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पति ने पत्नी से क्यों मांगा 1.80 करोड़ का हर्जाना: 1 साल की शादी, 12 दिन साथ रहे; 3 फर्जी केस और जिंदगी बर्बाद

पति ने पत्नी से क्यों मांगा 1.80 करोड़ का हर्जाना:  1 साल की शादी, 12 दिन साथ रहे; 3 फर्जी केस और जिंदगी बर्बाद


‘लंदन से MBA किया और फिर वहीं जॉब। अक्टूबर, 2007 में शादी के लिए अंग्रेजी अखबार में विज्ञापन दिया। बस एक कॉन्वेंट एजुकेटेड और वेजिटेरियन लड़की चाहिए थी। कई रिश्ते आए। आखिर में 21 अप्रैल 2008 को गुरुग्राम की शालिनी वशिष्ठ से बात तय हुई और मैं मिलने आय

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लंदन में रह रहे NRI गुरुशरण अवस्थी शादी के बाद शुरू हुए कोर्ट-कचहरी के चक्करों को याद कर आज भी परेशान हो जाते हैं। मूल रूप से मुंबई के रहने वाले गुरुशरण लंदन में एक फाइनेंस कंपनी में काम करते हैं। वे बताते हैं कि शादी हुए एक साल ही बीता था। पत्नी ने दहेज, घरेलू हिंसा और भगोड़ा होने का आरोप लगाकर एक के बाद एक तीन केस कर दिए।

9 साल की लड़ाई के बाद गुरुशरण तीनों केस से बरी हो गए लेकिन 2016 में पूर्व पत्नी शालिनी और उसके परिवार ने मेंटेनेंस को लेकर नया केस कर दिया। वो अभी कोर्ट में पेंडिंग है। गुरुशरण ने इन सबके बदले 1 करोड़ 80 लाख रुपए हर्जाना मांगते हुए पूर्व पत्नी और उसके परिवार पर केस किया। उन्होंने झूठे केस में पूरे परिवार को टॉर्चर करने और आर्थिक नुकसान को ग्राउंड बनाया है।

गुरुशरण के वकील प्रदीप नवानी बताते हैं कि शालिनी ने गुरुशरण के कोर्ट की फीस जमा न करने को मुद्दा बनाते हुए केस डिसमिस करने की अपील की थी। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में 13 अगस्त 2025 को बहुत अहम ऑर्डर पास किया। कोर्ट ने केस को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है। सुनवाई की तारीख 20 नवंबर तय की है।

NRI गुरुशरण ने दहेज केस में कोर्ट से दो बार बरी होने के बाद पत्नी पर केस दायर कर 1.80 करोड़ का हर्जाना मांगा है।

दैनिक भास्कर की टीम ने गुरुशरण अवस्थी और उनके वकील प्रदीप नवानी से बात कर पूरा केस समझा।

पहले झूठा बायोडेटा- फिर धमकियां, RTI से धोखे का पता चला लंदन में रह रहे गुरुशरण अवस्थी शादी तय होने से लेकर कोर्ट केस तक की पूरी कहानी बताते हैं। वे कहते हैं, ‘2007 अक्टूबर को मैंने अखबार में अपनी शादी के लिए ऐड दिया। हम ऐसा रिश्ता तलाश रहे थे कि लड़की कॉन्वेंट से पढ़ी हो और वेजिटेरियन हो। 21 अप्रैल 2008 को मैं शालिनी से मिला। तभी मुझे कुछ शक तो हुआ था लेकिन सबने कहा कि लड़की शर्मीली है। बड़ों ने मिलकर शादी तय कर दी।’

’27 अप्रैल 2008 को मुंबई में मेरे घर से शादी हुई। इसके बाद दो दिनों के लिए मैं शालिनी और परिवार के साथ गुरुग्राम भी आया। यहां शालिनी के परिचितों के लिए एक फंक्शन था। इसके बाद 12-13 मई तक मैं लंदन लौट गया। कुल मिलाकर हम 12 दिन साथ रहे।’

गुरुशरण कहते हैं, ‘कुछ झूठ तो तुरंत ही पता चल गए थे। जैसे शालिनी का जो बायोडेटा भेजा गया, उसमें कॉन्वेंट एजुकेटेड लिखा था। हरियाणा से ग्रेजुएट बताया था।’

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जबकि शादी की पहली ही रात शालिनी ने बता दिया था कि वो कॉन्वेंट एजुकेटेड नहीं है। उसने ये भी बताया कि शादी से पहले फोन पर मुझसे वो नहीं उसकी बहन बात करती थी।

