टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया अपनी लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी में कटौती और उड़ानों की संख्या करीब 20% कम कर सकती है। वर्तमान में एयरलाइन हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है। कंपनी मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण जेट फ्यूल महंगा होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने की वजह से यह कदम उठाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि एयरलाइन पहले से ही घाटे में है और अपने नए CEO की तलाश कर रही है। सभी कर्मचारियों का बोनस भी काट सकती है कंपनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में एयर इंडिया ने नॉन-टेक्निकल कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने और वाइस प्रेसिडेंट या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों की सैलरी में कटौती करने पर चर्चा की।
इसके अलावा, सभी कर्मचारियों के बोनस में भी कमी की जा सकती है। एअर इंडिया भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है और इन बदलावों की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है। घाटा बढ़ने की 3 बड़ी वजहें अगले 3 महीने तक उड़ानों की संख्या 20% कम होगी सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया के बोर्ड ने मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों को देखते हुए फ्लाइट ऑपरेशंस में कटौती का प्रस्ताव रखा है। अगले 90 दिन तक एयरलाइन अपनी उड़ानों की क्षमता को 20% से ज्यादा कम कर सकती है। यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक कि मिडिल ईस्ट की स्थिति में सुधार नहीं हो जाता। ईरान जंग के चलते कच्चा तेल 45.5% महंगा हुआ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 28 फरवरी से अब तक 45.5% बढ़ गई हैं। हालांकि, सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% पर कैप कर दिया था। इसके चलते अप्रैल में तेल कंपनियों (OMCs) ने घरेलू ATF के दाम सिर्फ 9.2% ही बढ़ाए, लेकिन इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा रही। एयरलाइंस का फ्यूल खर्च 40% से बढ़कर 60% हुआ FIA के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेक्टर में फ्यूल की कीमतों के भारी अंतर ने एयरलाइंस के नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर बना दिया है। पहले एयरलाइंस के कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा 40% होता था, जो बढ़कर 60% तक पहुंच गया है। लीडरशिप का संकट और पुराने जख्म एयर इंडिया के सामने यह मुश्किल समय तब आया है जब कंपनी के पास कोई परमानेंट सीईओ (CEO) नहीं है। अप्रैल में कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद से टाटा ग्रुप नए बॉस की तलाश कर रहा है। इसके अलावा, पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव और पुराने विमानों के मेंटेनेंस के खर्च ने भी कंपनी की कमर तोड़ दी है।
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