500 सालों में 50 से ज्यादा शिप्स और दर्जनों प्लेन एक खास इलाके से गुजरते हुए गायब हो गए। न मलबा मिला, न कोई लाश। बरमूडा ट्रायंगल की यही मिस्ट्री दुनिया को डराती रही है। अब वैज्ञानिकों ने वहां के समुद्र में कुछ ऐसा खोजा है, जो पूरी दुनिया में कहीं नही
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तो क्या इसबार बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य खुल गया? इसी से जुड़े सवाल समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: बरमूडा ट्रायंगल से कैसे गायब होते रहे हैं शिप्स और प्लेन?
जवाब: उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिका के फ्लोरिडा तट, ब्रिटेन के बरमूडा द्वीप और प्यूर्टो रिको द्वीप को मिलाएं, तो एक त्रिभुज बनता है। इसे ही बरमूडा ट्रायंगल कहते हैं। इसका एरिया करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर है।
साल 1492 की बात है। क्रिस्टोफर कोलंबस तीन बड़ी नौकाओं और 90 लोगों के साथ इस इलाके से गुजर रहे थे, तो कुछ अनोखा देखा। जहाज की लॉगबुक में दर्ज किया- समुद्र में आग की लपटें थीं और कंपास की रीडिंग भी असामान्य हो गई। कोलंबस वही नाविक हैं, जिन्होंने अमेरिका खोजा था।
बरमूडा ट्रायंगल से शिप गायब होने का पहला बड़ा मामला 31 दिसंबर 1812 का है। ‘पैट्रियट’ नाम का अमेरिकी जहाज साउथ कैरोलिना से न्यूयॉर्क के लिए निकला। इसमें तब के अमेरिकी उपराष्ट्रपति हारून बर्र की बेटी थियोडोसिया सवार थीं। पैट्रियट बरमूडा ट्रायंगल में अचानक गायब हो गया।
3 साल बाद USS एपेरवियर भी वहीं गायब हुआ। न इसका मलबा मिला और न इसमें सवार 135 लोगों में किसी की लाश। मार्च 1918 में अमेरिका का ‘USS साइक्लोप्स’ जहाज गायब होने के बाद दुनिया भर में खतरनाक बरमूडा ट्रायंगल की चर्चा तेज हो गई। इसमें 10 हजार टन मैंगनीज और 309 लोग सवार थे। इसके मलबे और जहाज की जानकारी 108 साल बाद भी नहीं है।

अमेरिकी जहाज ‘USS साइक्लोप्स’ की 1911 की तस्वीर।
बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर से गुजरने वाले विमानों और जहाजों के गायब होने के करीब 50 इंसीडेंट्स दर्ज हैं…
- 5 दिसंबर 1945 को 5 अमेरिकी TBM Avenger बॉम्बर विमान, एक कैप्टन और 13 ट्रेनी पायलट्स के साथ रूटीन ट्रेनिंग के लिए उड़े। सभी विमान गायब हो गए। इनको खोजने के लिए 13 लोगों सहित दो मार्टिन मेरिनर विमान भेजे गए। ये दोनों भी वापस नहीं लौटे।
- 28 दिसंबर 1948 को 39 लोगों के साथ प्यूर्टो रिको से उड़ा डगलस DC-3 विमान मियामी पहुंचने से सिर्फ 50 मील पहले गायब हो गया।
- मई 1968 में अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बी USS स्कॉर्पियन इसी इलाके से लापता हो गई। असली कारण आज भी अज्ञात है।
- 15 अक्टूबर 1976 को 590 फीट लंबा जहाज 37 क्रू मेंबर्स के साथ ब्राजील से फिलाडेल्फिया जाते समय बरमूडा में गायब हो गया। थोड़ा मलबा और एक लाइफबोट बरामद हुई।
- 18 जून 2003 को नवविवाहित कपल फ्रैंक और रोमीना लियोन नई 16 फीट की बोट से फ्लोरिडा तट से निकले और कभी वापस नहीं आए।
- 15 मई 2017 को 4 लोगों को प्यूर्टो रिको से फ्लोरिडा लेकर जा रहा विमान ‘Mitsubishi MU-2B-40’ रडार से गायब हो गया फिर कभी नहीं मिला।
सवाल-2: बरमूडा में विमान, जहाज गायब होने के पीछे क्या वजह बताई जाती है?