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’शादी के बाद मैं उसके वीजा के लिए कोशिश कर रहा था। पहले तो उसने डॉक्यूमेंट देने में 6 महीने लगा दिए। वीजा अप्लाई हुआ तो वो डिक्लाइन हो गया। डॉक्यूमेंट चेक किए तो बायोडेटा और असली डॉक्यूमेंट में फर्क मिला। मैंने उन्हें चेक किया तो उसने ग्रेजुएशन हरियाणा से नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ से किया था। मैंने शालिनी से पूछा तो उसने कहा मुझे याद नहीं था।’

गुरुशरण कहते हैं, ‘मैंने छानबीन करनी चाही तो पहले घरवालों ने फोन उठाना बंद कर दिया। फिर तेज यादव नाम से जिस एडवोकेट ने शादी करवाई थी, वो केस करने की धमकियां देने लगा। मैंने RTI डालकर उसकी असली एजुकेशन पता की तब समझ आया कि मेरे साथ धोखा हुआ है।’

गुरुशरण का आरोप है कि शालिनी वशिष्ठ के परिवार ने झूठ बोलकर शादी की और फिर फर्जी केस लगाए।

गुरुशरण का आरोप है कि शालिनी वशिष्ठ के परिवार ने झूठ बोलकर शादी की और फिर फर्जी केस लगाए।

मेरे साथ मां-पिता और भाई को भी झूठे केस में फंसाया कोर्ट केसेज का सिलसिला कैसे शुरू हुआ? इस पर गुरुशरण बताते हैं, ‘शादी को करीब एक साल ही बीता था। 18 मई 2009 को शालिनी ने मुझ पर दहेज और घरेलू हिंसा का केस कर दिया। इसके बाद मुझ पर भगोड़ा होने का केस भी लगाया। एक लाइन में कहूं तो 1 साल की शादी, 12 दिन का साथ और 3 केस मेरे हिस्से में आए।’

‘उसने मेरे साथ-साथ मेरे बुजुर्ग माता-पिता, छोटे भाई गणेश और बड़ी बहन का नाम भी केस में डाल दिया। पिता का डायलिसिस चल रहा था वो जिंदगी के आखिरी पड़ाव में थे। गुरुग्राम में मेरे घर पर हर महीने पुलिस आ जाती और घरवालों को डराती-धमकाती थी। मेरे पिता बीमार हालत में ये सब देखते रहते।’

गुरुशरण रुंधी आवाज में कहते हैं, ‘मेरे बीमार पिता पुलिस को देखकर डर जाते। मां भी घबरा जातीं। मेरा छोटा भाई ये सब झेल रहा था। वो हर तारीख पर कोर्ट जाता। उसे भी पुलिस खूब डराती-धमकाती।’

गुरुशरण के मुताबिक, बस माता-पिता की उम्र देखकर उन्हें कोर्ट आने से राहत मिल गई थी।

गुरुशरण के मुताबिक, बस माता-पिता की उम्र देखकर उन्हें कोर्ट आने से राहत मिल गई थी।

पापा की चिता पर कसम खाई, इस बर्बादी का बदला लूंगा गुरुशरण आगे बताते हैं, ‘केस होने के 3 महीने बाद ही पापा की तबीयत बहुत बिगड़ गई। घर से फोन आया कि अब वो शायद ही बचें। मैं घर आने की तैयारी करने लगा। हालांकि लंदन में सबने मुझे डराया कि इंडिया गए तो पुलिस जेल में डाल देगी लेकिन मैं नहीं माना। जब भारत लौटा तो भाई जेल में था और पापा अस्पताल में थे। 2-3 दिन मैं उनके साथ रहा लेकिन पाप बच नहीं सके।’

‘पुलिस ने पापा की मौत से एक दिन पहले शाम को भाई को छोड़ा। मैंने पापा की चिता जलाते वक्त ही कसम खाई थी कि मैं इन लोगों को ऐसे ही नहीं छोड़ूंगा। अपने और अपने परिवार पर लगा बदनामी का धब्बा मिटाऊंगा। ये सारे केस खत्म करूंगा। हर बेइज्जती का बदला लूंगा।’

‘पापा की मौत के बाद मैं लंदन तो लौट गया लेकिन 2014 में भारत वापस आ गया। मैंने इन 6 सालों में लंदन में केस की स्टडी की। केस लड़ने के लिए जॉब करके पैसा इकट्ठा किया। लंदन में रहने पर भी मेरा भाई ही केस की हियरिंग में जाता था। मेरे लौटने के बाद भी वो लगातार सुनवाई में गुरुग्राम जाता रहा।’

‘इन सबके चलते दो सालों में कई बार उसकी नौकरी छूटी। फिर इन मुसीबतों से बचने के लिए वो हर महीने फ्लाइट से सुनवाई पर जाने लगा। हर महीने कम से कम दो तारीख पड़ती और आने-जाने में करीब 30 हजार रुपए खर्च हो जाते। इन सब में हम आर्थिक नुकसान तो उठा ही रहे थे। केस के चलते मेरे भाई की शादी भी नहीं हो रही थी।’

