदें और पेट्रोल-डीजल कम खर्च करें।
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तो क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है? हां, तो सरकार क्या कर रही और आप कैसे तैयार रहें; आज के एक्सप्लेनर में इसी की बात…
सवाल-1: संकट के संकेत क्या हैं?
जवाब: 3 बड़ी बातें हैं-
1. प्रधानमंत्री की 7 अपीलें
10 मई को तेलंगाना के सिकंदराबाद की रैली में कहा- कोरोना सदी का सबसे बड़ा संकट था, तो अमेरिका-ईरान जंग से बने हालात इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। इससे निपटने के लिए देशवासियों से 7 अपील की। कुछ देर बाद ही बीजेपी ने सोशल प्लेटफॉर्म पर ये पोस्टर भी जारी कर दिया-
पीएम मोदी की ये 7 अपीलें बीजेपी ने X पर शेयर करते हुए लिखा- राष्ट्र प्रथम, कर्तव्य सर्वोपरि। (Source: BJP4India)
पश्चिम एशिया की जंग 27 फरवरी को शुरू हुई थी। सरकार कहती रही सब ठीक है। लेकिन ढाई महीने बाद प्रधानमंत्री सबसे अपील कर रहे हैं।
2. वित्त मंत्रालय ने कहा- ‘महंगे तेल का बोझ टाल नहीं सकते’
- 29 अप्रैल को जारी वित्त मंत्रालय की अप्रैल की मासिक इकॉनोमिक रिव्यू रिपोर्ट में लिखा- भारत देश के अंदर मजबूत डिमांड और बाहरी उथल-पुथल के दोराहे पर खड़ा है। ईरान जंग के बीच कुछ देशों ने तेल और बढ़ती हुई कीमतों का बोझ लोगों पर डालना शुरू कर दिया है। कुछ ने ऐसा नहीं किया, लेकिन ये टाला नहीं जा सकता।
- केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ‘सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना एक हजार करोड़ का घाटा हो रहा है। पिछली तिमाही में उन्हें करीब एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। तेल कंपनियां इसे कब तक झेल पाएंगी, ये बात मुझे परेशान करती है।’

3. सोने-चांदी पर अचानक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाना
- 13 मई को केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। जबकि 2024 के बजट में इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटाकर 6% की गई थी।
- ड्यूटी बढ़ाने से घरेलू बाजार में सोने-चांदी के गहने महंगे होंगे। ड्यूटी बढ़ाने के बाद 13 मई को सर्राफा बाजार में सोना 9 हजार और चांदी 22 हजार रुपए महंगी हो गई है। 10 ग्राम सोने का भाव 1.60 लाख रुपए और 1 किलो चांदी का भाव 2.87 लाख रुपए पर पहुंच गया है।
सवाल-2: आखिर वो संकट होगा क्या?
जवाब: मौजूदा हालात में 3 ऐसी बातें हैं जो लोगों के लिए संकट पैदा करेंगी…
1. पेट्रोल-डीजल 17 रुपए तक महंगा हो सकता है
- युद्ध से पहले 27 फरवरी को कच्चा तेल 67 डॉलर प्रति बैरल था, जो इस वक्त 107 डॉलर पहुंच गया है। यानी करीब 60% की बढ़ोत्तरी। लेकिन इस बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े।
- नुकसान उठा रही हैं इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां। अप्रैल से जून वाली तिमाही में इन तीनों कंपनियों को मिलाकर 1.2 लाख करोड़ रुपए का घाटा होने का अनुमान है।
इन तीनों कंपनियों की नेट वर्थ अभी 3.48 लाख करोड़ रुपए है। अगर यही घाटा जारी रहा, तो सिर्फ दो और तिमाही यानी 6 महीने में इनकी नेटवर्थ शून्य हो सकती है। सीधे शब्दों में कंपनियां कागज पर दिवालिया हो जाएंगी। इसलिए पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की चर्चा है।
