सुल्तानपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता अनूप संडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनाई के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त न करने को लेकर निशाना साधा है। संडा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की यह चुप्पी भारत की विदेश नीति के लिए खतरा साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश की पारंपरिक विदेश नीति के सिद्धांतों के विपरीत यह रुख भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। सपा प्रवक्ता ने दावा किया कि आयतुल्लाह खामेनाई की मौत इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में हुई। उन्होंने कहा कि इस घटना पर प्रधानमंत्री की चुप्पी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को कमजोर करती है। संडा के मुताबिक, भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन और स्वतंत्र रुख पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा हालात में वह सिद्धांत कमजोर पड़ता दिख रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और टैरिफ मुद्दे का भी जिक्र अनूप संडा ने कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत-पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रुकवाने का दावा किया था, तब भी प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी तरह टैरिफ बढ़ाने या घटाने के नाम पर देश को ‘ठगने’ के आरोपों पर भी प्रधानमंत्री चुप रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुप्पी अंतरराष्ट्रीय दबाव का संकेत देती है। चाबहार समझौते पर उठाए सवाल सपा प्रवक्ता ने चाबहार बंदरगाह समझौते का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भारत सरकार अमेरिकी दबाव में ईरान के साथ हुए इस समझौते से पीछे हट गई। उन्होंने सवाल किया कि जो प्रधानमंत्री कुछ वर्ष पहले चाबहार परियोजना को भारत की बड़ी उपलब्धि बताते थे, वे अब इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं। ‘अमेरिकी आर्थिक साम्राज्यवाद के खिलाफ बोलना चाहिए’ संडा ने कहा कि जब दुनिया अमेरिकी आर्थिक साम्राज्यवाद और ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ सोच रही है, तब भारत का अपनी दशकों पुरानी विदेश नीति से हटना खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि कोई न कोई दबाव जरूर है। भारत सरकार अमेरिका के आर्थिक अन्याय के खिलाफ खुलकर बोलने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।” संडा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी ‘अंतरराष्ट्रीय दबाव की राजनीति’ के आगे भारत जैसे महान देश की सरकार को झुकना नहीं चाहिए।
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