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हवा में खाने-सोने में माहिर अबाबिल पहुंचा रायपुर, VIDEO: 10 महीने तक हवा में रह सकता है, जानिए इस खूबसूरत पक्षी की खासियत – Raipur News


आरंग के कुकरा गांव में महानदी मुख्य नहर पर बने पुल के नीचे अबाबील ने अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है।

हवा में खाने और सोने में माहिर अबाबिल पक्षियां हजारों की संख्या में इन दिनों छत्तीसगढ़ में अपना अशियाना ढूंढ रहे है। हजारों किलोमीटर की उड़ान के बाद रायपुर पहुंचे पक्षियों ने आरंग के कुकरा गांव में महानदी मुख्य नहर पर बने पुल के नीचे अपना स्थायी ठिका

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नेचर एक्सपर्ट ने इसके यूरोप या भारत के हिमाचल प्रदेश से छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना जताई है। एक्सपर्ट के मुताबिक, इस पक्षी की खासियत है कि ये हवा में उड़ते उड़ते ही खाना भी लेते है और आराम से सो भी जाते है।

खास बात यह है कि यह पक्षी उड़ान के दौरान ही आराम, प्रजनन और नींद भी पूरी कर लेती है

खास बात यह है कि यह पक्षी उड़ान के दौरान ही आराम, प्रजनन और नींद भी पूरी कर लेती है

अबाबील की खासियत केवल इसकी रफ्तार ही नहीं, बल्कि इसकी जीवनशैली भी है। ​​​​​​ सुबह एक साथ अपने बसेरे से निकलते है और सूर्यास्त के पहले अपने ठिकाने पर लौट आते हैं। रायपुर में इन पक्षियों के झूंड को देखकर आसपास के लोग मोबाइल से इनकी तस्वीरें कैद कर रहे हैं। हजारों की संख्या में यह पक्षी छोटे-छोटे झुंड में भी बट जाते हैं।

अबाबील जिसे स्वेल्लो और स्विफ्ट के नाम से भी जाना जाता है, आकार में गौरैया जैसी लेकिन क्षमताओं में उससे कहीं आगे मानी जाती है। यह खूबसूरत देशी-प्रवासी पक्षी अपनी तेज उड़ान और सामूहिक जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है। अबाबिल नर और मादा में आपसी साझेदारी और सहयोग की भावना होती है।

बिल्डिंग या पुल के नीचे बनाती है ठिकाना

घोंसला निर्माण के मामले में भी अबाबील बेहद अनोखी है। पुराने मकान, महल, खंडहर, मस्जिद, मंदिर, गुफाएं या ओवरब्रिज के नीचे ये घोंसले समूह में बनाए जाते हैं।

एक ही जगह सैकड़ों छोटे-छोटे घोंसलों की कॉलोनी विकसित हो जाती है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगती है।

इसके लंबे, नुकीले पंख, दो भागों में बंटी दुम और चौड़ा मुंह इसे हवा में कीटों का शिकार करने में मदद करता है।

इसके लंबे, नुकीले पंख, दो भागों में बंटी दुम और चौड़ा मुंह इसे हवा में कीटों का शिकार करने में मदद करता है।

यूरोप और हिमाचल से छत्तीसगढ़ आने की संभावना

बर्ड विशेषज्ञों के मुताबिक, अबाबील एक प्रवासी पक्षी है और समय की बड़ी पाबंद मानी जाती है। यह झुंड में रहना पसंद करती है और निश्चित समय पर लंबी दूरी का सफर तय करती है। छत्तीसगढ़ में ये यूरोप या भारत के हिमाचल प्रदेश से पहुंचने की संभावना है।

इसके लंबे, नुकीले पंख, दो भागों में बंटी दुम और चौड़ा मुंह इसे हवा में कीटों का शिकार करने में मदद करता है। बर्ड विशेषज्ञ बताते है कि रफ्तार, अनुशासन और सामूहिक जीवन की मिसाल पेश करने वाली अबाबील न सिर्फ प्रकृति की खूबसूरती बढ़ाती है, बल्कि इंसानों को भी मिलकर आगे बढ़ने की सीख देती है।

नेचर एक्सपर्ट मोहित साहू

नेचर एक्सपर्ट मोहित साहू

अबाबील का अर्थ जानिए

नेचर एक्सपर्ट मोहित साहू के मुताबिक, अबाबील (Ababil) एक प्रकार की काली चिड़िया होती है, जिसे अंग्रेजी में ‘Martlet’ या ‘Swallow’ कहते हैं। यह कुरान में वर्णित चमत्कारी पक्षियों के समूह का नाम है, जिन्होंने काबा की रक्षा की थी, और इसका अर्थ “बहुत सारे पक्षी” भी होता है।



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