भोपाल में नगर निगम की नई बिल्डिंग पर कुल 73 करोड़ रुपए खर्च हुए। इनमें बिल्डिंग के सिविल वर्क से लेकर उसके इंटीरियर समेत अन्य काम भी शामिल हैं। इतनी भारी भरकम राशि खर्च होने के बावजूद जिम्मेदार परिषद का मीटिंग हॉल बनाना भूल गए। इसके लिए जिला प्रशासन से 5 एकड़ जमीन भी मांगी गई, लेकिन गुरुवार को लोकार्पण में संकेत मिले कि नई जमीन की जगह निगम परिषद का हॉल कैम्पस में ही बनेगा। लोकार्पण कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए महापौर मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 5 एकड़ जमीन की मांग की थी। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और निगम कमिश्नर संस्कृति जैन से बात भी की। सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त जमीन की बजाय बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में ही नया परिषद मीटिंग हॉल बनाने की बात सामने आई है। यदि ऐसा होता है तो पार्किंग की जगह नया मीटिंग हॉल बन सकता है। ताकि, भविष्य में परिषद की बैठकें यहां हो सकें। 43 से 73 करोड़ रुपए पहुंची बिल्डिंग की लागत
दूसरी ओर, जिस बिल्डिंग का लोकार्पण किया गया है, पहले उसकी लागत 43 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन गुरुवार को जब इसका उद्घाटन हुआ तो इसकी लागत 73 करोड़ रुपए बताई गई। 43 करोड़ रुपए में सिविल के काम हुए, जबकि बाकी राशि से अन्य कार्य करवाए गए। बता दें कि यह प्रदेश की पहली नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जो जियोथर्मल तकनीक से लैस है। पार्किंग पर लगे सोलर पैनलों से 300 किलोवाट बिजली बनेगी। नवनिर्मित मुख्यालय का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। इसके लोकार्पण के साथ नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। किस फ्लोर पर क्या? नई बिल्डिंग की देखिए तस्वीरें… एक जगह परे सभी विभाग
नई बिल्डिंग में सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगने लगी है। इसके लिए जनसुविधा केंद्र बनाया गया है। यानी, सिंगल विंडो सिस्टम यहां लागू किया गया है। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। बता दें कि इससे पहले भोपाल के कई स्थानों पर निगम के ऑफिस में शाखाएं संचालित की जा रही हैं। आईएसबीटी और माता मंदिर में महापौर, अध्यक्ष और कमिश्नर के कक्ष के साथ कई शाखाएं लग रही थीं। शाहपुरा में बिल्डिंग परमिशन शाखा है, जबकि फतेहगढ़ में स्वास्थ्य शाखा थी। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है बिल्डिंग
ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि, इसकी दिशा उत्तर-दक्षिणी होने की वजह से बिजली उत्पादन में असर पड़ सकता है। नई बिल्डिंग में कई खामियां भी
5 एकड़ जमीन में बनी इस बिल्डिंग में कई खामियां भी हैं। पहले मीटिंग हॉल को लेकर बड़ी भूल सामने आ चुकी है। दरअसल, करोड़ों रुपए की लागत से बिल्डिंग तो बना दी गई है, लेकिन जिम्मेदार मीटिंग हॉल बनाना भूल गए थे। इसके लिए महापौर राय ने मुख्यमंत्री से लोकार्पण कार्यक्रम में जमीन की डिमांड भी की। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर
बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है।
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