जेल में पुलिस ने भूखा रखा, डराया और धमकाया भी इंडिया लौटने के बाद आपके साथ क्या-क्या हुआ? इस पर गुरुशरण बताते हैं कि शालिनी और उसके घरवालों के कहने पर पुलिस ने मुझे भी परेशान करना शुरू कर दिया था।

वे कहते हैं, ’31 मई, 2014 की रात करीब 2 बजे गुरुग्राम पुलिस मुंबई में मेरे घर आई और मुझे अरेस्ट कर गुरुग्राम ले गई। कोर्ट में पेश करते वक्त मेरे हाथों में ऐसे हथकड़ी बांधी थी, जैसे मैं कोई बहुत बड़ा अपराधी हूं। मैं 7 दिन रिमांड पर गुरुग्राम थाना सेक्टर-56 में रहा। वहां शालिनी और उसका भाई आते और खूब गाली-गलौच करते थे।’

‘वहां पुलिस ने मुझे दो दिन तक खाने का एक दाना भी नहीं दिया। बस दिन रात टॉर्चर करते। रोज रात में 7-8 बजे 20-25 पुलिस वाले घेरकर बैठ जाते थे। मुझसे कहते थे कि कागज पर लिखो कि मैंने शालिनी को मारापीटा और टॉर्चर किया। उसे घर से भगा दिया। इतने टॉर्चर और दबाव के बाद भी मैंने उनकी बात नहीं मानी।’

रुंधी हुई आवाज में वे आगे कहते हैं,

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दो दिन बाद वहां एक महिला DCP आई। मैं उनके सामने रोने लगा और बताया कि ये लोग मुझे खाना भी नहीं दे रहे। सिर्फ डराते धमकाते हैं। तब उन्होंने पुलिस वालों को डांट लगाई। मुझे नहाने-खाने की परमिशन मिली।

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जेल में गुजारे दिनों को याद करते हुए गुरुशरण बताते हैं, ‘मैं 2014 में गुरुग्राम जेल में कुल 14 दिन की जूडिशियल कस्टडी में रहा। वहां जगह नहीं थी तो शुरुआत में मुझे टॉयलेट के बगल में लिटाया गया। बाकी कैदी पंखे के नीचे सोते लेकिन मुझे नहीं मिलता। कुछ कैदी मुझसे पैसों की डिमांड करते।’

गुरुशरण बताते हैं कि जेल में बंद बाहुबली कैदी डराते धमकाते थे। कोई कहता टीवी मत देखना तो कई कहता खड़े रहकर ही टीवी देखना पड़ेगा। कुछ पुराने कैदियों को उन्हें अपने साथ जगह दी।

गुरुशरण बताते हैं कि जेल में बंद बाहुबली कैदी डराते धमकाते थे। कोई कहता टीवी मत देखना तो कई कहता खड़े रहकर ही टीवी देखना पड़ेगा। कुछ पुराने कैदियों को उन्हें अपने साथ जगह दी।

तीनों केस में बरी होने के बाद हर्जाने में मांगे 1 करोड़ 80 लाख 2016 में शालिनी और उसके परिवार ने गुरुग्राम की ट्रायल कोर्ट में चौथा केस कर दिया। ये मेंटेनेंस यानी गुजारा भत्ता को लेकर था।

गुरुशरण बताते हैं, ‘2017 में पुलिस ने मुझे फिर जेल में डाल दिया। इस बार मैं करीब 24-25 दिन जेल में रहा। अब मैं 4 केस एक साथ लड़ रहा था। हालांकि एक-एक कर 3 केस जीत गया। मेंटेनेंस का केस अब भी कोर्ट में पेंडिंग है। मैंने इन सारे मुकदमों में कुल मिलाकर 7 दिन की रिमांड और 40 दिन की जेल काटी।‘

गुरुशरण कहते हैं, ‘तीन केस में बरी होने के बाद मैंने तय कर लिया था कि अब मैं इस नुकसान का हर्जाना लूंगा। हमने इन सालों में बहुत टॉर्चर सहा और आर्थिक नुकसान उठाया। मेरे परिवार पर धब्बा लगा। मैंने गुरुग्राम कोर्ट में पूर्व पत्नी पर केस किया।’

