कुरुक्षेत्र के लाडवा में पुलिस ने एक फर्जी महिला पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला एक पारिवारिक झगड़ा सुलझाने के नाम पर दहेज का सामान लेकर भाग गई थी। आरोपी महिला की पहचान सतविंदर कौर उर्फ सिमरन निवासी जडौला के रूप में हुई। सिमरन सोशल वर्कर बनकर लोगों से मिलती थी। फिलहाल पुलिस ने सिमरन को कार्ट में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस उसका क्रिमिनल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। सिमरन 10वीं पास है, लेकिन उसने अपनी पर्सनैलिटी पुलिसकर्मी की तरफ बना रखी थी। पारिवारिक झगड़े का उठाया फायदा थाना लाडवा में 17 जनवरी को छंदोली गांव के अनिल कुमार ने बताया कि उसके बेटे की शादी के कुछ समय बाद उनका बहू के साथ झगड़ा हो गया था। हर रोज परिवार में अनबन बनी रहती थी। इसे लेकर उसकी बहू ने पुलिस को शिकायत दी थी महिला थाने में गई शिकायत पारिवारिक और महिला से जुड़ा मामला होने के चलते मामले की जांच महिला थाने में चली गई। जांच के लिए महिला थाने से उनके पास 16 दिसंबर को फोन आया और उनको थाने बुलाया गया। उन्होंने थोड़ा समय लेकर थाने में आने के लिए कह दिया। पुलिसकर्मी बनकर आई महिला उनके थाने में जाने से पहले ही घर पर एक महिला आ गई, जिसने खुद को महिला थाने की पुलिसकर्मी बताया। महिला ने उनको घर पर ही आपसी समझौते से मामला निपटाने का आश्वासन दिया। उसने उनका आपस में फैसला करवा दिया और बहू काे सामान के साथ उसके मायके जाने का फैसला कर दिया। बहू और सामान को लेकर गई फैसला होने के बाद उस महिला पुलिसकर्मी ने घर में रखा बहू का सामान उठवा दिया और बहू को अपने साथ लेकर चली गई। उनको लगा कि अब सब ठीक हो गया है और वे फैसले से खुश हो गए, लेकिन अगले दिन महिला थाने से फिर फोन आया और उनको थाने में बुला लिया। एक्टिंग करके 5 हजार भी ले गई
कथित महिला ने पुलिसकर्मी की पूरी एक्टिंग की और समझौता करवाने का एवज में 5 हजार रुपए भी ले गई। उन्होंने महिला थाने की जांच अधिकारी को फोन पर पूरी बात बता दी। जांच अधिकारी ने उनको किसी भी पुलिसकर्मी को घर भेजने की बात से इनकार कर दिया। उधर, उनकी बहू का दहेज का सामान भी घर नहीं पहुंचा। FIR दर्ज कर शुरू की जांच लाडवा थाने के SHO गुरनाम सिंह ने बताया कि अनिल कुमार ने ठगी होने पर FIR दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी सिमरन को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट से उसे 3 दिन के रिमांड पर लिया गया है। आरोपी से समझौते के नाम पर लिए गए 5 हजार रुपए रिकवर किए गए।
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