लखनऊ में बुधवार को पेटा इंडिया ने नानवेज खान-पान के खिलाफ प्रदर्शन किया। हजरतगंज चौराहे पर जीव हत्या के विरोध में एक युवती खून से लथपथ भुने हुए मटन और पोर्क के साथ जंजीरों से लटकी हुई है । उन्होंने नॉनवेज छोड़कर वेज अपनाने का संदेश दिया। सड़क से गुजरने वाले लोगों को वेज खान-पान के लिए जागरूक किया गया। ‘साग सब्जियां का प्रयोग करें’ PETA इंडिया कैंपेन कोऑर्डिनेटर अपेक्षा ने कहा लोग जिस तरह मांस खा रहे हैं , इसकी कल्पना भी विचलित करती है। ये देख कर बहुत चिंता होती है कि लोग जीवित चीजों को भोजन के रूप में इस्तेमाल करते है। वेज के रूप में खाने के लिए बहुत साग-सब्जियां , फ्रूट्स बहुत कुछ है। ताजा फल और सब्जियों को खाकर हम अधिक स्वस्थ और फिर रह सकते हैं , इसके बाद मांस खाने की जरूरत नहीं है। बूचड़खाने पर प्रतिबंध की मांग संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों का हवाला देते हुए संस्था ने कहा- जलवायु संकट के गंभीर प्रभावों से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन आहार अपनाना जरूरी है। PETA इंडिया के अनुसार, वीगन जीवनशैली अपनाने वाला हर व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 200 पशुओं की जान बचाता है। साथ ही हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी घटता है। सरकार से भी मांग किया है कि बूचड़खानों पर रोक लगाई जाए, जहां प्रतिदिन हजारों की तादाद में जीव हत्या होती है। ‘जानवरों के साथ क्रूरता बंद हो’ अपेक्षा ने कहा कि मांसाहार का उपयोग लोगों को बीमार कर देता है। अंडों के इस्तेमाल के लिए मुर्गियों को छोटे-छोटे पिंजरों में बंद किया जाता है। जहां वो खुलकर सांस भी नहीं ले पाती हैं। बूचड़खानों में बड़ी संख्या में जानवरों को काटा जाता है। उन्हें घसीटा जाता है। उनकी हड्डियों को तोड़ दिया जाता है, जिसकी वजह से उनको असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। ये पशु क्रूरता बंद करने की जरूरत है। ‘मछलियां तड़प तड़प कर जाती हैं’ मछलियां पानी की खूबसूरती है उनको खाने के लिए उन्हें पानी से दूर कर दिया जाता है। जिन मछलियों का जल ही जीवन है। वह मछलियां बाहर तड़प तड़प के मर जाती हैं। उन्हें बेरहमी से लोग अपना भोजन बना लेते हैं। खून में लथपथ यह जानवर किसी के लिए स्वादिष्ट भोजन कैसे हो सकते हैं। हम सभी से अपील करते हैं कि वे मांस की जगह पोषक और स्वादिष्ट वीगन भोजन अपनाएं। बेजुबानों की हत्या बंद होनी चाहिए।
Source link
