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आज का एक्सप्लेनर: भारत पर अचानक इतना प्यार क्यों लुटाने लगे ट्रम्प; कोई बड़ी जरूरत या सिर्फ डैमेज कंट्रोल, रूबियो की यात्रा के मायने

आज का एक्सप्लेनर:  भारत पर अचानक इतना प्यार क्यों लुटाने लगे ट्रम्प; कोई बड़ी जरूरत या सिर्फ डैमेज कंट्रोल, रूबियो की यात्रा के मायने


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। इस बीच पीएम मोदी को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिला है। ट्रम्प का भी बयान आया- ‘मुझे पीएम मोदी से प्यार है, पीएम मोदी महान हैं।’

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पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास थी। फिर यह गर्मजोशी क्यों? ट्रम्प का यह प्यार असली है या सिर्फ डैमेज कंट्रोल; आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास क्यों आने लगी थी?

जवाबः जनवरी 2025 में ट्रम्प दोबारा राष्ट्रपति बने। अगले ही महीने पीएम मोदी उनसे मिलने वाशिंगटन पहुंचे। माहौल गर्मजोशी भरा था, लेकिन इसके बाद 2 बड़ी चीजें हुईं, जिसने रिश्तों में दरार डाल दी…

1. ट्रम्प ने भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया

  • ट्रम्प ने शुरुआत में भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया। इसके बाद रूस से तेल खरीदने की सजा के तौर पर 25% पेनाल्टी टैरिफ।
  • यानी भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50% तक बढ़ गया। दुनिया के सिर्फ दो देशों पर इतना टैरिफ लगाया गया- भारत और ब्राजील।

2. भारत के दुश्मन पाकिस्तान से ट्रम्प की अप्रत्याशित नजदीकी

  • ऑपरेशन सिंदूर की वजह से मई 2025 में भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर था। ट्रम्प ने दोनों देशों में सीजफायर कराने का क्रेडिट लिया।
  • पाक पीएम शहबाज शरीफ ने इसके लिए उन्हें नोबेल प्राइस देने की सिफारिश कर दी। दूसरी तरफ भारत ने ट्रम्प की मध्यस्थता की बात नहीं मानी। कहा जाता है कि ट्रम्प इससे खफा हुए।
  • शहबाज शरीफ को व्हाइट हाउस बुलाकर अपना ‘शानदार दोस्त’ कहना। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का 3 बार अमेरिका जाना। ट्रम्प का उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल बताना, प्रोटोकॉल तोड़कर साथ लंच करना और अब ईरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता। इसकी वजह से भारत धीरे-धीरे अमेरिका से दूर खिसकता गया।

अमेरिका ने पाकिस्तान से सितंबर 2025 में रेयर अर्थ मिनरल्स से संबंधित 500 मिलियन डॉलर की डील की थी। इसके बाद अमेरिका दौरे पर गए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने ट्रम्प को कुछ मिनरल्स दिखाए।

इसके अलावा भी कुछ घटनाएं हुई। जैसे-

  • अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे भारतीय नागरिकों को ट्रम्प प्रशासन ने हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां डालकर दिल्ली भेज दिया। यह तस्वीरें भारत में बड़ा मुद्दा बनीं। विदेश मंत्री जयशंकर को संसद में जवाब देना पड़ा।
  • यूक्रेन जंग के बाद से भारत, रूस से सस्ता तेल खरीदता रहा। ट्रम्प की नाराजगी के बावजूद, दिसंबर 2025 में पुतिन खुद दिल्ली आए। यह अमेरिका को सीधा संदेश था।
  • मई 2026 में ट्रम्प ने चीन का दौरा किया और शी जिनपिंग के साथ मुलाकात को G-2, यानी दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की बैठक बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति आमतौर पर चीन को काउंटर करने के लिए भारत को साथ रखते हैं, लेकिन ट्रम्प ने उल्टा किया।
  • जनवरी 2026 में हुए एक सर्वे के मुताबिक, 54% भारतीय मानते हैं कि ट्रम्प के दूसरी बार सरकार में आने के बाद से भारत-अमेरिका के बीच के रिश्ते कमजोर हुए हैं।

सवाल-2: क्या अब भारत से रिश्ते सुधारने में जुट गए हैं ट्रम्प?

