भोपाल की मीनाल रेसिडेंसी स्थित फिनिक्स गैस एजेंसी के मामले में ऑयल कंपनी का झूठ सामने आया है। जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद ऑयल कंपनी ने सिर्फ कागजों में एजेंसी सस्पेंड की, जबकि हकीकत ये है कि सिर्फ सेल रोकी गई थी। न तो 18 हजार ग्राहकों के कनेक्शन अन्य एजेंसी में ट्रांसफर किए और न ही उन्हें सिलेंडर की सप्लाई समय पर दी। अप्रैल में कार्रवाई के बाद खाद्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट एचपीसीएल अधिकारियों को भेजी थी और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी मांगी थी। बावजूद कंपनी अधिकारियों ने जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। 28 अप्रैल को जिला आपूर्ति अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी थी कि फिनिक्स एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड कर उसके 18 हजार उपभोक्ताओं को सहारा, बीएस और एक अन्य एजेंसी से अटैच कर दिया गया है। यह जानकारी एचपीसीएल अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन बाद में दस्तावेज सामने आने पर पता चला कि एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड नहीं किया गया था, बल्कि सिर्फ उसकी सेल रोकी गई थी। इसके बाद 12 दिन बीतने पर एचपीसीएल के सेल्स अधिकारी ने जिला प्रशासन की रिपोर्ट को नजरअंदाज करते हुए करीब 6 लाख रुपए का जुर्माना लगाकर एजेंसी को गुपचुप तरीके से बहाल कर दिया। दूसरी एजेंसियों में भी अटैच्ड नहीं की पड़ताल में सामने आया कि बहाल की जानकारी भी प्रशासन को नहीं दी गई। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिन उपभोक्ताओं को दूसरी एजेंसियों में सहारा, बीएस और एक अन्य एजेंसी से अटैच करने का दावा किया गया था। ये झूठा निकला। सहारा में एक भी कनेक्शन अटैच नहीं किए गए न किसी अन्य एजेंसी में सारे कनेक्शन कुछ दिन के दिखावे के लिए बीएस एजेंसी के हवाले कर दिए गए। ये पता होने के बाद भी कि यह एजेंसी फिनिक्स संचालक के रिश्तेदारों की है। ऐसे में कागजों में फिनिक्स एजेंसी बंद दिखाई गई, लेकिन हकीकत में पूरा नेटवर्क यहीं से चलता रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एजेंसी पर कार्रवाई के बाद निगरानी की जिम्मेदारी जिला आपूर्ति शाखा के इंस्पेक्टर और एचपीसीएल के सेल्स अधिकारी की थी। इसके बावजूद एजेंसी संचालक पूरी व्यवस्था संभालता रहा और उपभोक्ताओं का अटैचमेंट केवल औपचारिकता बनकर रह गया। दो एजेंसियों पर अब तक नहीं हुई एफआईआर पिछले दिनों भोपाल की इंडेन कंपनी की दो गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को कम गैस भरे सिलेंडर सप्लाई करते पकड़ी गई थीं। इनमें कोलार स्थित सिद्धार्थ इंडेन गैस एजेंसी और अयोध्या नगर की सैनी इंडेन एजेंसी शामिल हैं। सिद्धार्थ इंडेन गैस एजेंसी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप इंडियन ऑयल ने सस्पेंड कर दी है। एजेंसी से जुड़े करीब 7792 उपभोक्ताओं को मिसरोद की रघु इंडेन गैस एजेंसी से अटैच किया गया है। ताकि गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। वहीं, सैनी इंडेन पर अब तक न तो इंडियन ऑयल की तरफ से कोई कार्रवाई की गई है और न ही जिला प्रशासन ने कोई कदम उठाया है। खास बात यह है कि दोनों मामलों में अब तक जिला प्रशासन कार्रवाई के नाम पर कोई बड़ा एक्शन नहीं ले पाया है। जो भी कार्रवाई हुई है, वह कंपनी स्तर पर की गई है। जबकि जिला प्रशासन की जांच में यह सामने आ चुका है कि उपभोक्ताओं के साथ ठगी की जा रही थी।
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