इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अर्बन लैंड सीलिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की है।
‘राम अवतार व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में कोर्ट ने माना कि विवादित भूमि पर राज्य सरकार वैध तरीके से वास्तविक कब्जा लेने में असफल रही थी, इसलिए याचिकाकर्ता अर्बन लैंड सीलिंग (रिपील) एक्ट, 1999 के तहत लाभ पाने के हकदार हैं। मुरादाबाद : कानून के अनुरूप कब्जा नहीं मामला मुरादाबाद जिले के ग्राम सोनकपुर स्थित गाटा संख्या 773 और 789 की भूमि से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अर्बन लैंड (सीलिंग एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1976 के तहत उनकी जमीन पर की गई पूरी कार्यवाही अवैध थी। उनका दावा था कि वे लगातार जमीन पर काबिज रहे और प्रशासन ने कब्जा लेने की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। दूसरी ओर, राज्य सरकार और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने अदालत को बताया कि भूमि का कब्जा वर्ष 1984 में ही लिया जा चुका था और वहां आवासीय योजना विकसित की जा रही है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले ‘स्टेट ऑफ यूपी बनाम हरि राम’ समेत अन्य निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सीलिंग एक्ट की धारा 10(5) और 10(6) के तहत नोटिस देना और वैधानिक प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी यह साबित करने में नाकाम रहे कि भूमि का कब्जा कानून के अनुरूप शांतिपूर्वक या बलपूर्वक लिया गया था। राज्य सरकार के दावे कमजोर कोर्ट ने इस बात पर भी गंभीर टिप्पणी की कि राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार का नाम वर्ष 2018 में काफी देरी से दर्ज किया गया, जबकि लंबे समय तक याचिकाकर्ताओं के नाम रिकॉर्ड में बने रहे। इसके अलावा, विवादित भूमि पर निजी आबादी और अन्य निर्माणों की मौजूदगी ने भी राज्य सरकार के दावे को कमजोर किया। सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि चूंकि भूमि का वास्तविक कब्जा कभी भी वैध तरीके से राज्य को नहीं सौंपा गया, इसलिए कार्यवाही अर्बन लैंड सीलिंग रिपील एक्ट, 1999 के तहत समाप्त मानी जाएगी। अदालत के इस फैसले से याचिकाकर्ताओं को अपनी जमीन पर अधिकार बनाए रखने में बड़ी राहत मिली है।
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