हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल की गई है। साडा रिकांगपिओ और हीलिंग हिमालय संस्था ने मिलकर पोवारी स्थित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में एकत्रित कचरे से सुंदर कलाकृतियां तैयार की हैं। पोवारी एमआरएफ में स्थानीय घरों और व्यावसायिक केंद्रों से जमा किए गए कचरे को आमतौर पर केवल निष्पादन के लिए देखा जाता था। हीलिंग हिमालय टीम के सदस्य अंशुल श्यामा ने इस कचरे को नया रूप दिया। उन्होंने टीन के डिब्बों, पारदर्शी प्लास्टिक, बोतलों के ढक्कन, प्लास्टिक के फूलों और पदकों का उपयोग कर अद्भुत कलाकृतियां बनाईं। इन कलाकृतियों में दो मुख्य आकृतियां शामिल हैं, जिनमें एक हिम तेंदुआ, जो किन्नौर की दुर्लभ जैव विविधता का प्रतीक है और दूसरी पारंपरिक पोशाक में एक महिला, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है। इन आकृतियों के माध्यम से हिमालय की सुंदरता और संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया गया है। कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहने की अपील साडा रिकांगपिओ और हीलिंग हिमालय के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि समाज में कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता पैदा करना है। यह प्रदर्शनी लोगों को यह सोचने पर प्रेरित करती है कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक तरीके से पुन: उपयोग किया जा सकता है। इस अनूठे निर्माण के जरिए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर कचरे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई है।
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