अब गुरुशरण के वकील की बात… दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा में दो-दो बार बरी हुए गुरुशरण इस केस को लेकर हमने गुरुशरण अवस्थी के वकील प्रदीप नवानी से भी बात की। वे कहते हैं कि गुरुशरण की पूर्व पत्नी शालिनी वशिष्ठ ने IPC की धारा 498 ए यानी दहेज प्रताड़ना का केस किया था। ट्रायल कोर्ट से गुरुशरण और उसका भाई बाइज्जत बरी हो गए। इसके बाद शालिनी ने दोबारा सेशन कोर्ट में अपील की। दोबारा ये लोग इसी केस में सेशन कोर्ट से भी बरी हुए।

प्रदीप बताते हैं, ‘फिर शालिनी की तरफ से इन पर घरेलू हिंसा का भी एक केस किया। इसमें भी तीनों पहले ट्रायल कोर्ट से और फिर सेशन कोर्ट से बरी हो गए। इसके बाद तीसरा केस गुरुशरण पर IPC की धारा 174 ए के तहत दर्ज हुआ। ये धारा तब लगती है जब किसी व्यक्ति पर भगोड़ा होने का आरोप लगता है। ये केस भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से दो बार खारिज हुआ।

अब गुरुशरण या उसके परिवार कोई क्रिमिनल केस नहीं है। अब बस एक मेंटेनेंस का केस बाकी है।

पति के हर्जाना मांगने का केस करियर में पहली बार देखा हर्जाने के केस को लेकर प्रदीप कहते हैं, ‘पूरे करियर में मैंने पहली बार ऐसा केस देखा, जिसमें कोई पुरुष दहेज, घरेलू हिंसा जैसे क्रिमिनल केसेज से बरी होने के बाद हर्जाने का केस करे।’

‘हालांकि कोर्ट ने केस सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया। कोर्ट ने कहा, ‘गुरुशरण दहेज, घरेलू हिंसा जैसे मुकदमों से दो-दो बरी हो चुके हैं। ये केस करना उनका हक है। हर्जाने में मिलने वाली रकम तय नहीं है। इसलिए कोर्ट फीस रकम तय होने के बाद भी भरी जा सकती है।

‘दरअसल ऐसे मामलों में कोर्ट की फीस मांगे गए हर्जाने की 10% होती है। फीस एडवांस में दी जाती है। पत्नी को लगा था कि इस ग्राउंड पर गुरुशरण का केस रद्द हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

वकील ने बताया, 1.80 करोड़ के क्लेम के 4 बडे़ आधार प्रदीप आगे कहते हैं, ‘वैसे तो गुरुशरण और उनकी फैमिली का इस केस में इतना हैरेसमेंट हुआ कि वो 1.8 करोड़ की रकम से पूरा नहीं हो सकता। 9 साल में दो-दो बार दहेज और घरेलू हिंसा का केस लड़ना। फिर भगोड़े होने के आरोप का सामना करना आसान नहीं है।’

‘बीता हुआ वो वक्त तो नहीं लाया जा सकता लेकिन कानूनी तौर पर गुरुशरण ने जो क्लेम किया है, उस अमाउंट के लिए 4 बड़े ग्राउंड हैं। ये अमाउंट एक करोड़ 50 लाख है। जबकि उनके भाई ने 30 लाख का अलग से क्लेम किया है। दोनों मिलाकर एक करोड़ 80 लाख का अमाउंट है।

1. इस केस की वजह से गुरुशरण की जॉब कम से कम दो बार गई। गुरुशरण को लंदन की जॉब छोड़कर इंडिया में रहना पड़ा।

2. उन्होंने मुंबई में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का चुनाव लड़ा लेकिन बहुत कम मार्जिन से हार गए। क्योंकि विपक्ष ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के केस को मुद्दा बनाया।

3. इस केस को लड़ते हुए मां और पिता की मौत हो गई। सबसे बड़ी बात ये है कि माता-पिता इस दुनिया से इतना बड़ा दाग लेकर गए। ये गुरुशरण और उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा इमोशनल ट्रॉमा है।

4. तीन केसेज में गुरुशरण और उनका परिवार एक बार नहीं दो-दो बार बरी हुआ।

प्रदीप कहते हैं, ‘गुरुशरण ने इन तीनों को आधार बनाते हुए पूर्व पत्नी शालिनी वशिष्ठ, उसके भाई-पिता और स्टेट को पार्टी बनाया है। भाई के मामले में तो हम सारे सबूत कोर्ट में सौंप चुके हैं। 2-3 महीनों में इस केस का फैसला आ सकता है, जबकि गुरुशरण के मामले में भी हम पॉजिटिव डायरेक्शन में है। एक डेढ़ साल लग सकते हैं लेकिन बाकी केसेज की तरह ये केस भी जीतने की पूरी उम्मीद है।’

इसके बाद हमने शालिनी के वकील ऋषिराज से भी बात करने की कोशिश की। उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। …………………

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