स्कूलों और छात्रावासों में भोजन पकाने व परोसने के स्थान पर अब कैमरे लगाए जाएंगे। बच्चों के मध्याह्न भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संस्था प्रमुख को ही जिम्मेदार मानकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सुकमा जिले के पकेला पोटाकेबिन स्कूल के बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने की घटना तथा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने 10 बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसे सभी जिलों के प्रमुख अधिकारियों के पास भेजा गया है।
खाद्य सुरक्षा के लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा। स्कूली बच्चों के लिए खाना पकाने के स्थान पर अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। इसी तरह छात्रावास व स्कूलों में प्राथमिक चिकित्सा किट और विषहर औषधियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल व छात्रावासों में खाद्य सुरक्षा के लिए अभिभावक-शिक्षक निगरानी समिति बनेगी। सचिव के भेजे गए पत्र में इस संबंध में 26 अगस्त 2025 को जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने सावधानी तथा सुरक्षा बरतने के संबंध में दिए गए निर्देश का उल्लेख किया गया है। सचिव ने कहा है कि किसी तरह की चूक के लिए संस्था प्रमुख ही जिम्मेदार होगा।
आवासीय विद्यालय और बड़े छात्रावासों के रसोई व भोजन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए स्थानीय विभिन्न मदों का उपयोग करने कहा गया है। वहीं, भोजन परोसने से पहले शिक्षक व वार्डन को रोज भोजन चखने और प्रमाण पत्र देने के निर्देश हैं।
खाद्य भंडारण व खाना पकाने के क्षेत्रों से ‘फिनाइल, कीटनाशक, डिटर्जेंट, केरोसिन’ को दूर अलग से संग्रहित करना होगा। अनाज, दालों, तेलों व सब्जियों के लिए ताले और सीलबंद कंटेनर रखना होगा। खाद्य सुरक्षा की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा।
चूक के लिए प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य, वार्डन की व्यक्तिगत जवाबदेही होगी। इसी तरह खाना पकाने के दौरान और बाद में रसोई परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।
मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने प्रमुख सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, सभी संभागायुक्त, सभी एसपी, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग व सभी जिलों के कलेक्टर को निर्देश भेजे हैं।
प्राथमिक चिकित्सा किट रखने के निर्देश सभी छात्रावासों और विद्यालयों में प्राथमिक चिकित्सा किट और बुनियादी विषहर औषधियां उपलब्ध कराना होगा। इसी तरह आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य विषाक्तता की स्थिति में आपातकालीन प्रतिक्रिया पर मॉक ड्रिल करना अनिवार्य होगा।
पुलिस को तत्काल सूचना देना अनिवार्य जानबूझकर भोजन को खराब करने की किसी भी घटना की तत्काल पुलिस को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य गुणवत्ता व सुरक्षा संबंधी खामियों की सूचना देने के लिए एक राज्य स्तरीय हेल्पलाइन या शिकायत तंत्र बनाने के निर्देश हैं। घटना चाहे कितनी छोटी क्यों न हो, जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा।
अभिभावक-शिक्षक निगरानी समिति का गठन : राज्य सरकार के सभी शालाओं में पालक-शिक्षक बैठक आयोजित की जा रही है। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा के लिए अभिभावक-शिक्षक निगरानी समिति का गठन कर नियमित अंतराल पर समीक्षा करनी होगी।
