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रांची सहित राज्यभर में धान की बंपर रोपाई हुई है। करीब 17 लाख हेक्टेयर में इस बार फसल लगी है। लेकिन पौधों को मजबूती नहीं मिल पा रही है, क्योंकि रोपाई के बाद पर्याप्त खाद नहीं डाली जा सकी। रोपाई के 50 दिनों के अंदर धान के पौधों को दो बार यूरिया की जरूरत होती है। अब वह अवधि समाप्त होने को है, लेकिन सभी खेतों में यूरिया नहीं डाली जा सकी है। इसका नतीजा है कि धान के पौधे कमजोर हैं। अभी भी यूरिया नहीं मिली तो पैदावार पर असर पड़ेगा। हालांकि, सरकार का दावा है कि राज्य में यूरिया की कोई किल्लत नहीं है। जुलाई में यूरिया की कमी थी, जिसे अगस्त में पूरा किया गया। सितंबर में कोई किल्लत नहीं है।
लेकिन सच्चाई सरकार के दावों से अलग है। राज्य के सभी जिलों में अभी भी यूरिया की किल्लत है। कालाबाजारी कम हुई है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुई। लैम्पस से यूरिया नहीं मिलने की स्थिति में किसान बाजार से यूरिया खरीद रहे हैं। इसके लिए अधिक कीमत चुका रहे हैं। सरकारी दर 266.50 रुपए प्रति बोरी (45 किलो) है। लेकिन खाद-बीज की दुकानों में 350 से 450 रुपए प्रति बोरी तक यूरिया बिक रही है।
धान रोपाई से 50 दिनों के अंदर दो बार यूरिया देना जरूरी
धान की फसल में रोपाई से पहले यूरिया, पोटास आैर डीएपी डाली जाती है। रोपाई के 20 दिन बाद आैर फिर उसके 30 दिनों के बाद यूरिया देने की जरूरत होती है, नहीं तो पौधे कमजोर होंगे। तना अधिक नहीं निकलेंगे तो पैदावार कम होगी। रोग से लड़ने की क्षमता कम होगी। विकल्प के रूप में नैनो यूरिया इस्तेमाल कर सकते हैं।
जिलों के हालात से समझिए… क्यों हो रही कालाबाजारी
रांची: सितंबर में 3500 मीट्रिक टन की जरूरत थी, जो मिल गई। अगस्त तक ही किल्लत थी। कालाबाजारी पर 7 खाद दुकानदारों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं।
हजारीबाग: 350 से 400 रुपए प्रति बोरा यूरिया बिक रही है। जिला कृषि पदाधिकारी उमेश तिर्की ने बताया कि जिले को 20 हजार एमटी की जरूरत है, कम मिली।
रामगढ़: लैम्पस से यूरिया नहीं मिल रही है। इस वजह से किसान 350 से 400 रुपए प्रति बोरा यूरिया खरीद रहे। दुलमी प्रखंड के कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि इस वर्ष खाद की किल्लत है।
गढ़वा: किसान 500 से 600 रुपए प्रति बोरी यूरिया खरीद रहे हैं। बिहार से खाद मंगानी पड़ रही है। जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान ने बताया कि 8500 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत थी, 7600 एमटी मिली है। कालाबाजारी की शिकायत पर कार्रवाई भी हो रही है।
गिरिडीह: यूरिया 380 से 400 रु. बोरी बिक रही है। जिला कृषि पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने बताया कि सितंबर में 5100 एमटी यूरिया की जरूरत थी, पर आधा मिला है। -शेष पेज 11 पर
ऐसी है जिलों में यूरिया की स्थिति…
जिला मांग आपूर्ति बाजार में कीमत
रांची 3500 3400 300- 370
चतरा 1200 641 350- 450
हजारीबाग 20,000 15,300 350- 400
गढ़वा 8500 7600 500- 600
गिरिडीह 5100 2600 380- 400
कोडरमा 10000 3000 370- 400
पू. सिंहभूम 600 350 350- 400
बोकारो 150 104 370- 400
यूरिया की कमी नहीं, कालाबाजारी की सूचना नहीं :
(मांग व आपूर्ति मीट्रिक टन में और बाजार की कीमत रु./बोरी)
अशोक कुमार,पूर्व एसोसिएट डीन, बीएयू, रांची
इन जिलों में भी है किल्लत:साहिबगंज, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, गुमला, रामगढ़, सिमडेगा।
राज्य सरकार ने इस वर्ष 1,63,000 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत बताते हुए केंद्र को प्रस्ताव दिया था। इसके मुकाबले अगस्त में केंद्र सरकार से करीब 50 हजार मीट्रिक टन कम यूरिया मिली थी। सितंबर में रांची आैर धनबाद में अतिरिक्त यूरिया की रैक आई। लेकिन इस बार भी सभी जिलों को जरूरत के अनुसार यूरिया नहीं मिल पाई। इस वजह से अधिकतर जिलों में यूरिया की किल्लत हो गई। इसी का नतीजा है कि कालाबाजारी हो रही है।