जवाब: बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से जुड़ी 5 प्रमुख थ्योरी और दावे किए जाते हैं…
1. नुकीले बादल एयर बम बनाते हैं
- ये सबसे हालिया थ्योरी है। अक्टूबर 2016 में कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेटियोरोलॉजिस्ट रैंडी कैरवेनी ने कहा कि यहां 20 से 55 मील चौड़े 6 कोने वाले बादल ‘एयर बम’ बनाते हैं। यानी हवा में बम ब्लास्ट जैसी ताकत पैदा करते हैं।
- इनके साथ करीब 273 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं होती हैं। ये बादल और हवाएं आपस में मिलकर जहाज या प्लेन से टकराते हैं और उन्हें खींचकर समुद्र के तल में ले जाते हैं।
2. मीथेन गैस विस्फोट थ्योरी
- 1999 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक डॉ. बेन क्लेनेल ने कहा कि समुद्र तल के नीचे दबे प्राकृतिक मीथेन हाइड्रेट गैस के चैंबर अचानक फट सकते हैं। इससे गैस एक साथ ऊपर उठती है तो पानी में झाग आ जाता है।
- इससे पानी का घनत्व इतना कम हो जाता है कि जहाज के लिए तैरना नामुमकिन हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक्सपेरिमेंट्स में ये साबित हुआ कि पानी में गैस के बुलबुले जहाज को डुबो सकते हैं। अगर ज्वलनशील गैस हवा में पहुंचे तो, प्लेन का इंजन भी बंद हो सकता है।
3. मैग्नेटिक इफेक्ट की थ्योरी
- 1950 के आसपास सबसे चर्चित थ्योरी थी कि बरमूडा ट्रायंगल पृथ्वी की कुछ जगहों में से एक है, जहां से एगोनिक लाइन गुजरती है। यहां चुंबक का नॉर्थ और पृथ्वी का नॉर्थ एक ही दिशा में होता है।
- इससे अनजान नाविक या पायलट कंपास की रीडिंग को गलत समझ लेते हैं और जहाज हादसे का शिकार हो जाता है। कुछ स्टडी में ये भी कहा गया कि बरमूडा द्वीप के नीचे मजबूत मैग्नेटिक फील्ड है, जो जहाजों को खींच लेती है।
4. ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉग’ और ‘टाइम वार्प’ थ्योरी
- 1970 में फ्लोरिडा के अनुभवी पायलट ब्रूस जेर्नोन ने कहा था कि उन्होंने एंड्रोज आइलैंड से फ्लोरिडा जाते समय एक अजीब शेप का बादल देखा, जो एक सुरंग में बदल गया। इस सुरंग में ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉग’ था, जिससे उनकी सभी डिवाइस बंद हो गईं।
- जब वे इस सुरंग से बाहर निकले तो उन्होंने पाया कि उन्होंने 100 मील की दूरी सिर्फ 3 मिनट 20 सेकंड में तय कर ली थी, जिसमें सामान्यतः एक घंटे का समय लगता। उन्होंने 2016 में अपनी किताब ‘Beyond the Bermuda Triangle’ में इसके बारे में लिखा है।

पायलट ब्रूस जेर्नोन इसी ‘बीचक्राफ्ट बोनांजा’ नाम के एयरक्राफ्ट को उड़ा रहे थे, उनके साथ विमान में दो लोग और थे।
5. विशालकाय भटकती लहरें
- 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैम्प्टन की स्टडी में कहा गया कि बरमूडा ट्रायंगल में अलग-अलग दिशाओं से आने वाले तूफान आपस में टकराकर 30 मीटर की बड़ी लहरें पैदा कर सकते हैं। ये जहाजों को डुबोने के लिए काफी हैं।
ये भी कहा जाता है कि बरमूडा ट्रायंगल में पानी के अंदर एलियंस का एक स्पेस शिप है, जो अपनी तकनीक से गुजरते जहाजों और विमानों को निशाना बनाता है। 1974 में चार्ल्स बर्लिट्ज की किताब ‘The Bermuda Triangle’ से प्रचलित हुआ कि बरमूडा ट्रायंगल के नीचे ‘खोया हुआ पौराणिक शहर ‘अटलांटिस’ है। उस सभ्यता की उन्नत तकनीक आज भी एक्टिव है, जो गुजरने वाले जहाजों और विमानों को खींचती है।
सवाल-3: अब वैज्ञानिकों को इस इलाके के बारे में क्या पता चला है?
