राजस्थान की राजनीति में बुधवार को उस वक्त बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया, जब हनुमान बेनीवाल ने साधु-संतों के समर्थन में राज्य सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भैराणा धाम में आयोजित महापंचायत के दौरान सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए जयपुर कूच का ऐलान कर दिया। भैराणा धाम के पास रीको क्षेत्र आवंटन को निरस्त करने की मांग को लेकर आयोजित सभा में हजारों की संख्या में साधु-संत और ग्रामीण पहुंचे। मंच से बेनीवाल ने सरकार पर संत समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन साधु-संतों ने भाजपा सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई, आज वही संत समाज खुद को ठगा और पीड़ित महसूस कर रहा है। सभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने प्रभावशाली लोगों की जमीनों के दाम बढ़ाने के लिए भैराणा धाम के पास रीको क्षेत्र आवंटित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे धार्मिक और सामाजिक माहौल प्रभावित होगा। बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने एक घंटे के भीतर संत समाज की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो हजारों समर्थकों के साथ जयपुर की ओर पैदल कूच किया जाएगा। हनुमान बेनीवाल ने मंच से कहा कि आज पूरी सरकार को सोने नहीं दूंगा। उन्होंने सरकार पर किसानों की अनदेखी, बढ़ती महंगाई और कर्ज माफी के वादे पूरे नहीं करने को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान परेशान हैं, युवा बेरोजगार हैं और सरकार केवल बड़े लोगों के हित साधने में लगी हुई है। बेनीवाल के इस आक्रामक रुख के बाद प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया। संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर संदेश नायक और रेंज आईजी भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने बेनीवाल और आंदोलनकारियों से बातचीत कर हालात को शांत करने की कोशिश की। देर रात तक वार्ता का दौर जारी रहा और प्रशासन जयपुर कूच को रोकने के प्रयास में जुटा रहा। लेकिन जब सरकार की तरफ से सकारत्मक जवाब नहीं आया। तो बेनीवाल ने देर रात अपने समर्थकों के साथ जयपुर के लिए रवाना हो गए। इससे पहले भैराणा धाम में दिनभर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में समर्थकों के जुटने से प्रशासन अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की। इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है। साधु-संतों के समर्थन में बेनीवाल का यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। वहीं सरकार के लिए भी यह मामला चुनौती बनता नजर आ रहा है, क्योंकि आंदोलन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी माहौल गरमाने लगा है। फिलहाल प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत जारी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस पूरे मामले में क्या फैसला लेती है और हनुमान बेनीवाल आगे कौन सी रणनीति अपनाते हैं।
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