अब सवाल आता है कितना? मोटा-मोटी कैलकुलेशन है कि कंपनियों को अपना घाटा पूरा करने के लिए पेट्रोल पर 16 रुपए और डीजल 17 रुपए बढ़ाने की जरूरत है। हिसाब नीचे ग्राफिक में देख लीजिए-

बीते दो महीने में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते 120 से ज्यादा देशों में दाम बढ़ाए जा चुके हैं। पाकिस्तान में 44%, अमेरिका में 42% और चीन में 31%।
2. महंगाई दर 1% बढ़ने से आपका मंथली बजट 15% बढ़ सकता है
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में 15% की बढ़ोतरी होने पर थोक महंगाई दर में 1% की सीधी बढ़ोत्तरी होती है। ये मौजूदा 3.7% से बढ़कर 4.7% हो सकती है। सुनने में ये एक आंकड़ा है, लेकिन असल जिंदगी में इसके असर काफी गहरे हैं।
मान लीजिए कि पेट्रोल-डीजल के दाम ₹15 प्रति लीटर बढ़ जाते हैं, तो एक मिडिल क्लास फैमिली का बजट कुछ ऐसे बिगड़ेगा-
- अगर आप महीने में 50 लीटर पेट्रोल खर्च करते हैं, तो ₹750 का सीधा अतिरिक्त खर्च होगा।
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट और स्कूल बस की फीस में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
- भारत में सबसे ज्यादा 70% माल ढुलाई डीजल से चलने वाले ट्रकों से होती है। जुताई के लिए ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए पंप भी डीजल से चलते हैं। इससे फल, सब्जियां, अनाज जैसी चीजों के दाम 10% से 15% तक बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम कर रहे लोगों की नौकरी का संकट होगा। ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन ऑर्गेनाइजेशन ‘ऑल इंडियन मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मेंबर शैलेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पहले से पेट्रोल-डीजल के संकट की वजह से 10% गाड़ियां नहीं चल रही हैं। अगर तेल की कीमत बढ़ी तो 30% गाड़ियां नहीं चल पाएंगी।’
3. जून-जुलाई में 39 मिलियन टन खाद की जरूरत, स्टॉक में सिर्फ आधा
- खाद के तौर पर 3 चीजें मुख्य तौर पर इस्तेमाल होती हैं- यूरिया, DAP और पोटाश। भारत अपनी जरूरत का 25-30% यूरिया, 90% DAP और 100% पोटाश विदेशों से खरीदता है।
- यूरिया बनाने में नेचुरल गैस लगती है। 60% गैस होर्मुज के रास्ते आती है, जिसमें अभी रुकावटें हैं। वहीं DAP और पोटाश बनाने का कच्चा माल रूस, मोरक्को, जॉर्डन और सऊदी अरब देशों से आता है। इनके ट्रांसपोर्ट में भी दिक्कतें आ रही हैं।
- इसलिए सबसे बड़ी चिंता खाद के घरेलू प्रोडक्शन की है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत का यूरिया उत्पादन 2-2.5 लाख टन प्रति माह से करीब 27% गिरकर 1.8 लाख टन रह गया है।
- अभी भारत के पास लगभग 19.02 मिलियन टन फर्टिलाइजर का भंडार है, जबकि खरीफ सीजन के लिए 39.05 मिलियन टन की जरूरत है।
- धान की बेल्ट वाले राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में यूरिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। हालांकि लगभग बाकी सभी राज्यों में खरीफ के सीजन में अलग-अलग फसलों की बुआई होती है। जिसमें खाद की जरूरत पड़ती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते 2024 में देशभर में खाद की कमी हो गई थी, जिसके बाद अलग-अलग शहरों में खाद के लिए दुकानों पर लगीं कतारें।
सवाल-3: सरकार के पास इस संकट से निपटने की क्या तैयारी है?
