श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज व AAP के महासचिव व प्रवक्ता बलतेज पन्नू। (फाइल फाेटो)
पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के लिए जल्द सख्त कानून बनेगा। इसको लेकर बनाई विधानसभा कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यह जानकारी आम आदमी पार्टी (AAP) के जॉइंट सेक्रेटरी बलतेज पन्नू ने दी।
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पन्नू ने ये भी कहा कि यह कानून सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी पर लागू होगा। इस कानून के तहत बेअदबी के दोषी को आजीवन उम्रकैद और बेअदबी की कोशिश करने पर 3 से 5 साल तक कैद का प्रावधान किया गया है।
यही नहीं, कानून इतना सख्त है कि इसमें न तो आरोपी को जमानत मिलेगी और न ही आपस में राजीनामा किया जा सकेगा। इस कानून का बिल 15 जुलाई को विधानसभा में पेश हुआ था। जिसके बाद इसे कमेटी के पास भेजा गया था।
AAP का ये बयान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज के सरकार को बेअदबी करने वालों पर सख्त कानून बनाने के लिए कहने के बाद आया है। AAP नेता पन्नू ने कहा कि अकाल तख्त जत्थेदार का आदेश सिर-मत्थे है।
AAP नेता ने बेअदबी कानून को लेकर क्या कहा
- अकाल तख्त जत्थेदार का सुझाव कबूल है: पन्नू ने कहा कि, जत्थेदार अकाल तख्त साहिब ने कल बयान दिया था कि पंजाब सरकार बेअदबी पर सख्त कानून बनाए, ताकि आगे से कोई बेअदबी करने की कोशिश न कर पाए। उन्होंने कहा कि आपका सुझाव मान्य है। सरकार बेअदबी पर सख्त कानून बनाने के लिए एक प्रस्ताव लेकर आई थी। इस मामले में विधानसभा की एक कमेटी बनाई गई है।
- किसी भी धर्म का ग्रंथ हो, सबको लेकर लागू होगा: पन्नू ने आगे कहा- कमेटी ने अलग-अलग धर्मों के लोगों से बहुत सारी मीटिंग की हैं। लोगों से सभी सुझाव लिए गए हैं। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही पेश करेगी और विधानसभा में बेअदबी पर सख्त कानून बनाया जाएगा। धर्मग्रंथ किसी भी धर्म का हो, उसकी बेअदबी पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार सख्त कानून बनाने की कार्रवाई जल्द ही पूरा करेगी। यह राज्य का कानून होगा।
विधानसभा में पेश हुआ था बिल बता दें कि, 15 जुलाई 2025 को पंजाब सरकार ने धार्मिक ग्रंथों (गुरु ग्रंथ साहिब, गीता, बाइबल, कुरान) की बेअदबी रोकने के लिए नया बिल तैयार किया। इसके बाद कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी और विधानसभा में पेश किया। इसका नाम पंजाब पवित्र ग्रंथ अपराध निवारण बिल 2025 रखा गया है। इस प्रस्ताव को सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है। कमेटी में सभी दलों के लोग शामिल है। सभी लोगों से राय लेने के बाद इसे सदन में पेश किया जाएगा।

