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पेट्रोल-डीजल ड्यूटी कटौती से सरकार को ₹1-लाख करोड़ का घाटा: वित्त मंत्री बोलीं- देश की ग्रोथ पर नेगेटिव माहौल बनाना गलत

पेट्रोल-डीजल ड्यूटी कटौती से सरकार को ₹1-लाख करोड़ का घाटा:  वित्त मंत्री बोलीं- देश की ग्रोथ पर नेगेटिव माहौल बनाना गलत


नई दिल्ली51 मिनट पहले

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (25 मई) को बताया कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) कम करने से सरकार को ₹1 लाख करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान होगा।

इसके साथ ही उन्होंने भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर बनाए जा रहे निराशाजनक माहौल को खारिज किया और देश की आर्थिक स्थिति का बचाव किया।

वित्त मंत्री ने यह बात मुंबई में स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में कही।

तेल कंपनियों ने 10 दिन में चौथी बार दाम बढ़ाए

  • देश में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन की दरों में बढ़ोतरी की है।
  • 15 मई को एक लंबे अंतराल के बाद पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया था।
  • तब से लेकर आज चौथी बढ़ोतरी तक, पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं।

एक्साइज ड्यूटी घटने से आम जनता को मिली राहत

सरकार की एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती से देश भर के उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के पंपों पर कम कीमतें चुकानी पड़ रही हैं।

यह कदम ऐसे समय में परिवारों और व्यवसायों को सीधी राहत देता है, जब पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार गहरे दबाव में बना हुआ है।

भारत की चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो भी दबाव दिख रहा है, उसके लिए भारत की अपनी नीतियां नहीं बल्कि देश की सीमाओं के बाहर के मुख्य कारण जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। कई हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स यह साबित करते हैं कि देश में औद्योगिक मांग और आर्थिक रफ्तार लगातार मजबूत बनी हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि हमारे सामने चुनौतियां आंतरिक से ज्यादा बाहरी हैं। हमें सोना, ईंधन और फर्टिलाइजर (उर्वरक) के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है। ये तीनों चीजें वैश्विक कमोडिटी साइकिल और करेंसी के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं।

अर्थव्यवस्था पर गलत नैरेटिव बनाना सही नहीं

निर्मला सीतारमण ने मुंबई के मंच से उन लोगों को सीधा जवाब दिया जो बाहरी दबावों के इस दौर में भारत की आर्थिक उपलब्धियों पर संदेह जताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ग पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई चुनौतियों के बीच हमारी अपनी उपलब्धियों की निंदा करना चाहते हैं।

उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों को पूरी तरह से गलत और अनुचित बताया। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर एक निराशाजनक नैरेटिव (माहौल) बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि बिल्कुल सही नहीं है।

घरेलू मोर्चे पर आलोचनाओं का सामना

वित्त मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में भारत की विकास दर और उसकी क्वालिटी को लेकर बहस चल रही है।

आलोचक लगातार घरेलू खपत पर बढ़ते दबाव, महंगाई और करेंसी में हो रहे उतार-चढ़ाव को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

सरकारी कंपनियों को सख्त निर्देश

व्यापक अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर बात करने के साथ ही वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs/सरकारी कंपनियों) को एक कड़ा और सीधा संदेश दिया।

उन्होंने सरकारी कंपनियों से कहा कि वे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को किए जाने वाले भुगतानों के लिए तय की गई 45 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा का पूरी तरह पालन करें और उनका बकाया समय पर क्लियर करें।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी

वहीं सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें…

क्या होती है एक्साइज ड्यूटी?

यह केंद्र सरकार द्वारा देश के भीतर बनने वाले या बिकने वाले उत्पादों (जैसे पेट्रोल-डीजल) पर लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है। इसमें कटौती से ग्राहकों को तो राहत मिलती है, लेकिन सरकार के खजाने (राजस्व) को सीधा नुकसान होता है।

MSME के लिए 45 दिन का नियम क्या है?

सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी बड़ी या सरकारी कंपनी को छोटे उद्योगों (MSME) से सामान या सर्विस लेने के 45 दिनों के भीतर उनका पेमेंट करना अनिवार्य होता है, ताकि छोटे बिजनेस में कैश की कमी न हो।



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