पंजाब के स्थायी डीजीपी पद की दौड़ में बड़ा मोड़ आ गया है। पंजाब विजिलेंस प्रमुख और डीजीपी पद के मजबूत दावेदार आईपीएस अधिकारी एसएस चौहान का नाम सीबीआई की भ्रष्टाचार संबंधी एफआईआर में आने के बाद पुलिस और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि एफआईआर में चौहान को आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन जांच में सामने आया है कि उनके रीडर ओपी राणा कथित तौर पर उनके नाम पर रिश्वत मांग रहे थे। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई आने वाले दिनों में एसएस चौहान से पूछताछ कर सकती है। हाल ही में पंजाब सरकार ने डीजीपी पद के लिए यूपीएससी को जो पैनल भेजा था, उसमें चौहान को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। ऐसे में इस मामले ने उनकी दावेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 13 लाख रिश्वत मांगने का आरोप
सीबीआई एफआईआर के अनुसार मामला एक लंबित शिकायत को बंद कराने के बदले 13 लाख रुपए की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता फाजिल्का जिले के अबोहर निवासी ईटीओ अमित कुमार ने 8 मई को आरोप लगाया था कि कुछ निजी बिचौलिए पंजाब विजिलेंस अधिकारियों के नाम पर पैसे मांग रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि रकम विजिलेंस प्रमुख एसएस चौहान के नाम पर और उनके रीडर ओपी राणा के जरिए मांगी जा रही थी। होटल में ट्रैप, 13 लाख के साथ गिरफ्तारी
प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने 11 मई को चंडीगढ़ के एक होटल में ट्रैप लगाया। कार्रवाई के दौरान अंकित वधावा नामक व्यक्ति को 13 लाख रुपए नकद और एक मोबाइल फोन लेते हुए गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के मुताबिक यह रकम ओपी राणा और अन्य लोगों तक पहुंचाई जानी थी। ट्रैप के दौरान ओपी राणा मौके से फरार हो गया। उसके बाद से सीबीआई लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई है। एजेंसी को आशंका है कि राणा विदेश भागने की कोशिश कर सकता है। इसी को देखते हुए उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में छापेमारी
सीबीआई की टीमें पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। एफआईआर में ओपी राणा के अलावा निजी ठेकेदार राघव गोयल, उसके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल और कुछ अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के अनुसार ट्रैप के बाद राघव गोयल, विकास गोयल और दो गनमैन को अंबाला के पास पंजाब-हरियाणा सीमा से गिरफ्तार किया गया था, जबकि मुख्य आरोपी ओपी राणा अब भी फरार है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि एफआईआर की शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट में एसएस चौहान का नाम दर्ज है। हालांकि जांच एजेंसी ने उन्हें आरोपी नहीं बनाया है, लेकिन विपक्ष और प्रशासनिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सीबीआई जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और क्या यह विवाद पंजाब के अगले स्थायी डीजीपी के चयन को प्रभावित करेगा।
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