जवाब: सरकार का दावा है कि उसने तेल, गैस और खाद का जरूरी स्टॉक कर रखा है…
60 दिन के लिए कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद: भारत के पास विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर के स्टोरेज प्लांट में 5.53 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल रखने की कैपिसिटी है। इनमें अभी 64% यानी लगभग 3.37 MMT कच्चा तेल भरा है। हरदीप पुरी के मुताबिक, भारत के पास 60 दिन के कच्चा तेल का स्टॉक मौजूद है।
LPG का प्रोडक्शन डेढ़ गुना तक बढ़ा: भारत ने अपनी जामनगर, पानीपत, मथुरा और गुवाहाटी समेत कुल 23 गैस-तेल रिफाइनरियों में LPG का प्रोडक्शन बढ़ाया है। पुरी के मुताबिक, ‘पहले हमारा घरेलू LPG उत्पादन रोजाना 35 से 36 हजार मीट्रिक टन था, जिसे हमने बढ़ाकर 50 से 54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया है।’
खाद का स्टॉक आम दिनों से ज्यादा: फर्टिलाइजर विभाग की एडिशनल सेक्रेटरी अपर्णा शर्मा के मुताबिक, ‘यूरिया प्लांट पूरी कैपिसिटी से चल रहे हैं और फॉस्फेट व पोटाश वाली खाद का प्रोडक्शन भी बढ़ाया गया है। अभी सरकार के पास 51% स्टॉक है, जबकि आमतौर पर इस समय सिर्फ 33% स्टॉक रहता है। खाद सब्सिडी के लिए बजट में 1.70 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा दिए गए हैं, ताकि खाद के दाम बढ़ने पर भी किसानों पर बोझ न बढ़े।’
इसके अलावा दुनिया में जंग के हालात के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था की असली ताकत उसकी घरेलू मांग में है। देश की GDP का करीब 70% हिस्सा घरेलू खपत से आता है, इससे इकॉनमी पर बाहरी दबावों का असर कम पड़ता है।
एक्सपर्ट्स ने युद्ध के चलते भारत की GDP ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.7% तक आने की संभावना जताई है, फिर भी ये ज्यादातर देशों के मुकाबले तेज ग्रोथ होगी।
टैक्स और ऑडिट फर्म ‘डेलॉइट’ के मुताबिक, भारत ने अपनी सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग पर ध्यान दिया है, जिससे महंगाई कंट्रोल में रही और खपत को बढ़ावा मिला है।
सवाल-4: इस संकट के असर से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
जवाब: पेट्रोल-डीजल, LPG, कुकिंग ऑयल और फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ाना या घटाना सरकार के हाथ में है। आप पर उसका असर कम हो, इसकी तैयारी जरूर कर सकते हैं। फाइनेंशियल प्लानर स्वाती कुमारी बताती हैं-
इमरजेंसी फंड बढ़ाइए: ज्यादा बचत इमरजेंसी के खर्चों और महंगाई के समय सुरक्षा देती है। अगर इस समय आपके इमरजेंसी फंड में 5 लाख रुपए हैं, तो आप इसे 7-8 लाख के बीच कर लीजिए। उदाहरण के तौर पर, जिस परिवार का मासिक खर्च 50 हजार है, तो उसे कम से कम 3 लाख रुपए का इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए।
बड़े खर्च रोक दीजिए: खर्च बढ़ेगा और कमाई नहीं बढ़ेगी, तो सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। ऐसे में अगर आप अपनी कार अपडेट करना चाहते हैं या फिर विदेश यात्रा का प्लान हैं, तो इसे कम से कम एक साल के लिए टाल दीजिए।
हेल्थ इश्योरेंस कवर बढ़ा लीजिए: संकट के समय में अगर कोई हेल्थ इमरजेंसी आती है, तो सेविंग कम होने और मेडिकल खर्च बढ़ने की कंडीशन में आप अपनी FD या फिर दूसरे इन्वेस्टमेंट्स से पैसा निकालना चाहेंगे, जो सही डिसिजन नहीं होगा। ऐसे में अगर गुंजाइश हो, तो अपना हेल्थ इंश्योरेंस कवर बढ़ा लें।
इन सेक्टर्स में बढ़ाएं निवेश: कोविड के समय में फार्मा और IT जैसे सेक्टर्स के शेयर बढ़े थे। मौजूदा संकट में भी कुछ सेक्टर्स मुनाफा दे सकते हैं। अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है, तो आप रिन्यूएबल एनर्जी, EV और रेलवे जैसे सेक्टर्स में इन्वेस्ट कर सकते हैं।
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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास
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पीएम मोदी ने रविवार को तेलंगाना की एक रैली में देश से 7 अपीलें कीं। इनमें एक अपील सोना न खरीदने की भी थी। पीएम मोदी ने कहा- देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। हालांकि सरकार ने खुद पिछले कुछ सालों से RBI के जरिए सोने की खरीद बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर…