जवाबः जनवरी 2026 में ट्रम्प ने अपने खास सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का राजदूत बनाया। इसके बाद रिश्तों में थोड़ी नरमी आनी शुरू हुई। फरवरी में ट्रेड डील पर सहमति बनी, अमेरिका के न्योते पर भारत ने पैक्स सिलिका जॉइन किया। यह एक संगठन है, जिसका मकसद कम्प्यूटर चिप्स और AI की सप्लाई चेन सुरक्षित बनाए रखना है।

पिछले कुछ दिनों से अमेरिका ने ऐसे प्रयास काफी तेज कर दिए हैं- मार्को रूबियो की पहली भारत यात्रा

  • मार्को रूबियो 26 मई को होने वाले QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए हैं। उन्होंने पीएम मोदी, NSA अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की।
  • भारतीय थिंकटैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, ORF के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर हर्ष पंत के मुताबिक रूबियो की यात्रा नियमित राजनयिक यात्रा से बढ़कर है। यह दिखाती है कि अमेरिका रिश्ते सुधारने की नए सिरे से कोशिश कर रहा है।
भारत में डिप्लोमैटिक बैठकों के बाद रूबियो अपनी पत्नी के साथ ताज महल घूमने भी गए।

भारत में डिप्लोमैटिक बैठकों के बाद रूबियो अपनी पत्नी के साथ ताज महल घूमने भी गए।

ट्रम्प ने कहा- अमेरिका पर 100% भरोसा कर सकता है इंडिया

  • अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने पर 24 मई को दिल्ली के भारत मंडपम में कार्यक्रम रखा गया। रूबियो, सर्जियो गोर सहित तमाम अमेरिकी डिप्लोमैट शामिल हुए।
  • तभी ट्रम्प ने सर्जियो गोर को फोन कर दिया- उन्होंने स्पीकर पर कहा- ‘आई लव प्राइम मिनिस्टर। मोदी महान हैं। मैं उनका बहुत बड़ा फैन हूं।’
  • ट्रम्प ने भारत-अमेरिका के रिश्तों पर भी कहा, ‘हम कभी भारत से इतने करीब नहीं रहे। भारत के लोग मुझ पर और मेरे देश पर 100% भरोसा कर सकते हैं। अगर भारत को कभी मदद की जरूरत पड़ी, तो उन्हें पता है कि कहां कॉल करना है।’ ये रहा वीडियो-

मोदी को व्हाइट हाउस का न्योता

  • फरवरी 2025 के अमेरिका दौरे के बाद ट्रम्प और मोदी की मुलाकात नहीं हुई है। मार्को रूबियो ने पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया है। हालांकि जून में फ्रांस में होने वाले G-7 समिट में भी दोनों नेता मिल सकते हैं।

सवाल-3: क्या ये सिर्फ डैमेज कंट्रोल या अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत?

जवाबः अमेरिकी मीडिया का कहना है कि भारत आए मार्को रूबियो डैमेज कंट्रोल मिशन पर हैं। रूबियो ने पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों की बात मानी और इस पर विरोध जताया। रूबियो ने कहा, ‘पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने पर भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई। इससे भारत की कूटनीतिक मैच्योरिटी का पता चलता है।’

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस वक्त 4 वजहों से अमेरिका को भारत की सख्त जरूरत है…

1. भारत के साथ ट्रेड डील को अंजाम तक पहुंचाना

  • फरवरी में भारत-अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ था। इसमें 5 सालों में 500 बिलियन डॉलर, यानी करीब 47.6 लाख करोड़ रुपए का अमेरिकी सामान खरीदने और रूस से तेल खरीद कम करने जैसी शर्तें थीं। बदले में अमेरिका ने टैरिफ 18% कर दिया था।
  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के रेसिप्रोकल टैरिफ को अंसवैधानिक बता दिया। जिससे इस डील पर व्यापक समझौता ठंडे बस्ते में चला गया। अमेरिका अब चाहता है कि भारत इस डील पर जल्द से जल्द साइन कर दे।
  • भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद रूबियो ने 24 मई को कहा है कि उन्हें लगता है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द ही हो जाएगा। इसमें टैरिफ कटौती, क्रिटिकल मिनरल्स डील, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का लेन-देन शामिल हो सकता है।

2. भारत को तेल बेचकर पैसे कमाना

  • भारत दौरे से पहले मार्को रूबियो ने मीडिया से कहा था कि हम भारत को उतनी ऊर्जा बेचना चाहते हैं जितनी वो खरीद सके। उन्होंने वेनेजुएला का और ज्यादा तेल भारत को बेचने की ओर इशारा किया।
  • ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट पिछले 3 महीनों से बंद है। भारत की जरूरत के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। भारत ने रूस से वापस खरीद बढ़ा दी है।
  • ORF में स्ट्रैजिक स्टडीज प्रोग्राम की सीनियर फेलो रेचल रीजो के मुताबिक, ‘अमेरिका चाहेगा की भारत उससे ज्यादा से ज्यादा ईंधन खरीदे और रूस पर निर्भरता कम करे।’

3. भारत के जरिए चीन का काउंटर तैयार करना

  • ट्रम्प के चीन दौरे के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, ‘ट्रम्प चापलूसी कर रहे थे और शी जिनपिंग दृढ़ थे। दोनों के बीच का अंतर साफ था।’
  • ट्रम्प ने शी को एक महान व्यक्ति बताते हुए कहा- आप शक्तिशाली तरीके से देश चला रहे हैं। अमेरिका और चीन का शानदार भविष्य है। हम मुश्किल में एक-दूसरे की मदद करते हैं।
  • जबकि शी जिनपिंग ने साफ कर दिया कि अगर ताइवान के मुद्दे को ठीक से नहीं संभाला गया अमेरिका-चीन के रिश्ते खतरे में पड़ जाएंगे।
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार और टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बावजूद चीन ने मिलिट्री ऑनर के साथ ट्रम्प का स्वागत किया। उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई।

अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से व्यापार और टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बावजूद चीन ने मिलिट्री ऑनर के साथ ट्रम्प का स्वागत किया। उन्हें 21 तोपों की सलामी भी दी गई।

  • ट्रम्प की यात्रा के 3 दिन बाद ही पुतिन भी चीन पहुंचे। इस दौरान जॉइंट स्टेटमेंट में शी और पुतिन ने अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल योजना की निंदा की।
  • रेचल रीजो के मुताबिक, ‘अमेरिका में यह सोच है कि इंडो-पैसिफिक में भारत ही चीन को काउंटर कर सकता है। भारत के पास अच्छे ट्रेड रूट और बढ़ती हुई सैन्य शक्ति है। लेकिन भारत की विदेश नीति साफ है कि बाहरी दबाव में फैसले नहीं लेने हैं। दूसरे देशों को मिलिट्री बेस नहीं बनाने देना है। अमेरिका को इन नीतियों से समझौता करना होगा।’

4. अमेरिकी हथियार बेचकर कमाई, रक्षा साझेदारी बढ़ाना

  • रेचल रीजो के मुताबिक, अमेरिका भारत के साथ रक्षा साझेदारी भी बढ़ाना चाहता है। वो चाहता है कि भारत उससे हथियार खरीदे। द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में शामिल हो।
  • पिछले साल ट्रम्प ने भारत को पांचवी जनरेशन का F-35 फाइटर जेट बेचने की सिफारिश की थी, लेकिन भारत ने इसे ठुकरा दिया था।

सवाल-4: क्या अमेरिका पर भारत आंख मूंदकर भरोसा कर सकता है?

जवाबः भारत के पास विकल्प कम हैं, लेकिन फिर भी वो अमेरिका पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकता।

स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘सत्ता में लौटने के बाद दोस्त कहते हुए ट्रम्प ने कई बार भारत का अपमान किया, दबाव डाला और पेनल्टी लगाई। अब फिर वो मोदी को दोस्त और खुद को उनका फैन बताने लगे।’

बेल्जियम बेस्ड थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट प्रवीण दोन्थी के मुताबिक, ‘भारत शायद धैर्य दिखाते हुए ट्रम्प का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करेगा।’

भारत को लेकर अमेरिका की पोजिशन अब भी बहुत साफ नहीं है। अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने भारत के एक कार्यक्रम में कहा- ‘हम भारत के साथ वह गलतियां नहीं दोहराएंगे, जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं। हम आपको सभी बाजारों को विकसित करने की छूट नहीं देंगे, जिससे आप कई क्षेत्रों में हमें ही पछाड़ दें।’

भारत भी संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करने वाला। मार्को रूबियो के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अमेरिका से तेल खरीदने के बारे में पूछा गया। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों से भी ईंधन खरीदेगा।

जब मार्को रूबियो भारत आए, तो जयशंकर उनका स्वागत करने भी नहीं पहुंचे थे। रूबियो की यात्रा के तीनों पड़ावों- कोलकाता, दिल्ली और आगरा में सरकार के किसी मंत्री या विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी ने उनका स्वागत नहीं किया।

दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्रालय में अमेरिका विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी नागराज नायडू काकनूर ने उनका स्वागत किया।

दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्रालय में अमेरिका विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी नागराज नायडू काकनूर ने उनका स्वागत किया।

सवाल-5: मार्को रूबियो की भारत यात्रा से क्या हासिल होगा? जवाबः भारत का भरोसा जीतने के अलावा इस दौरे में रूबियो का फोकस 3 चीजों पर है…

i. भारत-अमेरिका ट्रेड डील।

ii. QUAD को दोबारा पटरी पर लाना।

iii. वीजा पर भारत की चिंता का रास्ता खोजना।

अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑफ फॉरेन रिसर्च, CFR के एक्सपर्ट सदानंद धूमे के मुताबिक, ‘रूबियो की महज एक यात्रा से काम नहीं चलेगा। दोनों देशों को अपने रिश्तों को फिर से सुधारने के लिए लगातार कोशिशें करनी होंगी।’

सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज, CSIS के रिचर्ड रोसो ने भी कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि रूबियो के भारत दौरे से दोनों देशों के रिश्तों के मौजूदा हालात को बदल पाएंगे। इस मुलाकात से फरवरी में अंतरिम ट्रेड डील को फाइनल ट्रेड एग्रीमेंट में बदलने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है।’

रिचर्ड रोसो ने ये भी कहा, ‘QUAD की यह लगातार तीसरी बैठक है, जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी के बिना हो रही है। इसे QUAD की प्राथमिकता घटने के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है।’

**** रिसर्च सहयोग: प्रथमेश व्यास

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