शिरोमणि अकाली दल ने आगामी विधानसभा और शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर संगठन को मजबूत करने का ऐलान किया है। चंडीगढ़ में पार्टी की पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि फरवरी माह में पार्टी का मास कॉन्टैक्ट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा, जिसके तहत हलका-वाइज बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों की तारीखों का ऐलान आने वाले कुछ ही दिनों में कर दिया जाएगा। एक सप्ताह में चार रैलियां आयोजित करने की योजना है।दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि हाल ही में हुए जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों की जिला और विधानसभा स्तर पर समीक्षा की गई है। उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों में अकाली दल की वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है, जो पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मास कॉन्टैक्ट प्रोग्राम के दौरान अकाली दल सरकार के समय किए गए विकास कार्यों को जनता के बीच लेकर जाएगा। इसके साथ ही पंजाब में जमीनें बेचने जैसे कथित गलत फैसलों के बारे में भी लोगों को अवगत कराया जाएगा। संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने पर जोर अकाली नेता ने बताया कि 10 फरवरी तक सर्कल अध्यक्षों की नियुक्ति, जिला कोर कमेटियों और बूथ लेवल कमेटियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न विंग—एससी विंग, बीसी विंग, यूथ विंग, वूमैन विंग और एसओआई की कमेटियों को भी पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में जीत दर्ज करने वाले और पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही नगर निगम और म्यूनिसिपल कौंसिल चुनावों की तैयारी शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सिख संस्थाओं में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं पत्रकारवार्ता के दौरान सिख संस्थाओं को चुनौती देने के मामलों और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब को लेकर कथित आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की गई। दलजीत सिंह चीमा ने पटना साहिब बोर्ड चुनाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां आठ प्रतिशत नॉन-सिख वोट रजिस्टर कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसा हरियाणा में किया गया और अब अन्य जगहों पर भी किया जा रहा है, जो सिख धर्म में सीधा दखल है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पर रोक लगाने की मांग की। गठजोड़ के लिए अभी एक वर्ष का समय, सभी की राय से लेंगे फैसला अलायंस को लेकर उन्होंने कहा कि अभी इसमें लगभग एक साल का समय है। फिलहाल पार्टी अपनी संगठनात्मक मजबूती पर काम कर रही है और 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित गठबंधन से पहले सभी सीटों पर पार्टी की मजबूत वर्किंग कमेटी होना जरूरी है। सेहत बीमा योजना के तहत डॉटा एकत्र कर रही सरकार अकाली दल ने पंजाब सरकार की सेहत बीमा योजना पर भी सवाल उठाए। दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि यह योजना लोगों पर जबरदस्ती थोपी जा रही है और इसके नाम पर चुनावी डाटा इकट्ठा किया जा रहा है। मोबाइल नंबर लेकर चुनाव प्रचार में इस्तेमाल की आशंका जताई गई। उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस योजना को चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है और फार्म पर पार्टी नेता से हस्ताक्षर करवाने की शर्त लोगों का अपमान है। बेअदबी और कानून व्यवस्था पर आरोप बेअदबी के मुद्दे पर बोलते हुए अकाली दल ने कहा कि वर्ष 2015 से इस संवेदनशील मसले पर राजनीति की जा रही है, लेकिन अब तक न तो दोषियों तक पहुंचा गया और न ही बेअदबी को भड़काने वालों को पकड़ा गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की एसआईटी जांच भी राजनीतिक मकसद से की गई। श्री हरिमंदिर साहिब में हाल ही में हुई बेअदबी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि वहां की मर्यादा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आम आदमी पार्टी के वॉर रूम में सेट होते हैं नैरेटिव दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी का वॉर रूम रोज नया नैरेटिव सेट करता है, कभी छापेमारी, कभी बेअदबी और कभी आपराधिक मामलों का मुद्दा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार की कार्रवाई इतनी प्रभावी है तो सरहिंद में बम ब्लास्ट कैसे हो गया। शिअद की तरफ से जिला अध्यक्षों के साथ बैठक 2027 विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियों में जुटे शिरोमणि अकाली दल ने चंडीगढ़ में अहम बैठक की है। बैठक में जिला अध्यक्ष और बलाक अध्यक्षों को बुलाया गया है। सुखबीर सिंह बादल यह बैठक ले रहे हैं और पूरी कोर कमेटी के सदस्य व अन्य नेता बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं। शिअद नेताओं का कहना है कि बैठक के दौरान जिला अध्यक्षों से उनके एरिया की फीडबैक लेने के साथ साथ अगली रणनीति पर चर्चा हुई है। दूसरी पार्टियों से गठजोड़ पर चर्चा शिरोमणि अकाली दल लगभग पंद्रह साल से सत्ता में नहीं है। ऐसे में भाजपा के साथ भी गठजोड़ अभी नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों को शिअद में मिलाने या फिर उनके साथ गठजोड़ करने पर विचार विमर्श किया गया है।
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