जवाब: अमेरिका के कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक विलियम फ्रेजर और जेफरी पार्क की टीम ने एक रिसर्च की है। कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस की वेबसाइट पर 8 मई को ये रिसर्च छपी है। इससे पता चला कि बरमूडा द्वीप के नीचे एक ऐसा खास स्ट्रक्चर है, जिसे दुनिया में और कहीं नहीं देखा गया है।
दरअसल, समुद्र के बीच में ज्वालामुखी का पहाड़ या द्वीप उसके नीचे के ‘मेंटल प्लम’ के ऊपर बनता है। ‘मेंटल प्लम’ यानी धरती के अंदर का बेहद गर्म चट्टानों का गुबार। ये समुद्र की तली को ऊपर की तरफ धकेलता है। हालांकि समय के साथ टेक्टोनिक प्लेटें खिसकती हैं और ये द्वीप वापस नीचे की तरफ धंसने लगते हैं।
जबकि बरमूडा द्वीप के मामले में ऐसा नहीं है। 3 करोड़ साल से भी ज्यादा समय से बरमूडा के नीचे ज्वालामुखी पूरी तरह शांत है। फिरे भी बरमूडा द्वीप समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर टिका हुआ है।
इस गुत्थी को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने बरमूडा के इलाके में भूकंप की तरंगों के जरिए द्वीप के 20 मील नीचे की एक तस्वीर तैयार की। इससे पता चला कि समुद्री क्रस्ट के नीचे 12 मील मोटी एक अजीबोगरीब चट्टान की परत है।
ये परत आसपास के मेंटल की तुलना में बहुत हल्की और कम घनत्व वाली है। ये हल्की चट्टान एक नाव की तरह काम कर रही है। इसी के सहारे बरमूडा और उसके आसपास का समुद्री तल तैर रहा है।

रिसर्च में इस तरह के डायग्राम के आधार पर दिखाया गया है कि ये हल्की चट्टान ‘अंडरप्लेट’की तरह काम कर रही है और बरमूडा को ऊपर उठाए है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब ये खोजना बाकी है कि क्या दुनिया के किसी और द्वीप के नीचे भी इसी तरह की कोई हल्की चट्टान है या नहीं।
सवाल-4: क्या इस नई खोज से बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य खुल जाएगा?
जवाब: नहीं, ये रिसर्च सिर्फ बरमूडा द्वीप के भूगर्भ से जुड़ी है। बरमूडा द्वीप का एरिया सिर्फ 54 वर्गकिमी है। जबकि बरमूडा ट्रायंगल 13 लाख वर्ग किमी का समुद्री इलाका है। वैज्ञानिकों ने भी इस रिसर्च में बरमूडा ट्रायंगल में जहाज डूबने या विमानों के हादसे का जिक्र नहीं किया है।
हालांकि बरमूडा द्वीप को लेकर ये जानकारी नई जरूर है, साथ ही किसी और द्वीप के नीचे इस तरह के अनोखे स्ट्रक्चर की जानकारी अब तक नहीं है, इसलिए इसे बरमूडा ट्रायंगल के रहस्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो बरमूडा ट्रायंगल में जहाजों और विमानों के गायब होने के पीछे किसी रहस्यमयी थ्योरी से इनकार करता है।
सवाल-5: बरमूडा ट्रायंगल में वाकई कोई रहस्य छिपा है, या सिर्फ सामान्य हादसे हैं?
