इस महीने का सबसे उत्तम पर्व पुरुषोत्तम एकादशी आज हस्त और चित्रा नक्षत्र नक्षत्र के युग्म संयोग तथा पांच शुभ संयोग में मनेगी। इस एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी, पद्मिनी एकादशी व कमला एकादशी भी कहते है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह एकादशी पूरे तीन साल बाद आता है I इसलिए इस एकादशी का व्रत करने, श्रीहरि विष्णु की सेवा-पूजा तथा दान-पुण्य के साथ धर्मकृत्य करने से 10 गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में एकादशी का व्रत से वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में एकादशी का व्रत करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति तथा वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इस अधिकमास तथा एकादशी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु है। ऐसे में इस व्रत की महत्ता और बढ़ जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्रदायक है। इस दिन श्रीहरि विष्णु को गंगाजल व पंचामृत स्नान, केसर चंदन, पीले पुष्प, सुगंधित इत्र, तुलसी दल, पीला फल व मिष्ठान्न से पूजा होगी। पांच शुभ योग में एकादशी का व्रत पंचागीय गणना के आधार पर आचार्य राकेश झा ने कहा कि पुरुषोत्तम एकादशी पर आज बुधवार को दो शुभ नक्षत्र एवं पांच शुभ योग का महासंयोग बन रहा है। इसके अलावे इस दिन बुधवार का दिन, जो विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण एवं बुद्धि के दाता भगवान गणेश को समर्पित है। एकादशी के दिन हस्त व चित्रा नक्षत्र के संचरण से सिद्धि व समृद्धि के योग बनेंगे। चन्द्रमा इस दिन कन्या राशि से तुला राशि में गोचर करेंगे। इससे यह दिन वृष, कन्या, तुला व मीन राशि के जातकों के लिए उन्नति दायक रहेगा। सामान्य वर्ष में 24 तो अधिकमास में 26 एकादशी सामान्य वर्ष में कुल 24 एकादशी यानि प्रत्येक महीने में दो एकादशी पड़ती है। एक एकादशी कृष्ण पक्ष में तो दूसरी शुक्ल पक्ष में होती है। परंतु जिस साल में अधिकमास पड़ता है तो उस वर्ष 26 एकादशी हो जाती है। स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड में वर्षभर की सभी एकादशी का महत्व बताया गया है। एकादशी तिथि श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। इसलिए एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु पर उनकी विशेष कृपा होती है। राशि के अनुसार पूजा व दान मेष: श्रीहरि को पीला मिष्ठान का भोग तथा ॐ अच्युताय नमः का जाप करे। वृष: सफेद चंदन व माखन-मिश्री का भोग लगाए फिर ॐ गोविन्दाय नमः का जाप करे। मिथुन: पीला फल-फूल व तुलसी दल चढ़ाए एवं ॐ पद्मनाभाय नमः का जाप करे। कर्क: केसर युक्त पंचामृत से अभिषेक एवं ॐ माधवाय नमः का जाप करे। सिंह: विष्णु मंदिर में पीला वस्त्र का दान व ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जप करे। कन्या: सुगंधित इत्र का लेप, केला का दान व ॐ हृषिकेशाय नमः का जप करे। तुला: पीला फूल व फल चढ़ाए व ॐ श्रीधराय नमः का जप करे। वृश्चिक: श्रीहरि को केसर चंदन का तिलक व गुड़-चना चढ़ाए व ॐ दामोदराय नमः का जाप करे। धनु: 108 हल्दी की गांठ व पीला वस्त्र का दान ब्राह्मण को दे तथा ॐ विष्णवे नमः का जप करे। मकर: पीपल में घी का दीप दान व परिक्रमा फिर ॐ त्रिविक्रमाय नमः का जाप करे। कुंभ: पीला अन्न व काला तिल का दान तथा ॐ जनार्दनाय नमः का जाप करे। मीन: पंचामृत से स्नान व पीला पुष्प चढ़ाए तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करे। एकादशी पर गंगा स्नान व पूजन का शुभ मुहूर्त लाभ व अमृत मुहूर्त: प्रातः 05:01 बजे से 08:24 बजे तक गुली काल व शुभ मुहूर्त: सुबह 10:05 बजे से 11:47 बजे तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:20 बजे से 12:14 बजे तक चर-लाभ मुहूर्त: शाम 03:01 बजे से 06:33 बजे तक
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