जवाब: अमेरिकी मौसम विभाग से जुड़ी संस्था ‘नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’, यानी NOAA के मुताबिक, ‘बरमूडा ट्रायंगल इलाके में होने वाले हादसे खराब मौसम, मुश्किल नेविगेशन और इंसानी गलतियों की वजह से होते हैं। इनके पीछे कोई सुपरनैचुरल पावर नहीं है।’
इसी तरह अमेरिकी रिसर्चर लॉरेंस डेविड कुस्चे अपनी किताब ‘द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री सॉल्व्ड’ में लिखते हैं, ‘ट्रायंगल पर हुए हादसों पर जो रिपोर्ट्स सामने आईं, उनमें से ज्यादातर बढ़ा-चढ़ाकर लिखी गई हैं। ये हादसे दुनिया के दूसरे समुद्री रास्तों पर होने वाले हादसों से ज्यादा नहीं हैं।’
हवाई जहाजों और शिप्स का इंश्योरेंस करने वाली कंपनी ‘लॉयड ऑफ लंदन’ को अपनी रिसर्च में बरमूडा ट्रायंगल के ज्यादा खतरनाक होने के पुख्ता सबूत नहीं मिले। इसके बाद 1970 के दशक में कंपनी ने बरमूडा ट्रायंगल से गुजरने वाले जहाजों के लिए बीमा के बदले एक्सट्रा प्रीमियम लेना बंद कर दिया।
सिंगापुर के रिसर्चर डेरिक ली ने 2021 में दुनिया भर के 85 हजार से ज्यादा विमान हादसों का एनालिसिस किया। इसमें बरमूडा ट्रायंगल के अंदर महज 56 हादसे मिले। डेरिक के मुताबिक, ‘इन हादसों के पैटर्न खोजने पर कुछ भी असामान्य या रहस्यमयी नहीं मिला। ये मौसम की खराबी से जुड़े साधारण हादसे थे, जो दुनिया की बाकी जगहों पर भी देखने को मिलते हैं।
अक्टूबर 2024 में नाइजीरिया के प्रोफेसर चिगोजी एके ने कहा था कि कुछ न्यूज चैनलों ने बरमूडा ट्रायंगल की खबरों को सनसनीखेज बना दिया, जिससे लोगों में डर पैदा हुआ और इसे सच माना जाने लगा।
दुनिया में कई समुद्री इलाके हैं, जिन्हें बरमूडा से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है। उदाहरण के लिए ड्रेक पैसेज, अर्जेंटीना। चिली के केप हॉर्न और अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड द्वीपों के बीच मौजूद ड्रेक पैसेज में लहरें अक्सर 40 फीट तक पहुंच जाती हैं। यहां लगभग 800 जहाज तबाह हो चुके हैं और करीब 20 हजार नाविकों की मौत हो चुकी है। सबसे चर्चित हादसा 1819 में स्पेन के जहाज ‘सैन टेल्मो’ के डूबने का है, जिसमें 644 लोगों की मौत हुई थी।
आस्ट्रेलियाई साइंटिस्ट डॉ. कार्ल क्रुजेलनिकी कहते हैं कि बरमूडा ट्रायंगल के हादसों के लिए एलियंस के बजाय खराब प्लानिंग को जिम्मेदार ठहराना चाहिए। ये कोई सुपरनैचुरल पावर नहीं, बल्कि प्रकृति की ताकत और इंसानी गलतियों का नतीजा है।
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रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास ————————————-
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